उत्तराधिकारी को लेकर अटकलें जारी, मुश्किल दौर से गुजर रही है चीन की अर्थ व्यस्था
बीजिंग, 8 जुलाई 2025: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सत्ता पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। 12 साल से अधिक समय से देश के सर्वोच्च नेता के रूप में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने वाले शी जिनपिंग के हालिया फैसलों ने सत्ता परिवर्तन की अटकलों को हवा दे दी है। जानकारी के मुताबिक, शी ने पहली बार सत्तारूढ़ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के प्रमुख संगठनों को महत्वपूर्ण अधिकार सौंपने शुरू किए हैं, जिसे विश्लेषक उनके व्यवस्थित सत्ता हस्तांतरण या संभावित सेवानिवृत्ति की तैयारी के रूप में देख रहे हैं।नए नियमों की
समीक्षा ने बढ़ाई हलचल
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, सीपीसी के शक्तिशाली 24-सदस्यीय पोलित ब्यूरो ने 30 जून 2025 को हुई अपनी बैठक में पार्टी के संस्थानों के कामकाज को लेकर नए नियमों की समीक्षा की। इस बैठक की अध्यक्षता खुद शी जिनपिंग ने की, लेकिन इसके बाद से अगले संभावित नेता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये नियम शी की सेवानिवृत्ति की तैयारियों का संकेत हो सकते हैं। हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने एक अनाम विश्लेषक के हवाले से कहा, “यह सत्ता परिवर्तन के लिहाज से महत्वपूर्ण समय है। नए नियम पार्टी निकायों को विनियमित करने और सत्ता हस्तांतरण को सुचारू बनाने के लिए बनाए गए हो सकते हैं।”
शी की अनुपस्थिति ने बढ़ाया संदेह
हाल के महीनों में शी जिनपिंग की सार्वजनिक उपस्थिति में कमी भी इन अटकलों को बल दे रही है। मई 2024 के अंत से जून 2024 की शुरुआत तक वह किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर नहीं आए। इसके अलावा, ब्राजील में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में उनकी अनुपस्थिति ने भी सवाल खड़े किए हैं, क्योंकि सत्ता संभालने के बाद यह पहली बार है जब उन्होंने इस सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया। X पर कुछ यूजर्स ने दावा किया कि शी की “रहस्यमयी गैरमौजूदगी” और सरकारी मीडिया में उनके सीमित कवरेज से “तख्तापलट” की आशंकाएं बढ़ रही हैं, हालांकि ये दावे पुष्ट नहीं हैं।
संभावित उत्तराधिकारी कौन?
शी जिनपिंग ने अभी तक किसी स्पष्ट उत्तराधिकारी का नाम नहीं लिया है, लेकिन बीजिंग के सत्ता गलियारों में कुछ नाम चर्चा में हैं। इनमें शामिल हैं: ली क्यांग: मौजूदा प्रधानमंत्री और शी के करीबी सहयोगी, जिन्होंने शंघाई में कोविड लॉकडाउन के दौरान कठोर प्रशासन के लिए सुर्खियां बटोरीं।
- जनरल झांग यूक्सिया: केंद्रीय सैन्य आयोग के पहले उपाध्यक्ष, जिन्हें सैन्य समर्थन प्राप्त है।
- वांग हुनिंग: पार्टी के विचारधारात्मक “थिंक टैंक”, जिन्होंने “शी जिनपिंग थॉट” को आकार दिया।
- डिंग श्वेइशियांग: शी के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ और उनके विश्वासपात्र।
इसके अलावा, पूर्व उप-प्रधानमंत्री वांग यांग को भी एक तकनीकी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, जिनकी आर्थिक विशेषज्ञता और स्वच्छ शासन रिकॉर्ड के लिए वैश्विक स्वीकार्यता है।
आर्थिक और आंतरिक चुनौतियां
शी जिनपिंग का यह कदम ऐसे समय में आया है जब चीन आर्थिक और आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहा है। अमेरिका के साथ टैरिफ युद्ध के कारण चीन का 440 अरब डॉलर का निर्यात प्रभावित हुआ है। इसके अलावा, आर्थिक विकास दर में सुस्ती और आवास बाजार की कमजोरी ने दबाव बढ़ाया है। पार्टी के भीतर भी असंतोष की खबरें हैं। कुछ सूत्रों के मुताबिक, शी की वैचारिक कठोरता और केंद्रीकरण नीतियों से सीपीसी के प्रमुख गुट निराश हैं। ली शांगफू और किन गैंग जैसे उनके भरोसेमंद अधिकारियों को हटाए जाने से आंतरिक असुरक्षा बढ़ी है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के चीनी राजनीति विशेषज्ञ विक्टर शिह का कहना है कि शी जिनपिंग रोजाना के कामकाज के लिए एक निगरानी तंत्र बना रहे हैं और 2027 में अपने तीसरे कार्यकाल के अंत में सत्ता छोड़ने या बरकरार रखने का फैसला लेंगे। वहीं, कुछ विश्लेषक इसे शी की रणनीति का हिस्सा मानते हैं, जिसमें वह अपनी शक्तियों को साझा कर पार्टी के भीतर संतुलन बनाना चाहते हैं।
उत्तराधिकारी को लेकर अटकलें जारी
2027 में होने वाली सीपीसी की अगली कांग्रेस में अगले पांच साल के लिए नेतृत्व का चयन होगा। तब तक शी जिनपिंग की भूमिका और उनके उत्तराधिकारी को लेकर अटकलें जारी रहेंगी। हालांकि, चीन जैसे बंद देश में आधिकारिक पुष्टि मिलना मुश्किल है, लेकिन संकेत साफ हैं कि बीजिंग की सत्ता के गलियारों में बड़ा बदलाव पक रहा है।







