डॉ दिलीप अग्निहोत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी विदेश नीति में यूरोप को भी प्राथमिकता दी थी। इसके चलते यूरोपीय देशों के साथ भारत के रिश्तों में बहुत सुधार आया। पिछले कुछ वर्षों में व्यापारिक और आर्थिक क्षेत्र सहयोग बढा है। रणनीतिक क्षेत्र में यही स्थिति है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ब्रिटेन और फ्रांस ने भारत का समर्थन किया। फ्रांस से राफेल विमान भी समय से भारत को मिला है। इसी प्रकार नीदरलैंड से भी नरेंद्र मोदी के पिछले कार्यकाल में ही रिश्ते मजबूत हुए थे। तब भारत और नीदरलैंड के बीच अनेक मुद्दों पर सहमति बनी थी। इससे सहयोग आगे बढ़ा। इस क्रम में दोनों देशों का संयुक्त प्रौद्योगिकी सम्मेलन आयोजित मिया गया। इसमें कृषि, जल प्रबंधन एवं स्वास्थ्य आदि पर साझा प्रयास के संबन्ध में विचार किया गया। इसका आयोजन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा भारतीय उद्योग परिसंघ ने किया था।
नीदरलैंड के किंग अलेक्जेंडर ने कहा कि भारत ऊर्जा से भरपूर है। वह सूचना प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के क्षेत्र में वह दुनिया का नेतृत्व करने वाले अग्रणी देशों में शामिल हो चुका है। इस मामले में नीदरलैंड भारत के साथ दीर्घकालीन सहयोग में निवेश करना चाहता है। नीदरलैंड में कई भारतीय वैज्ञानिक,आईटी पेशेवर और नवोद्यमी काम करते हैं। भारतीय छात्र वहाँ अध्ययन कर रहे हैं। भारत ने दिखाया है कि नवाचार किफायती भी हो सकता है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत द्वारा विकसित किफायती नवाचार प्रेरणादायक है। कृषि, जल प्रबंधन एवं जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में यूरोपीय देश के पास काफी ज्ञान है। उसके पास पंजाब से भी कम जमीन है इसके बावजूद वह दुनिया का दूसरा बड़ा कृषि उत्पाद निर्यातक है। पानी नीदरलैंड के डीएनए में है।जल प्रबंधन के बिना उसका अस्तित्व ही संभव नहीं है। भारत और नीदरलैंड एक दूसरे के पूरक हैं।दोनों में एक-दूसरे को और मजबूत बनाने की क्षमता है।

गरीबी उन्मूलन, भूखमरी समाप्त करने, रोजगार सृजन, आतंकवाद के खात्मे और मानवाधिकार के क्षेत्र में दोनों देश सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए है। जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा तथा किफायती स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावना है। कृषि पर तथा जल प्रबंधन पर नीदरलैंड के ज्ञान को मिलाकर बेहतर कार्य किया जा सकता है। इससे खाद्य सुरक्षा और किसानों की आमदनी दुगुनी करने में सहायता मिलेगी। इससे स्टार्ट अप में भी मदद मिलेगी। सम्मेलन में दोनों देशों अनेक कम्पनियां शामिल हुई। नीदरलैंड के राजा की भारत यात्रा के दौरान अनेक समझौते व परियोजनाओं पर भी कदम बढ़ाए गए। बारापुला नाले के गंदे पानी को साफ करने से संबंधित भारत डच परियोजना के दूसरे चरण का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर शाही दंपत्ति भी मौजूद थे।
इसे भारत सरकार का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग तथा नीदरलैंड का ऑर्गेनाइजेशन फॉर साइंटिफिक रिसर्च संयुक्त रूप से चला रहा है। दूसरे चरण में प्रति दिन दस हजार लीटर सीवेज पानी को साफ किया जाएगा। डच और भारतीय कंपनियां अपनी मौजूदा तकनीकों को साझा करके परियोजना में योगदान देंगी। इस प्रकार की कई अन्य शोधन परियोजनाएं भी चलाई जायेंगीं। इसमें कचरे को भी उपयोगी बनाने पर कार्य होगा। इससे स्वच्छ भारत मिशन भी सफल हो सकेगा।
ऐसी परियोजना से जल प्रबंधन होता है। पानी स्वच्छ होता है। यह पुनः उपयोग के लायक बनता है। जाहिर है कि नीदरलैंड के राजा की भारत यात्रा उपयोगी साबित हुई। अनेक क्षेत्रों में भारत और नीदरलैंड के बीच सहयोग बढा है। खासतौर पर कृषि और जलप्रबंधन पर सहयोग से उत्पादन में वृद्धि होगी, और किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी।







