वॉट्सऐप पर बनाया डिजिटल बंधक: पुलिस की विशेष टीम ने तोड़ा ठगों का जाल
लखनऊ: साइबर अपराधियों की क्रूर चालबाजी का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां लखनऊ की एक 73 वर्षीय बुजुर्ग महिला को 17 दिनों तक “डिजिटल अरेस्ट” के जाल में फंसाकर 56 लाख रुपये ठग लिए गए। कमिश्नरेट के साइबर थाने की पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में तीन शातिर ठगों को धर दबोचा है, जो खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर बुजुर्ग को डराने-धमकाने का गंदा खेल खेल रहे थे।
वॉट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए 17 दिन तक वॉट्सऐप पर बनाया डिजिटल बंधक!
लखनऊ के ऐशबाग की आईटी कॉलोनी निवासी रीता भसीन की जिंदगी उस वक्त नर्क बन गई, जब उनके पास एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉलर ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए दावा किया कि उनके मोबाइल और आधार नंबर का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर अपराधों में हुआ है। इसके बाद शुरू हुआ ठगों का खौफनाक खेल। वॉट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए, पुलिस की वर्दी में सजे एक शख्स ने रीता को डराना शुरू किया। फर्जी अरेस्ट वारंट और सुप्रीम कोर्ट के नाम पर जाली सीजर ऑर्डर भेजकर उन्हें जेल की धमकी दी गई।
रीता को 17 दिनों तक एक कमरे में अकेले रहने और हर पल वीडियो कॉल पर ठगों के सामने रहने के लिए मजबूर किया गया। इस दौरान उन्हें परिवार या किसी से संपर्क करने की सख्त मनाही थी। डर और दबाव में आईं रीता ने ठगों के कहने पर सुप्रीम कोर्ट के नाम पर बताए गए फर्जी बैंक खाते में 56 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए, यह सोचकर कि यह राशि जांच के बाद वापस मिल जाएगी।
पुलिस की विशेष टीम ने तोड़ा ठगों का जाल
रीता की शिकायत के बाद साइबर थाने के इंस्पेक्टर बृजेश यादव ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने एक विशेष टीम गठित कर बुधवार देर रात तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान बल्दिराय, सुल्तानपुर के अनुराग तिवारी, मिल एरिया, रायबरेली के प्रखर प्रताप सिंह, और अंबेडकर नगर, रायबरेली के अनुपम सिंह के रूप में हुई। ये शातिर अपराधी पीड़ितों को आधार और मोबाइल नंबर के दुरुपयोग का डर दिखाकर ठगी करते थे।कैसे काम
पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को फंसाते हैं ये अपराधी
पुलिस के अनुसार, ये अपराधी खुद को सीबीआई, ईडी या पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को फंसाते हैं। वीडियो कॉल, स्काइप, या अन्य प्लेटफॉर्म्स के जरिए पीड़ितों को डिजिटल अरेस्ट में रखकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं। फर्जी दस्तावेज, जैसे अरेस्ट वारंट और कोर्ट ऑर्डर, दिखाकर भय पैदा करते हैं और भारी रकम वसूलते हैं। इस मामले में भी ठगों ने रीता को डराकर उनके बैंक खाते से लाखों रुपये हड़प लिए।

साइबर पुलिस की चेतावनी: सतर्क रहें, सुरक्षित रहें!
लखनऊ पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे फर्जी कॉलों से सावधान रहें। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए जांच या गिरफ्तारी नहीं करती। अगर कोई आपको डिजिटल अरेस्ट की धमकी दे या पैसे मांगे, तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें। अपनी निजी जानकारी, जैसे आधार, पैन या बैंक डिटेल्स, कभी भी अज्ञात कॉलर के साथ साझा न करें।
जागरूकता ही एक मात्र बचाव है!
यह मामला डिजिटल ठगी की बढ़ती घटनाओं का एक और सबूत है। खासकर बुजुर्ग लोग इन ठगों का आसान निशाना बन रहे हैं। लखनऊ पुलिस ने इस गिरोह के अंतरराज्यीय कनेक्शन की जांच शुरू कर दी है और अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। नागरिकों से अनुरोध है कि वे “रुकें, सोचें, और कदम उठाएं” ताकि इस तरह के साइबर अपराधों से बचा जा सके।







