- लीवर को बल प्रदान करने के साथ ही श्वेत रक्त कणिकाओं को करता है पुष्ट
- प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाने में है सहायक
इस कोरोना महामारी के दौर में हर व्यक्ति अपने इम्यूनिटी क्षमता पर ध्यान दे रहा है। इसके साथ ही ऐसा खान-पान करने पर जोर दे रहा है, जिससे कोरोना से लड़ने में मदद मिल सके। इन्हीं नामों में से एक है गिलोय। गिलोय को आयुर्वेद में अमृता नाम से भी जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम टीनोस्पोरा कोर्डीफोलिया है। इस संबंध में आयुर्वेदाचार्य डाक्टर एसके राय का कहना है कि गिलोय का प्रयोग करने से प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ने के साथ ही श्वेत रक्त कणिकाओं को पुष्ट बनाता है। यह कफ, वात गठिया रोग, शुगर आदि तमाम रोगों से लड़ने में बल प्रदान करता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि करता है। ऐसे में कोरोना जैसी महामारी से लड़ने के लिए हमारे शरीर को सक्षम बनाएगा।

आयुर्वेदाचार्य डाक्टर एसके राय ने बताया कि गिलोय को आयुर्वेद में गर्म तासीर माना जाता है। यह तैलीय होने के साथ ही स्वाद में भी कड़वा होता है। गिलोय ज्वर नाशक है। यह कहावत है कि जिसका लीवर ठीक होता है, उसकी जिन्दगी लंबी और रोग मुक्त होता है। ऐसे शरीर की फैक्ट्री लीवर को गिलोय बल प्रदान करता है। उस यदि काफी समय से बुखार आ रहा हो और दूसरी दवाओं से ठीक न हो रहा हो तो ऐसे में गिलोय रामबाण की तरह काम करती है। उन्होंने बताया कि यह शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाता है, जिससे डेंगू व स्वाइन फ्लू के निदान में भी बहुत कारगर है।
उन्होंने बताया कि गिलोय के गुणों की संख्या काफी लंबी है। इसके इस्तेमाल से सांस संबंधी रोग जैसे दमा, खांसी में काफी फायदा होता है। इसे नीम व आंवला के साथ इस्तेमाल करने से त्वचा संबंधी रोग एग्जिमा और सोराइसिस दूर किए जा सकते हैं। गठिया रोग में भी काफी फायदेमंद है।
इस संबंध में बीएचयू के पंचकर्म विभाग के विभागाध्यक्ष डाक्टर जेपी सिंह ने बताया कि गिलोय रसायन यानी ताजगी लाने वाले तत्व के रूप में कार्य करता है। इससे इम्यूनिटी सिस्टम में सुधार आता है। उन्होंने हिन्दुस्थान समाचार से विशेष वार्ता में बताया कि यह शरीर में अति आवश्यक व्हाइट सेल्स (सफेद रक्त कणिकाओं) की कार्य करने की क्षमता को बढ़ाता है। यह शरीर के भीतर सफाई करके लीवर और किडनी के कार्य को सुचारू बनाता है। पाचनतंत्र को सुधारने में भी काफी मददगार है।







