कुलपति, कुलसचिव को सौंपा ज्ञापन, कारण बताओ का नोटिस जारी
लखनऊ, 23 जुलाई 2018: बीबीएयू में आज एक विवाद फिर देखने को मिला जहां प्रबन्धन विभाग के एमबीए में 50% आरक्षण लागू न होने से छात्र भड़क उठे। बताया जाता है कि एमबीए में कुल 240 सीटों में 50% आरक्षण का पालन नही किया गया, जिससे छात्र आक्रोशित हो उठे।
मिली जानकारी के अनुसार लखनऊ के बहुजन छात्र संगठन अम्बेडकर यूनिवर्सिटी दलित स्टूडेंट्स यूनियन के छात्रों ने प्रबन्धन विभाग के एमबीए में 50% आरक्षण लागू न होने से कुलपति, कुलसचिव को ज्ञापन सौंपा, और कुलसचिव ने मामले को संज्ञान में लेते हुए तुरन्त 50% आरक्षण लागू कर काउंसिलिंग सूची दुबारा निकालने के आदेश दिया और इसके अलावा हेड को कारण बताओ का नोटिस जारी कर दिया है।
एक प्रेस रिलीज़ के माध्यम से मिली जानकारी के अनुसार बताया गया कि भारत की एक मात्र एससी /एसटी केंद्रीय यूनिवर्सिटी बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ जिसमे एससी /एसटी छात्रो के लिए संसद से पारित 50% आरक्षित सीटें है जिसमें अनुसूचित जाति/जनजाति की 50% आरक्षित सीटें होने के बावजूद भी एससी /एसटी के हजारों छात्रों को प्रवेश रोका जा रहा है।
संघटन ने आरोप लगाया कि रूरल मैनेजमेंट (एमबीए) में कुल सीटे-60 जनरल -30, एससी /एसटी-30 हैं। लेकिन विभाग के प्रो ने जनरल प्रवेश सूची में 30 छात्रो को कॉउंसलिंग में बुलाया, लेकिन 30 एससी /एसटी के प्रवेश सूची में सिर्फ दो छात्रों को कॉउंसलिंग में बुलाया है। जबकि 28 सीटे रिक्त कर दी गयी।

उन्होंने बताया कि मैनेजमेंट में कुल सीटे- 180 जनरल – 90, एससी/एसटी-90 । लेकिन उक्त प्रो ने जनरल प्रवेश सूची में 90 छात्रो को कॉउंसलिंग में बुलाया है लेकिन 90 एससी /एसटी के प्रवेश सूची में सिर्फ 37 छात्रों को कॉउंसलिंग में बुलाया है। एससी/एसटी छात्रो की सुनियोजित ढंग से 53 सीटे रिक्त कर दी है । जोकि छात्रो को बुलाया नही गया है।
संघटन ने आरोप लगाया कि इससे पूर्व पिछले सत्र 2017-18 में भी प्रो ने एससी /एसटी विरोधी कार्य किये हैं जिसमें पीचडी/एम फिल (एससी /एसटी) के छात्रो का प्रवेश रोक दिया था तो छात्रो ने 2017-18 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाइकोर्ट के आदेश पर प्रबंधन ने कुछ छात्रो का लिया लेकिन फिर भी कोर्ट में 4 केस होने के बावजूद भी प्रो ने एक एससी छात्र का पीएचडी में प्रवेश नही लिया।
बहुजन छात्रो ने कुलपति और कुलसचिव से मांग की है कि उपरोक्त तथ्यों को संज्ञान में लेते हुए प्रो को तत्काल प्रभाव Head & Dean पद से हटाकर किसी अन्य प्रोफेसर को चार्ज दिया जाये जिससे विवि में एससी /एसटी विरोधी कार्य न हो सके।







