भारतीय क्रिकेट टीम के हौसले को देखकर लगता है कि उसमें जीत का जबरदस्त जज्बा है। टीम इंडिया के ऑस्ट्रेलिया से दूसरा टेस्ट हारने पर क्रिकेट समीक्षकों को लगने लगा था कि मौजूदा कमजोर ऑस्ट्रेलिया टीम से भी पार पाना आसान नहीं है। लेकिन मेलबर्न क्रि केट मैदान पर 37 सालों बाद जीत पाकर भारत ने सीरीज में 2-1 की बढ़त बनाकर यह तय कर दिया है कि गावस्कर बोर्डर ट्रॉफी, उसके पास ही रहेगी।

अब भारत चौथे टेस्ट में हार भी जाता है तो भी सीरीज बराबर रहने पर ट्रॉफी भारत के पास ही रहेगी क्योंकि 2017 में खेली गई पिछली सीरीज को भारत ने ही जीता था। पर विराट की अगुआई वाली इस टीम के जज्बे को देखकर लगता है कि वह हर हाल में जीत के लिए खेलकर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उसके घर में सीरीज जीतने वाली पहली भारतीय टीम बनेगी। विराट ने टीम इंडिया को एक इकाई के तौर पर विकसित कर दिया है। इस जीत के बाद भी टीम को अच्छी ओपनिंग जोड़ी की अभी भी दरकार है। मयंक ने इस स्थान पर जगह पक्की की है पर उनके जोड़ीदार की तलाश जारी रहने वाली है।
इस तरह से सीरीज जीत से साल की शुरुआत होने पर टीम का मनोबल ऊंचा होना स्वाभाविक है और इसका इस साल ही होने वाले विश्व कप में फायदा मिल सकता है। यह भारत की टेस्ट क्रि केट में 150वीं जीत थी। इस तरह भारत टेस्ट क्रि केट में 150 या इससे अधिक टेस्ट जीतने वाला दुनिया का पांचवां देश बन गया है। इससे पहले यह गौरव ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका और वेस्ट इंडीज ने हासिल किया है। भारत की इस सफलता में पुजारा की बल्लेबाजी का योगदान है ही। पर भारतीय पेस अटैक ने भी जीत में अहम भूमिका निभाई है।

इस मैच में नौ विकेट लेकर . .मैन ऑफ द मैच. . बने जसप्रीत बुमराह की जितनी भी तारीफ की जाए, वह कम है। कोहली की नेतृत्व क्षमता के लिए भी यह सीरीज कारगर रही है। वह इस जीत के साथ सौरव गांगुली के रिकॉर्ड के बराबर आ गए हैं। सौरव ने अब तक भारत के लिए सर्वाधिक 11 टेस्ट जीते थे। अब विराट कोहली इस सीरीज का तीन जनवरी से शुरू होने वाले आखिरी टेस्ट को जीत लेते हैं तो वह इस रिकॉर्ड को अपने नाम करने में कामयाब हो जाएंगे। टीम इंडिया यदि यह सीरीज जीतती है तो दक्षिण अफ्रीका और फिर इंग्लैंड से टेस्ट सीरीज हारने की निराशा से उबर जाएगी।







