परिषद ने सरकार से उठाई मांग अबिलम्ब हो उच्च स्तरीय जाँच और दोषियों पर कार्यवाही
पूरे प्रदेश में डाउनलोड प्रोब बिलिंग को लेकर काफी हंगामा मचा है बिलिंग एजेंसियो की प्रोब बिलिंग क्यों नहीं सफल उस पर उपभोक्ता परिषद ने इस बात को लेकर बड़ा खुलासा किया है परिषद ने कहा कि जब वर्ष 2018- 19 में बिलिंग एजेंसियो का टेंडर फाइनल हो रहा था उसी समय उपभोक्ता परिषद ने सवाल उठाया था कि जल्दबाजी में टेंडर न फाइनल किया जाय, लेकिन कुछ उच्चाधिकारियों ने अपने निजी स्वार्थ के चलते जल्दबाजी में टेंडर मनमाने तरीके से फाइनल किए।
परिषद ने कहा कि आज उसी का नतीजा है की प्रदेश में 7 बिलिंग एजेंसिया जिन्हें आरएपीडीआरपी क्षेत्र यानि शहरी क्षेत्र में सभी उपभोक्ता की डाउनलोड प्रोब बिलिंग 6 महीने में होनी थी और नॉन आरएपीडीआरपी क्षेत्र यानी ग्रामीण में 12 महीने में सभी उपभोक्ताओ की प्रोब बिलिंग हो जानी चाहिए थी लेकिन आज पूरे प्रदेश में मात्रा 20 से 22 प्रतिशत ही डाउनलोड प्रोब बिलिंग हो पा् रही है जो बहुत ही चिंता का विषय है जिसका खामियाजा उपभोक्ता भुगत रहे हैं। बिजली कम्पनियों के उच्चाधिकारी केवल टेंडर करने में ज्यादा जल्दबाजी क्यों करते है यह आज तक चर्चा का विषय है कोई परियोजना सफल होगी की नहीं उसकी पूरी तकनीकी छानबीन होनी चाहिए, बिलिंग एजेंसियो के मामले में ऐसा क्यों नहीं किया गया की उच्च स्तरीय जाँच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही सरकार को अबिलम्ब करना चाहिए ।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा नेे कहा ने कहा कि सबसे बड़ी चिंता का विषय एक यह भी है की अपने निजी स्वार्थ में बिजली कम्पनियों ने लगभग 78 मीटर निर्माता कम्पनियो से े मीटर खरीद डाले जो मीटर कम्पनियो कई राज्यों में नाकारा है वह प्रदेश में उपभोक्ताओ के लिए जी का जंजाल बने हुए है। उन्होंने कहा कि दर्जनों मीटर प्रोब बिलिंग के लिए मानक ही नहीं पूरा करते क्यों कि उसमे तकनीकी कमियां है वहीँ बिलिंग कम्पनियों का सॉफ्टवेयर भी मानक के अनुसार नहीं है। ऐसे में सरकार को सभी पहलुओ की जाँच कराकर दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाना चाहिए।







