भारत सिंह
भारत में गर्मियां अब पहले से कहीं अधिक विकराल रूप ले रही हैं। दिन की झुलसाती गर्मी के साथ रातें भी राहत देने में नाकाम हो रही हैं। कई शहरों और कस्बों में गर्म हवाएं पूरे दिन-रात बनी रहती हैं और तापमान रात में भी ऊंचा बना रहता है। इस लगातार गर्मी ने एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया है।
मानव शरीर दिन की गर्मी से थकान के बाद रात में खुद को ठंडा करके रिकवर करता है। लेकिन जब रातें भी गर्म रहती हैं तो शरीर को आराम मिलने के बजाय अतिरिक्त तनाव झेलना पड़ता है। इससे हृदय, फेफड़े, किडनी और मस्तिष्क पर दबाव बढ़ता है। निर्जलीकरण, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, रक्तचाप में उतार-चढ़ाव और हृदय गति बढ़ना आम हो गया है।
डॉक्टरों के अनुसार इन दिनों अस्पतालों में गर्मी से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। आम लक्षणों में अत्यधिक पसीना, थकान, चक्कर आना, सिरदर्द, मांसपेशियों में ऐंठन, मतली, उल्टी, मुंह सूखना, सांस लेने में तकलीफ, तेज धड़कन, पेशाब कम होना और नींद में बाधा शामिल हैं। गंभीर मामलों में हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक (शरीर का तापमान 104°F से ऊपर) की स्थिति बन रही है, जो दौरे, बेहोशी और अंगों की विफलता तक ले जा सकती है।
यह संकट खासतौर पर बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बाहर काम करने वाले मजदूरों और पहले से हृदय रोग, मधुमेह, अस्थमा या सीओपीडी से पीड़ित लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। गर्म रातों से नींद टूटने के कारण उच्च रक्तचाप, तनाव हार्मोन में वृद्धि, मानसिक थकान, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता की कमी और रोग प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट देखी जा रही है।
गर्मी और प्रदूषण का संयुक्त प्रभाव श्वसन संबंधी समस्याओं को भी बढ़ा रहा है। उच्च तापमान भूमि के पास ओजोन स्तर बढ़ाता है, जिससे अस्थमा के दौरे और सांस की तकलीफ के मामले बढ़ गए हैं। शुष्क हवा, धूल और प्रदूषण फेफड़ों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं।
जोखिम और सावधानियां
- दिन में 12 बजे से 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें।
- भरपूर पानी, नींबू पानी, छाछ और ORS घोल पीते रहें।
- हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनें।
- बुजुर्गों और बच्चों पर खास नजर रखें।
- घरों को ठंडा रखने के लिए पर्दे बंद रखें, पंखे/कूलर का इस्तेमाल करें।
- रात में भी पर्याप्त पानी पीकर सोएं।
जलवायु परिवर्तन और शहरी हीट आइलैंड प्रभाव के कारण यह समस्या साल-दर-साल बदतर होती जा रही है। अब गर्मी केवल मौसमी परेशानी नहीं, बल्कि एक स्थायी स्वास्थ्य और पर्यावरणीय चुनौती बन चुकी है।
लोगों को अपनी दिनचर्या में बदलाव लाना होगा और सरकारों को भी शहरी नियोजन, हरित कवर, कूलिंग सेंटर्स और जनजागरूकता अभियानों को मजबूत करना चाहिए। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें। याद रखें कि गर्मी से बचाव ही सबसे अच्छा इलाज है।
बता दें कि समय रहते सावधानी बरतें, ताकि इस बढ़ते संकट को नियंत्रित किया जा सके।






