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    Home»सिटी पर्सनालिटी

    जनाधार मेरी ताकतः स्वामी प्रसाद मौर्य

    By November 11, 2017Updated:February 13, 2018 सिटी पर्सनालिटी No Comments6 Mins Read
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    श्याम कुमार 

    स्वामी प्रसाद मौर्य का नाम आते ही आम जनजीवन से बहुत निकट रूप से जुड़े हुए अत्यन्त विनम्र एवं मददगार स्वभाव वाले नेता की तसवीर सामने आ जाती है। उनके सफल राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा राज यही है। उनकी आवाज जितनी बुलंद है, ह्दय उतना ही मुलायम है। जब उन्होंने बहुजन समाज पार्टी से नाता तोड़ा था तो लोग आश्चर्यचकित हो गए थे और उन्हें यह खबर झूठी लगी थी। लेकिन स्वामी प्रसाद मौर्य ने वह जबरदस्त धमाका पत्रकारवार्ता में किया था, इसलिए अगर-मगर कि गुंजाइश नहीं थी। उस समय लोगों ने आशंका व्यक्त की थी कि अब स्वामी प्रसाद मौर्य का राजनीतिक जीवन समाप्त हो जाएगा तथा वह गुमनामी में खो जाएंगे। मायावती ने भी बड़े दम्भपूर्वक कहा था कि जो उनसे अलग होता है, उसका कैरियर खत्म हो जाता है। लेकिन स्वामी प्रसाद मौर्य ने लखनऊ में विशाल रैली आयोजित कर सारी आशंकाओं को निर्मूल कर डाला था। उन्होंने सिद्ध कर दिया था कि वह विशेष फौलादी सांचे में ढले हुए व्यक्ति हैं।

    साक्षात्कार में स्वयं स्वामी प्रसाद मौर्य ने मुझसे कहा- ‘मेरी उस रैली में जो लाखों की भीड़ जुटी, वह न तो भाड़े की थी और न मायावती के प्रभाव वाली थी। वह विशाल जनसमूह शुद्ध रूप से मुझे चाहने वाला था एवं पूरी तरह मुझसे जुड़ा हुआ था। उसे मायावती की कोई तिकड़म मेरी रैली में आने से नहीं रोक सकी थी।’ इसका कारण स्वामी प्रसाद मौर्य ने यह बताया कि वह शुरू से आम जनता के साथ गहराई से जुड़े रहे हैं तथा उसके सुख-दुख को अपना समझते रहे हैं।

    स्वामी प्रसाद मौर्य के उक्त दावे की सच्चाई इसी से सिद्ध होती है कि वह हमेशा फरियादियों की भीड़ से घिरे रहते हैं, यहां तक कि सचिवालय में भी उनका कक्ष लोगों से भरा रहता है। यही कारण है कि उन्होंने मुझे साक्षात्कार के लिए सबेरे नौ बजे अपने आवास पर समय दिया। अगले दिन जब मैं एक अन्य वरिष्ठ पत्रकार कैलाश वर्मा के साथ स्वामी प्रसाद मौर्य के आवास पर पहुंचा तो वहां बाहरी हिस्से में लॉन के पास मेज व कई कुरसियां लगी हुई थीं। जब मेरा परिचयकार्ड भीतर भेजा गया तो स्वामी प्रसाद मौर्य तुरंत बाहर आ गए और बातों का सिलसिला शुरू हो गया। मैंने कुरेदा कि इतने दिन मायावती के साथ उनका जो समय बीता, क्या अब उन्हें पछतावा हो रहा है कि वह समय उनका व्यर्थ नष्ट हुआ? स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा- ‘हम तो कांशीराम से जुड़े थे तथा उस समय मायावती का वहां कोई अस्तित्व या महत्व नहीं था। कांशीराम से जो लोग जुड़े हुए थे, वे उनसे प्रभावित थे तथा अच्छे उद्देश्यों के प्रति समर्पित थे। जबकि मायावती की प्रकृति इसके बिलकुल विपरीत है । उनमें शुरू से स्वार्थ एवं धनलोलुपता भरी हुई थी तथा अपनी रणनीति का फायदा उठाते हुए मायावती ने पार्टी पर कब्जा जमा लिया।’

    स्वामी प्रसाद मौर्य की एक बड़ी विशेषता यह मानी जाती है कि उनमें व्यक्ति को पहचानने की गजब की क्षमता है। वह आने वाले व्यक्ति की नीयत को भांप लेते है और समझ जाते हैं कि उस व्यक्ति की बात कितनी सही या गलत है। सही व्यक्ति की मदद के लिए वह हमेशा तत्पर रहते हैं, जिसके कारण लोकप्रियता उनके पीछे-पीछे चलती है। माना जाता है कि अपने इसी पारखी गुण के कारण उन्होंने नरेन्द्र मोदी की सच्चाई को समझ लिया और अपना भविष्य उनसे जोड़ लिया।

    भाजपा से जुड़ाव कैसे हुआ, इस प्रश्न का विस्तार में उत्तर देते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि हकीकत में वह नरेन्द्र मोदी से बहुत प्रभावित हुए। उन्हें महसूस हुआ कि चुम्बकीय व्यक्तित्व वाले नरेन्द्र मोदी में महान नेेता के सभी गुण हैं। स्पष्ट दिखाई दे रहा था कि पहली बार देश को नरेन्द्र मोदी के रूप में ऐसा नेता मिला है, जिसके नेतृत्व में देश न केवल राष्ट्रीय स्तर पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ऊंची छलांग लगा रहा है। नरेन्द्र मोदी ने गरीबी को बहुत गहराई से भोगा है, इसलिए वह आम जनता के दुख-दर्द व आवश्यकताओं को भलीभांति समझते है तथा उसके कल्याण के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। मौर्य ने कहा कि देश के विकास की मोदी की यही रफतार चलती रही तो भारत को ‘सोनेे की चिड़िया’ कहा जाने वाला कथन पुनः साकार हो जाएगा।

    कांग्रेस के भविष्य के बारे में पूछने पर स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि कांग्रेस जनाधारविहीन तो हो ही चुकी थी, पूरी तरह नेतृत्वविहीन भी है। उसका एकसूत्री कार्यक्रम नरेन्द्र मोदी को अपशब्द कहते रहना है। राहुल गांधी मोदी की बेसिरपैर की आलोचना करना अपनी राजनीतिक प्रवीणता मान रहे हैं तथा इसी खुशफहमी में हैं। इसी संदर्भ में मौर्य ने इस आम धारणा से सहमति व्यक्त की कि सोनिया गांधी ने राहुल गांधी को नेता बनाने के अथक प्रयास किए, लेकिन इतना ठोंक-पीटकर कोशिशें करने के बावजूद उन्हें परिपक्व नेता नहीं बना सकीं। देश की जनता राहुल गांधी को तनिक भी गम्भीरता से नहीं लेती है और उनकी बातों का उपहास उड़ाती है। इसी उपहास में वह देशभर में ‘पप्पू’ नाम से मशहूर हो गए हैं। वह अपने को जितना स्टाइलिश बनाने की कोशिश करते हैं, उतने ही हास्यास्पद प्रतीत होते हैं। विषय-परिवर्तन करते हुए मैंने स्वामी प्रसाद मौर्य से कहा कि जातिवाद हमारे समाज का घोर विनाश कर रहा है, इसलिए वह ‘जाति तोड़ो अभियान’ क्यों नहीं चलाते तो उन्होंने उत्तर दिया कि जातिवाद हमारे यहां इतनी गहराई से प्रविष्ट है कि उसका मुकाबला ‘लोहे को लोहा काटता है’ द्वारा ही किया जा सकता है।

    स्वामी प्रसाद मौर्य की बातों से साफ महसूस हो रहा था कि बहुजन समाज पार्टी में मायावती के नेतृत्व में जो घुटनभरा वातावरण मौजूद रहता है, उसमें उन्हें अपनी कार्य-क्षमता का रचनात्मक उपयोग करने का अवसर नहीं मिलता था। किन्तु भारतीय जनता पार्टी में चूंकि भिन्न वातावरण है, इसलिए अब वह अपनी कार्य-क्षमता का पूरा उपयोग कर रहे हैं तथा पार्टी ने उन्हें मंत्री बनाकर श्रम व सेवायोजन-जैसा महत्वपूर्ण विभाग सौंपा है, जिसके माध्यम से वह वंचित व कमजोर वर्ग का अधिक से अधिक कल्याण करने में लगे हुए हैं। उनका मत है कि पिछली सरकार ने प्रदेश को तबाह करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी, जिसका परिमार्जन करने में वर्तमान सरकार जीजान से लगी हुई है। मोदी व योगी ने केन्द्र एवं प्रदेश की सरकारों की कार्य-संस्कृति बदल दी है, इसीलिए थोड़े समय में दोनों सरकारों की उपलब्धियों का भारी कीर्तिमान स्थापित हो गया है।

    (श्याम कुमार)
    9415002458

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