बरी होने के बाद भी तलवार दंपत्ति को दो दिन और गुजारने पड़ेंगे जेल में

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शुक्रवार शाम तक इलाहाबाद हाईकोर्ट से आदेश की सत्यापित कॉपी गाजियाबाद में सीबीआई की विशेष अदालत तक नहीं पहुंच पाई। कोर्ट सिर्फ़ 5 बजे तक ही बैठती है और आज शनिवार और कल रविवार की छुट्टी है। ऐसे में रिहाई का मामला दो दिन की छुट्टी होने के चलते अटक गया है। अब सोमवार को ही रिहाई की संभावना है

नई दिल्ली 14 अक्टूबर। देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री आरुषि हत्याकांड में इलाहाबाद हाइकोर्ट ने राजेश और नूपुर तलवार को दो दिन पहले ही बरी कर दिया है लेकिन अभी तक दोनों जेल से रिहा नहीं हो पाए हैं। अभी दो दिन और तलवार दंपत्ति को जेल में ही गुजारने पड़ेंगे। अब सोमवार को ही रिहाई की संभावना है।

दरअसल, शुक्रवार शाम तक इलाहाबाद हाईकोर्ट से आदेश की सत्यापित कॉपी गाजियाबाद में सीबीआई की विशेष अदालत तक नहीं पहुंच पाई। कोर्ट सिर्फ़ 5 बजे तक ही बैठती है और आज शनिवार और कल रविवार की छुट्टी है। ऐसे में रिहाई का मामला दो दिन की छुट्टी होने के चलते अटक गया है। अब सोमवार को ही रिहाई की संभावना है। ये दोनों गाजियाबाद की डासना जेल में बंद हैं। हाईकोर्ट ने इन्हें जल्द से जल्द रिहा करने के आदेश दिए हैं।

रिहाई के बाद पिता के घर पर रहेंगे तलवार दंपत्ति

बता दें, रिहा होने के बाद ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि तलवार दंपति शायद नुपुर तलवार के पिता के घर रहने जाएं, जो यहां से कुछ ही दूरी पर रहते हैं। क्योंकि जिस घर में तलवार दंपत्ति रहते थे उस घर में फिलहाल किराएदार रह रहे हैं।

सबूतों के अभाव के कारण कोर्ट ने तलवार दंपति को किया बरी

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आरुषि हत्याकांड मामले में कल यानि गुरुवार को फैसला सुनाते हुए कहा, ‘‘इस बात की प्रबल संभावना है कि किसी बाहरी व्यक्ति ने घटना को अंजाम दिया।’’ पीठ ने खचाखच भरे अदालत कक्ष में अपना फैसला सुनाते हुए कहा, ‘‘तथ्यों और रिकॉर्ड में दर्ज साक्ष्यों को देखकर हम पाते हैं कि न तो परिस्थितियां और न ही साक्ष्य सुसंगत हैं और परिस्थितियां घटना में अपीलकर्ताओं की संलिप्तता को दर्शाने के लिये कड़ियों को पूरा नहीं कर रही हैं।’’

‘‘ऐसी परिस्थिति में जब दो तरह की राय संभव है तो अपीलकर्ताओं को दोषी ठहराने वाला नजरिया अपनाना सही नहीं हो सकता है। कड़ियों को पूरा करने के लिये परिस्थितिजन्य साक्ष्य के अभाव में यह संदेह का लाभ अपीलकर्ताओं को देने का उपयुक्त मामला है।’’

CBI कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा

16 मई 2008 की रात को नोएडा के जलवायु विहार में आरुषि की उसके ही घर में हत्या कर दी गई थी। एक दिन बाद उसके नौकर हेमराज का शव उसी घर की छत से मिला। 5 दिन बाद पुलिस ने ये दावा करते हुए आरुषि के माता-पिता को गिरफ्तार कर लिया कि राजेश ने आरुषि और हेमराज को आपत्तिजनक हालत में देखने के बाद दोनों की हत्या कर दी।

इस मामले की जांच एक जून को सीबीआई को सौंप दी गई थी। सीबीआई की जांच के आधार पर गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट ने 26 नवंबर, 2013 को हत्या और सबूत मिटाने का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद से तलवार दंपति जेल में बंद हैं।

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