नई दिल्ली 22 अगस्त। सुप्रीम कोर्ट ने आज ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीन तलाक को खत्म दिया है। कोर्ट के इस फैसले के साथ ही आज मंगलवार से तीन तलाक गैरकानूनी करार दे दिया है और अब इसे तीन बार तलाक कहने से भी निकाह खत्म नहीं होगा। पांच जजों की संविधान पीठ में जस्टिस कुरियन जोसेफ, आरएफ नरीमन, जस्टिस यूयू ललित ने 3-2 के बहुमत से तीन तलाक को बराबरी के अधिकार वाले अनुच्छेद 14, 15 के तहत असंवैधानिक घोषित कर दिया।
5 अलग मजहबों के जजों की सुनवाई:
तीन तलाक पर अहम और ऐतिहासिक फैसला देने वाले पांच जजों पांच अलग मजहबों से तालुक रखने वाले लोगो की पीठ इस केस की सुनवाई के लिए गठित की गई थी। इससे पहले 11 से 18 मई तक रोजाना सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर अहम फैसला सुनाया।
6 माह में बनेगा कानून:
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में तीन तलाक पर छह महीने के लिए रोक लगा दी है। कोर्ट ने सरकार से कहा कि वह तीन तलाक पर कानून बनाए। सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई कि केंद्र जो कानून बनाएगा उसमें मुस्लिम संगठनों और शरिया कानून संबंधी चिंताओं का खयाल रखा जाएगा। केंद्र ने राजनीतिक दलों से अपने मतभेदों को दरकिनार रखने और तीन तलाक के संबंध में कानून बनाने में केन्द्र की मदद करने को कहा है।
इन 5 जजों की बेंच ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला:
1. चीफ जस्टिस जेएस खेहर (सिख)
2. जस्टिस कुरियन जोसेफ (ईसाई)
3. जस्टिस आरएफ नरिमन (पारसी)
4. जस्टिस यूयू ललित (हिंदू)
5. जस्टिस अब्दुल नज़ीर (मुस्लिम)
तीन तकाल के खिलाफ प्रथम याचिकाकर्ता
तीन तलाक को खत्म करने के लिए याचिकाएं मुस्लिम महिलाएं शायरा बानो, फराह फैज, आफरीन रहमान, इशरत जहां और गलशन परवीन ने दायर की थीं। मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने इनका विरोध किया था। उसने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट को धर्म के मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। हालांकि बाद में बोर्ड ने कहा था कि वह काजियों को एडवाइजरी जारी करेगा कि वे विवाह करने वालों को सलाह देंगे कि तीन तलाक के जरिये विवाह को समाप्त न करें। केंद्र सरकार ने महिलाओं का पक्ष लिया था और कहा था कि तीन तलाक महिलाओं के खिलाफ अन्याय है और धर्म का मौलिक अंग नहीं है।







