महोबा के ऐतिहासिक मदनसागर सरोवर का कई दशक बाद शुरू हुआ सौन्दर्यीकरण अभियान

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कभी आधे महोबा को पीने का शुद्ध पानी मुहैया कराने वाला मदनसागर सरोवर पिछले तीन दशक में इतना उपेक्षित हुआ कि अब न वहां जाने के लिए कोई सुगम मार्ग बचा और न ही सरोवर के खूबसूरत घाट और पार्क बचे। सरोवर में पानी तो दिखता ही नहीं, सिर्फ जलकुंभी दिखती है। मदन सागर की ये दुर्दशा देखकर तो चंदेल नरेश मदन वर्मन की आत्मा को दुःख पहुँच रहा होगा ।

मालूम हो की चार वर्ग किमी में फैले इस मदनसागर सरोवर का निर्माण 17वें चंदेल नरेश मदन वर्मन ने 1129-1163 के बीच में करवाया था। 34 साल के अथक प्रयासों के बाद बने मदन सागर सरोवर के बीच में पांच द्वीप हैं। इनमें मध्य द्वीप में दक्षिण भारतीय शैली का बेजोड़ शिवालय खखरामठ बना है। इसके नजदीक बोलती शिलाओं वाला मझारी द्वीप है जहां पत्थर के कटे हाथी पड़े हैं। तीसरे द्वीप पर अरबी संत पीर मुबारक शाह की दीवार है लेकिन इन तीनों द्वीपों पर बिना नाव के जाना संभव नहीं हैं। ये बहुत कम लोग जानते हैं कि छोटी चंडिका देवी की प्राण प्रतिष्ठा मदन सागर सरोवर की वजह से ही हुई थी। चंदेल नरेश मदन वर्मन गहरी मकरध्वज नदी पर बांध ही नहीं बनवा पा रहे थे। लाख जतन के बावजूद बार-बार बांध टूट जाता था। तब राज पुरोहितों की सलाह पर मदन वर्मन ने गोरखगिरि के नीचे छोटी चंडिका देवी की प्राण प्रतिष्ठा करवायी एवं बांध बनाने में आ रही अड़चनों को दूर करने की देवी जी से प्रार्थना की।

तब जाकर मदन सागर सरोवर का निर्माण पूरा हो पाया। मकरध्वज नदी में तब मगरमच्छ बहुत थे, इसलिए उसे मगरिया नदी भी कहते थे। मदनसागर के नीचे बसा मगरियापुरा मुहल्ला इस बात का प्रमाण है। सूत्रों से खबर आई है कि केन्द्रीय पर्यटन मंत्रालय ने स्वदेश दर्शन योजना के तहत मदनसागर के लिए 3 करोड़ 87 लाख की जो धनराशि आवंटित की है, उससे खखरामठ व मझारी द्वीप तक पुल बनाने का काम शुरू हो गया है। साथ ही इसी बजट से सरोवर के सभी घाटों व पार्कों का नवनिर्माण भी होना है। बुंदेलखंड के बुंदेले ये सुनकर काफी हर्षित हैं कि हो सकता हैं अब बदहाल मदनसागर सरोवर के भी फिर से अच्छे दिन आ जायें। – वरिष्ठ पत्रकार तारा पाटकर की वॉल से

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