लो कर लो बात, प्रदेश की जनता का बिजली कंपनियों पर निकल आया 11851 करोड़, बिजली दर बढ़ाना हुआ अब मुश्किल!!

0
449
  • नियामक आयोग का अब तक सबसे बड़ा ऐतिहासिक प्रपत्र आया सामने, उदय स्कीम का अनुबन्ध करने के बाद बिजली कम्पनियों ने वर्ष 2016-17 तक उपभोक्ताओं का अतिरिक्त लगभग 11,851 करोड़ का लाभ नहीं दिया जिस पर 15 दिन में आयोग ने सभी पक्षों से मांगा सुझाव व आपत्ति
  • आयोग ने उपभोक्ताओं व सभी पक्षों को दिये दो विकल्प या तो उपभोक्ताओं को 2.5 से 5 प्रतिशत समय से बिजली बिल जमा करने पर दी जाये छूट या तो दरों में न की जाये बढ़ोत्तरी

लखनऊ,19 जून 2019: जहां प्रदेश की बिजली कम्पनियां वर्ष 2019-20 में सब्सिडी के बाद लगभग 9 हजार करोड़ का गैप दिखाकर प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों में व्यापक बढ़ोत्तरी कराने की जुगत में लगी थी वहीं उप्र प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के एक निर्णय ने बिजली कम्पनियों में भूचाल ला दिया है।

उपभोक्ता परिषद के अनुसार यह मामला तब का है जब वर्ष 2016 में बिजली कम्पनियों का कुल घाटा 70,738 करोड़ था और उप्र की बिजली कम्पनियों ने उदय स्कीम के साथ अनुबन्ध किया जिसमें घाटे का 53,211 करोड़ बैंकों लोन था जिसका 75 प्रतिशत रू0 39,908 राज्य सरकार ने वहन कर लिया जिसके आधार पर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने विद्युत नियामक आयोग में याचिका दाखिल कर पूराने घाटे के एवज में लग रहे रेगूलेटरी सरचार्ज 4.28 प्रतिशत को समाप्त करने व उदय की लाभ को प्रदेश की जनता को देने की मांग उठायी और इसी बीच कैरिंग कास्ट वसूलने के मामले पर एप्टेल का एक निर्णय भी आ गया जिसको उपभोक्ता परिषद ने आधार बनाकर आयोग को सौंपा अन्ततः वर्ष 2016 के बाद विद्युत नियामक आयोग ने उपभोक्ता परिषद की याचिका पर पावर कार्पोरेशन से अनेकों बार रिर्पोट तलब किया और अनेकों बार सुनवाई में जवाब मांग मामला चलता रहा।

इसी बीच नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री आरपी सिंह ने पूरे मामले की गम्भीरता को देखते हुये आयोग की देख-रेख में आयोग के विशेषज्ञों से पूरे मामले पर एक प्रपत्र तैयार करवाया जिसमें चौकाने वाला मामला सामने आया जिसमें आयोग ने यह पाया कि उदय स्कीम आने के बाद उपभोक्ताओं को जो लाभ मिलना था नहीं दिया जिसके चलते वर्ष 2000 से लेकर वर्ष 2016-17 तक जहां तक आटिड आकड़े उपलब्ध है और ट्रू-अप हो चुका है उसके आधार पर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर रू0 11,851 करोड़ अतिरिक्त फायदा निकल रहा है। जो अब तक ऊर्जा क्षेत्र का सबसे बड़ा मामला है जहां आने वाले समय में अब रेगूलेटरी सरचार्ज को समाप्त होना तय है। वहीं बिजली कम्पनियों को अब उपभोक्ताओं को बिजली दरों में बढ़ात्तरी कराना मुश्किल है।

उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अधक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि विद्युत नियामक आयोग द्वारा वह प्रपत्र जिसमें रेगूलेटरी असेट के मद में उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर रू0 11,851 करोड़ निकल रहा है उसे आयोग ने अपनी वेबसाइट पर डाल दिया है और प्रदेश के उपभोक्ताओं व सभी पक्षों से 15 दिन में सुझाव व आपत्ति मांगी है जिसमें आयोग द्वारा विद्युत उपभोक्ताओं के लिये दो विकल्प दियें गये या तो इसकी भरपाई करने के लिये उद्योगों को 2.5 प्रतिशत समय से बिल जमा करने पर छूट दी जाये और घरेलू सहित अन्य उपभोक्ताओं को समय से बिल जमा करने पर 5 प्रतिशत की छूट दी जाये आगे रेगूलेटरी सरचार्ज समाप्त किया जाये और दूसरा विकल्प यह दिया है आने वाले समय में उदय स्कीम के तहत जो लाभ उपभोक्ताओं को मिलना है उसके ऐवज में कोई भी बढ़ोत्तरी न की जाय।

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा अब जब उपभोक्ताओं को लाभ दिये जाने के मद में उदय स्कीम के तहत 11,851 करोड़ उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर अतिरिक्त निकल रहा है और वर्तमान में बिजली कम्पनियों का सब्सिडी के बाद 9000 करोड़ का गैप वर्तमान एआरआर में निकला है तो जो उपभोक्ताओं का बचा लगभग 3851 करोड़ बच रहा है उसके ऐवज में उपभोक्ताओं के बिजली दरों में व्यापक कमी की जाये और इस बात की जांच होनी चाहिये उदय स्कीम आने के बाद राजस्थान, तेलांगाना, बिहार व तमिलनाडु ने उपभोक्ताओं को लाभ दिया उसी क्रम में उप्र की बिजली कम्पनियों ने उदय का अनुबन्ध करने के बाद उपभोक्ताओं को फायदा देने में हीलाहवाली करती रही।

Please follow and like us:
Pin Share

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here