गुगली: किरण नांदगाँवकर
आखिर वहीं हुआ जिसका ड़र था! ऑस्ट्रेलिया में भारतीय क्रिकेट टीम ने दौरे की शुरुआत पहला ही T20 हार कर की। सारे कागजी गणित गलत साबित हुए और जो ऑस्ट्रेलिया टीम पिछले कुछ समय से अपने सितारा खिलाड़ियों के निलंबन के कारण कमजोर मानी जा रही थी और अन्य टीमों से लगातार हार कर निराश थी, उसें भारतीय खिलाड़ियों ने एक नया जीवन दान दे दिया। आज जिस तरह ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाजों ने कोहली के टॉस जीतने के बाद मिली बैटिंग पर बल्लेबाजी की वह देखने लायक थी।
ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय गेंदबाजों को दरअसल अपने उपर हावी होने ही नहीं दिया। ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाजों ने दस से ज्यादा गगनचुंबी छक्के भारतीय गेंदबाजों को लगाए! बारिश के कारण यदि मैच बाधित नहीं होता तो भी लक्ष्य 200 रनों का या उसके आसपास ही मिलता।
भुवनेश्वर कुमार हमारें प्रमुख स्ट्राईकर गेंदबाज है, लेकिन वे अब भी अपनी सहीं लाईन नहीं पकड पाए है। हांलाकि उन्होंने अपने स्पेल में रन ज्यादा नहीं दिए, लेकिन उनकी जो गेंद भी लाईन से भटकती है उस पर चार रन ही बनते है, जो खटकते है। खलील से मुझे उम्मीद थी की उन्होंने वेस्टइंडीज की श्रृंखला खत्म होते-होते लाईन-लेंथ पकड ली थी, उसे वे यहां बरकरार रखेंगे। लेकिन जब उनके एक ही ओवर में तीन छक्के पड़ गयें तो निराशा हाथ लगी! वे अपनी लाईन, लेंथ के लियें पुनः संघर्ष करते दिख रहे है। जो भारतीय टीम के लियें ठीक बात नहीं है। खलील ने जब कैच छोडा तो यह साफ नज़र आया की हमारी टीम वाकई स्टेडियम में बैठे हज़ारों अनजान लोगों के बिच क्रिकेट खेल रहीं है। यहीं बात विराट कोहली ने फिंच का जो कैच छोड़ा उस पर भी लागू होती है।
कृणाल पांड्या ने सबसे ज्यादा निराश किया, उनकी गेंदबाजी भी बेहद औसत दर्जे की थी और जब बैटिंग में चार गेंदे उन्होंने खेली तो लगा उनमें शायद वह माद्दा ही नहीं है जो एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर में होता है। उनका यह प्रदर्शन उन्हें टीम से बाहर का रास्ता दिखा देंगा।

ऋषभ पंत ने जब मात्र 20 रन जितने के लिए चाहिए थे, उस वक्त जो बचकाना शॉट खेला उससे साबित हो गया की वे अभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपरिपक्व है और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को भी आईपीएल के स्तर से ही खेलते है। वैसे रवि शास्त्री को कोच के रुप में खिलाड़ियों की इस तरह की कमियों पर समझाने के लियें ना उनके पास समय है और ना ही शायद उनकों इससे कुछ लेना-देना है।
बता दें कि शास्त्री को शायद पता नहीं की भारतीय टीम के कोच जब दक्षिण अफ्रीका के गैरी कर्स्टन थे तो वे मैदान पर खिलाड़ियों के बिच खूब पसीना बहाते थे। इतना की खिलाड़ियों से ज्यादा और उनके कोच रहते महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में जब भारतीय टीम ने दोबारा एकदिवसीय विश्व कप जीता तो गैरी कर्स्टन को भारतीय क्रिकेटरों ने ग्राउंड में हवा में उछाल-उछाल कर अभिनंदन किया था।
क्रिकेट के भगवान सचिन ने गैरी कर्स्टन के तारिफ़ के उस वक्त कसीदे कढ़ दियें थे! तात्पर्य यहीं की कोचिंग ऐसी की जाती है! खैर ऋषभ पंत का वह बचकाना शॉट हमारे लिए आत्मघाती कदम सिद्ध हुआ है और भारत मात्र 4 रन से यह मैच हारा है। इसी तरह विराट कोहली का अपने स्थान से खिसककर चौथे क्रम पर आना भी चौंकाने वाला था, वो भी ऐसे समय जब उनका बल्ला खूब बोल रहा हों।
खैर दौरें की शुरुआत ही हार से हुई है और यहीं साबित हुआ है की भारतीय टीम के खिलाड़ी तो ये वहीं है जो अभी घर में ही शेर बने हुए थे, लेकिन वे अब पराई जगह आ गयें है इसकी झलक आज नज़र आ गयी।
आगामी ऑष्ट्रेलिया के लम्बे दौरें पर यदि भारतीय टीम विदेशी दौरे के मानसिक संत्रास से उबर गयी और कुछ तकनीकी खामियों पर काबू पा लिया तो ठीक,नहीं तो परिणाम वहीं होंगे जो आज आग़ाज से हुआ है।
और अंत में मैं शास्री की कोचिंग के बारें में और कुछ ना कहूँ तो ज्यादा बेहतर है।







