नीतू सिंह
सूरज की कहानी मेहनत, लगन और अटूट पारिवारिक समर्थन की जीवंत मिसाल है। झारखंड के गिरिडीह जिले के कपिलो गांव से शुरू हुआ उनका सफर आर्थिक तंगी और चुनौतियों से भरा था, लेकिन उनकी पत्नी पूनम कुमारी के विश्वास और बलिदान ने उन्हें डिप्टी कलेक्टर बनने का रास्ता दिखाया। यह कहानी न केवल सूरज की जीत है, बल्कि पूनम जैसी सावित्री जैसी पत्नी की भी जीत है, जो आज की नारियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक है।
गरीबी से जंग: डिलीवरी बॉय से डिप्टी कलेक्टर तक का सफर
सूरज का बचपन गरीबी की छाया में बीता। उनके पिता राजमिस्त्री का काम करते थे, और परिवार की माली हालत इतनी नाजुक थी कि कई बार भोजन का इंतजाम भी मुश्किल होता था। फिर भी, सूरज ने हिम्मत नहीं हारी। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने कॉल सेंटर में नौकरी शुरू की, लेकिन उनका सपना था JPSC की परीक्षा पास करके सरकारी अधिकारी बनना। इस लक्ष्य ने उन्हें कठिन परिश्रम की राह पर डाला।
पूनम का अटूट समर्थन: एक सच्ची साथी
2017 में सूरज की शादी पूनम कुमारी से हुई। उस समय परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। सूरज ने पूनम से सलाह मांगी कि क्या वे कमाई करें या JPSC की तैयारी करें। पूनम ने दृढ़ता से कहा, “पढ़ाई पर ध्यान दो, खर्च की चिंता मैं संभाल लूंगी।” 2020 तक पूनम के मायके से मिलने वाली आर्थिक मदद ने सूरज को पढ़ाई के लिए समय दिया। बेटे के जन्म के बाद जिम्मेदारियां बढ़ीं, लेकिन पूनम का विश्वास अडिग रहा।
विपरीत परिस्थितियों में संकल्प: मेहनत की नई शुरुआत
2022 में सूरज ने JPSC की परीक्षा दी, लेकिन अंतिम चरण में मामूली अंतर से सफलता हाथ नहीं लगी। उसी समय पूनम की बहन की शादी के कारण ससुराल की आर्थिक सहायता रुक गई। सूरज फिर दोराहे पर थे। कमाई करें या पढ़ाई? पूनम ने फिर हौसला बढ़ाया, “तुम पढ़ाई जारी रखो।” सूरज ने डिलीवरी बॉय के रूप में स्विगी और रैपिडो में काम शुरू किया। दिन में डिलीवरी, रात में पढ़ाई, इस तरह उन्होंने समय और मेहनत का अनुशासित तालमेल बनाया।
सपनों का साकार होना: डिप्टी कलेक्टर का मुकाम
सूरज की लगन और पूनम का साथ 2023 में रंग लाया, जब उन्होंने JPSC की परीक्षा में 110वीं रैंक हासिल की। इंटरव्यू में सूरज ने अपनी डिलीवरी बॉय की यात्रा को आत्मविश्वास के साथ साझा किया और जटिल सवालों के जवाबों से बोर्ड को प्रभावित किया। आज सूरज यादव डिप्टी कलेक्टर बनने की राह पर हैं। एक ऐसी उपलब्धि जो उनके अथक परिश्रम और परिवार के विश्वास का प्रतीक है।
परिवार और दोस्तों का सहारासूरज की बहन वैजयंती ने घर की जिम्मेदारियां संभालकर उन्हें पढ़ाई का समय दिया। दोस्तों ने भी साथ निभाया और एक पुरानी बाइक खरीदने में मदद की, जिससे डिलीवरी का काम आसान हुआ। इस सामूहिक समर्थन ने सूरज को अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने की ताकत दी।
पूनम: आधुनिक सावित्री की मिसाल
जब समाज में कुछ दुखद घटनाएं, जैसे शाहजहांपुर में एक पत्नी द्वारा पति की हत्या की खबर, समाज में सुर्खियां बनती हैं, तब पूनम के जैसी महिलाएं नारी शक्ति का उज्ज्वल भविष्य चेहरा पेश करती हैं। पूनम ने हर मुश्किल घडी में सूरज का हौसला बढ़ाया और उनके सपनों को अपने त्याग से साकार किया। पूनम की यह कहानी हर उस महिला के लिए प्रेरणा है जो अपने परिवार के लिए समर्पित है।
सच्ची मेहनत से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं
सूरज और पूनम की कहानी सिखाती है कि मजबूत इरादे, सच्ची मेहनत और परिवार का साथ हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं। यह कहानी युवाओं को अपने सपनों के लिए संघर्ष करने और हर परिस्थिति में हिम्मत बनाए रखने की प्रेरणा देती है। सूरज यादव का यह सफर हर उस व्यक्ति के लिए मिसाल है जो अपने हालात को बदलकर नई ऊंचाइयां छूना चाहता है।







