देशभर में भक्ति और उत्सव की धूम, मथुरा से मुंबई तक रंगारंग आयोजन
नई दिल्ली, 17 अगस्त 2025: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पवित्र पर्व 16 अगस्त 2025 को पूरे भारत में अपार उत्साह और भक्ति के साथ मनाया गया। भगवान श्रीकृष्ण के 5252वें जन्मोत्सव को समर्पित इस त्योहार ने मथुरा, वृंदावन, द्वारका और मुंबई जैसे शहरों को भक्ति और उल्लास के रंगों में रंग दिया। मंदिरों में मध्यरात्रि पूजा, भक्ति भजनों की स्वरलहरियाँ, रासलीला और दही हांडी के रोमांच ने इस अवसर को अविस्मरणीय बना दिया।
मथुरा-वृंदावन में आध्यात्मिक उमंग
मिली जानकारी के मुताबिक श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा और उनकी लीलास्थली वृंदावन में लाखों भक्तों का सैलाब उमड़ा। इस दौरान मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में रात 12:04 बजे से 12:47 बजे तक पूजा हुई, जिसमें भक्तों ने माखन, मिश्री और पंचामृत का भोग लगाया। मंदिर प्रबंधन के एक अधिकारी ने बताया, “इस बार भगवान का श्रृंगार सात रंगों के फूलों और रेशमी वस्त्रों से किया गया, जो ‘सतरंगी भक्ति’ थीम पर आधारित था।” वृंदावन के बांके बिहारी और इस्कॉन मंदिरों में रासलीला, कीर्तन और नृत्य ने भक्तों को भावविभोर कर दिया।
घर घर में पूजे गए लड्डूगोपाल, खूब बनी रील्स और हुए लाइव स्ट्रीमिंग
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर देशभर के घरों में लड्डू गोपाल की पूजा ने भक्ति का अनूठा रंग बिखेरा। भक्तों ने अपने घरों में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को माखन-मिश्री और पंजीरी का भोग लगाया। मथुरा, वृंदावन और दिल्ली, लखनऊ, बरेली जैसे अन्य शहरों में मंदिरों में “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयकारों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। रासलीला के मंचन ने भक्तों को श्रीकृष्ण की लीलाओं में डुबो दिया, जबकि इस्कॉन मंदिरों ने यूट्यूब और सोशल मीडिया पर लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए विश्वभर के भक्तों को जोड़ा। मुंबई में दही हांडी के आयोजनों की लाइव स्ट्रीमिंग ने भी लाखों लोगों को आकर्षित किया। यह उत्सव भक्ति और आधुनिकता के संगम का प्रतीक बना।
मुंबई में दही हांडी का जोश
महाराष्ट्र में जन्माष्टमी का मुख्य आकर्षण रहा दही हांडी उत्सव। मुंबई के ठाणे, दादर और वर्ली जैसे इलाकों में गोविंदाओं ने ऊँचे मानव पिरामिड बनाकर दही हांडी तोड़ने का रोमांचक प्रदर्शन किया। इस बार महाराष्ट्र सरकार ने गोविंदाओं की सुरक्षा के लिए 12 लाख रुपये का बीमा कवर और आपातकालीन चिकित्सा सहायता की व्यवस्था की। “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के नारों ने मुंबई की गलियों को गूंजायमान कर दिया।
दिल्ली और अन्य शहरों में उत्साह
राजधानी दिल्ली में इस्कॉन मंदिर, लक्ष्मी नगर और अन्य प्रमुख मंदिरों में सुबह से देर रात तक भक्ति आयोजन हुए। भक्तों ने कलश अभिषेक, भगवद्गीता पाठ और भजन संध्या में हिस्सा लिया। दिल्ली पुलिस ने मंदिरों के आसपास यातायात को सुगम बनाने के लिए विशेष प्रबंध किए। कोलकाता में श्रीकृष्ण मंदिरों को दीयों से सजाया गया, जबकि चेन्नई और बेंगलुरु में भक्तों ने भगवान के बाल स्वरूप की विशेष पूजा की। पुणे में रासलीला और नाट्य मंचन ने सभी का ध्यान खींचा।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों को दीं शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई! यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम और ज्ञान को जीवंत करता है। आप सभी के जीवन में सुख और समृद्धि आए।” राष्ट्रपति ने भी श्रीकृष्ण के कर्तव्य और धर्म के संदेश को अपनाने की अपील की।
भक्तों ने फलाहार के साथ व्रत खोला
जन्माष्टमी पर भक्तों ने व्रत रखा और मध्यरात्रि पूजा के बाद फलाहार के साथ व्रत खोला। दक्षिण भारत में, केरल और तमिलनाडु में घरों में श्रीकृष्ण के छोटे पैरों के निशान बनाए गए, जो उनके आगमन का प्रतीक हैं। उड़ीसा के जगन्नाथ मंदिर और गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर में भव्य भोग और आरती का आयोजन हुआ। यह पर्व श्रीकृष्ण के जीवन, उनकी शरारतों और गीता के उपदेशों को याद करने का अवसर रहा।
देश विदेश में भी मनाया गया उत्सव
जन्माष्टमी की धूम केवल भारत तक सीमित नहीं रही। इस्कॉन के प्रयासों से अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और नेपाल में भी उत्सव मनाया गया। लंदन में 60,000 से अधिक भक्तों ने भक्तिवेदांत मनोर में कीर्तन और प्रसाद वितरण में हिस्सा लिया। न्यूयॉर्क और सिंगापुर में श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित नाटकों का मंचन हुआ।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2025 ने भारत और विश्वभर में भक्ति, संस्कृति और सामुदायिक एकता का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। मथुरा की भक्ति से लेकर मुंबई की दही हांडी तक, यह त्योहार श्रीकृष्ण के प्रेम, शरारत और आध्यात्मिक संदेशों का प्रतीक बना। भक्तों ने “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के उद्घोष के साथ इस पर्व को हर्षोल्लास से मनाया।







