लखनऊ, 12 अगस्त 2025: उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अनिवार्य स्थापना और बिना उपभोक्ता सहमति के कन्वर्जन को लेकर विवाद गहरा गया है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने विद्युत अधिनियम 2003 के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए विद्युत नियामक आयोग में लोक महत्व का प्रस्ताव दाखिल किया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह और सदस्य संजय कुमार सिंह से मुलाकात कर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
बिना सहमति 3.34 लाख मीटर प्रीपेड में बदले
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अनुसार, 11 अगस्त 2025 तक राज्य में कुल 33,51,971 स्मार्ट प्रीपेड मीटर स्थापित किए गए हैं। इनमें से 3,34,561 मीटर ऐसे थे जो बिना उपभोक्ताओं की अनुमति के प्रीपेड मीटर मोड में परवर्तित कर दिए गए। उपभोक्ता परिषद ने इसे विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) का स्पष्ट उल्लंघन बताया है, जो प्रीपेड मीटर स्थापना को उपभोक्ता की स्वेच्छा पर निर्भर करता है। परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं की सिक्योरिटी राशि को बिना अनुमति के रिचार्ज में परिवर्तित कर रही हैं, जिससे बिलिंग संबंधी कई परेशानियां सामने आ रही हैं।
धारा 56 का उल्लंघन और बकाया नोटिस का सवाल
परिषद ने विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 56 का हवाला देते हुए कहा कि बकाया होने पर कम से कम 15 दिन की नोटिस के बिना बिजली कनेक्शन नहीं काटा जा सकता। लेकिन स्मार्ट प्रीपेड मीटर में बकाया होने पर कनेक्शन स्वतः कट जाता है, जो इस प्रावधान का उल्लंघन है। वर्मा ने सवाल उठाया कि बिजली कंपनियां इस नियम को कैसे लागू करेंगी।
चीनी कंपोनेंट और मीटर की खराबी की शिकायतें
उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। वर्मा ने आरोप लगाया कि इन मीटरों में 90% चीनी कंपोनेंट का उपयोग हो रहा है, जिसे बिजली कंपनियों के अधिकारी नजरअंदाज कर रहे हैं। परिणामस्वरूप, मीटर तेज चलने और “जंपिंग” की शिकायतें सामने आ रही हैं। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में सॉफ्टवेयर बदलाव के बावजूद समस्याएं बरकरार हैं। परिषद ने दावा किया कि 25,000 करोड़ की परियोजना में निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए घटिया मीटर लगाए जा रहे हैं।
आयोग से कार्रवाई की मांग
वर्मा ने आयोग से मांग की कि बिना सहमति प्रीपेड मोड में बदले गए मीटरों को तत्काल पोस्टपेड में लौटाया जाए और दोषी बिजली कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार के नियम विद्युत अधिनियम 2003 को ओवरराइड नहीं कर सकते। इसके अलावा, उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली आपूर्ति और स्मार्ट मीटर पर 5% रिबेट जैसे उपभोक्ता हितों के नियम लागू करने की मांग की।
पावर कॉर्पोरेशन का दावा
पावर कॉर्पोरेशन ने दावा किया कि स्मार्ट मीटर परियोजना केंद्र की RDSS योजना का हिस्सा है, और मीटर की गुणवत्ता पर नजर रखी जा रही है। हालांकि, उपभोक्ता परिषद ने इसे अपर्याप्त बताते हुए कहा कि पूर्व में 40 लाख मीटर का प्रोजेक्ट विफल हो चुका है, और मौजूदा मीटर भी उपभोक्ताओं के लिए परेशानी बन रहे हैं।
इस मसले पर उपभोक्ता परिषद ने चेतावनी दी कि यदि आयोग ने तत्काल कार्रवाई नहीं की, तो उपभोक्ता आंदोलन तेज होगा। इस बीच, बिजली कंपनियों से जवाब मांगा गया है। बता दें कि यह मामला अब नियामक आयोग के निर्णय पर निर्भर करता है, जो बिजली उपभोक्ताओं के हितों और स्मार्ट मीटर परियोजना की दिशा तय करेगा।







