उपभोक्ता परिषद ने कहा जनता का प्रस्ताव लागू कराकर आयोग बिजली दरों में करे 16 प्रतिषत की कमी और घरेलू का फिक्स चार्ज करें समाप्त
प्रदेश की विजली कम्पनियों द्वारा दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) सहित बिजली दर प्रस्ताव व स्लैब परिवर्तन हेतु विद्युत नियामक आयोग मे दाखिल याचिका पर आज आम जनता की सार्वजनिक सुनवाई विद्युत नियामक आयोग में आयोग चेयरमैन आरपी सिंह सदस्य गण केके शर्मा व वीके श्रीवास्तव की उपस्थित में विडियों कान्फ्रेन्सिंग के माध्यम से सम्पन्न हुई।
आज की सुनवाई दक्षिणांचल, पश्चिमांचल व केष्कों कम्पनी की सम्पन्न हुई, जिसमें सैंकड़ों की संख्या में उपभोक्ताओं व सम्बन्धित कम्पनी के प्रबन्ध निदेशक व निदेशक गण सहित वरिष्ठ अभियन्ता शामिल हुये। तीनों बिजली कम्पनियों द्वारा सर्वप्रथम अपनी-अपनी कम्पनी का एक प्रस्तुतीकरण किया गया।
उसके बाद प्रदेश के विद्युत उपभोगताओं की तरफ से अपनी बात रखते हुये उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा की उपभोगता परिषद द्वारा प्रदेश के विद्युत उपभोगताओं बिजली दरों में 16 प्रतिशत कमी किये जाने सहित घरेलू बिजली उपभोगताओं के फिक्स चार्ज समाप्त करने वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के मिनिमम गारण्टी चार्ज समाप्त करने व सभी विद्युत उपभोक्ताओं को 4 प्रतिशत का रेगुलेटरी लाभ देने के मुद्दे पर अपने तर्क रखते हुये कहा कि जब प्रदेश की विद्युत उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर लगभग रूपया 13,337 करोड़ निकल रहा है।
उन्होंने कहा कि ऐसे में उसका लाभ आयोग को दरों में कमी करके उपभोक्ताओं को देना चाहिए। विधिक तर्क रखते हुये उपभोक्ता परिषद ने बिजली कम्पनियों के स्लैब परिवर्तन को असंवेधानिक बताते हुये खारिज करने की मांग की।
उपभोक्ता परिषद ने आयोग को उत्तराखण्ड, हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब, बिहार, दिल्ली में कोरोना काल में बिजली दरों में कमी को आधार बनाकर प्रदेश में जनता प्रस्ताव को लागू कराने की मांग उठाई और जोर दार बहस करते हुये यह मुद्दा उठाया कि प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा 6 प्रतिशत वितरण हानियों को बढ़ाकर लगभग 3500 करोड़ का अतिरिक्त गैप निकाला गया और उसी प्रकार एटीएनसी हानियों की शेयरिंग प्रदेश की उपभोक्ताओं पर डालने हेतु 4510 करोड़ का ट्रूअप में गैप निकाला गया बिजली कम्पनियों को मिलने वाली रिटर्न आफ इक्यूटी के तहत 2000 करोड़ का फायदा हो समाप्त। जो प्रदेश में पहली बार हो रहा है इसलिये अबिलम्ब इसे खारिज किया जाये।
उपभोक्ता परिषद में पिछले 8 वर्षों में किसानों, ग्रामीणों व घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में अधिकतम 84 से 500 प्रतिशत की वृद्धि का आधार देते हुये कहा यदि अब प्रदेश में दरों में बढ़ोत्तरी हुई तो उपभोक्ता तबाह हो जायेगा। उपभोक्ता परिषद ने अपनी बात रखते हुए कहा कि दक्षिणांचल बिजली निगम रूपया 5.26 प्रति युनिट की बिजली खरीद कर टोरेंट को सस्ती दर रु0 4.45 प्रति युनिट में बेचकर प्रत्येक वर्ष 162 करोड़ का नुकसान कर रहा है अभिलम्ब टोरेन्ट के अनुबन्ध को खारिज किया जाना चाहिए उल्टे टैरिफ प्रस्ताव में टोरेन्ट को विभागीय उपभोक्ता बताकर उसके साथ अपनी मिली भगत साबित की गई है।
उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट मीटर परियोजना को फेल करार देते हुये आगरा कम्पनी पर करारा हमला बोलते हुये कहा कि कम्पनी के आडिटर ने खुद कहा है कि पूर्व में रेगूलेटरी सरचार्ज की वसूली की जब सत्यता जानने के लिये जब 3 वितरण खण्डों को सत्यापित किया गया तो तीनों में अलग-अलग दर निकले जो टैरिफ ओदेश का खुला उल्लंघन है।
उपभोक्ता परिषद ने तंज कसते हुये कहा कि जिस प्रकार से एमओयूरूट के चलते मंहगी बिजली जनता भुगत रही है आगे अब पूर्वांचल कम्पनी का निजीकरण करके एक नये घोटाले को जन्म दिया जा रहा है जिसका खामियाजा भविष्य में जनता को भुगतना पड़ेगा। जिस उदय योजना के नाम पर वितरण हानियों के कमी के लिये अनुबन्ध किया गया अभियन्ताओं को लाखों का इनाम बाटा गया अब सुधार के नाम पर घड़ियालू आसू बहाया जा रहा है।
प्रदेश के लगभग 75 लाख विद्युत उपभोक्ताओं की सिक्योरिटी को सिस्टम में फीड न करके 150 से 200 करोड़ रूपया उपभोक्ताओं का पिछले 5 सालों से कम्पनियां दबा के रखी है। ग्रामीण अनमीटर्ड से मीटर्ड हुये उपभोक्तओं को 10 प्रतिशत रिबेट न होकर बिजली कम्पनियों ने लगभग 150 करोड़ दबा लिया यह सब उपभोक्ताओं का उत्पीड़न है। पिछले वर्षों में ग्रामीण विद्युत उपभोक्तओं को 24 घण्टे बिजली देने के नाम पर उनकी दरों को रुपया 400 प्रतिकिलों वाट से रुपया 500 कराया गया और बिजली आज 3 साल भी गांव को 24 घण्टे नहीं। किसानों को 10 घण्टे बिजली दी जा रही है और प्रस्ताव को 14 घण्टे के नाम पर आकलन यह गलत है इसलिये किसानों की दरों में कमी कराई जाये।
आईआईए के संजीव अरोरा ने उद्योगों की दरों में कमी की मांग उठाते हुये केवीएच बिलिंग की मांग उठाई।
मैट्रो से डा. सुशील कुमार, डीएमआरसी से सुबोध कुमार ने फिक्स चार्ज व एमसीजी समाप्त करने की मांग उठाई और मैट्रो की दरों में कमी का मुद्दा उठाया। वहीं बुन्देलखण्ड चैम्बर के धीरज कुमार ने उद्योगों की बिजली दर कम करना जरूरी बताया बुनकर सभा के हाजी इफ्तकार खान ने बुनकरों को छूट चालू रखने और पूर्व की व्यवस्था लागू रखने की मांग उठाई उपभोक्ता सियाराम शर्मा व शतेन्द्र शर्मा ने 1912 पर सिकायत को बिना निस्तारित किये उसे निस्तारित बताने पर अपनी नाराजगी बताई। राजू पंचाल ने प्रस्ताव को निरस्त करने के साथ दरों में कमी की मांग उठाई। एडवोकट तबरेज ने जनता को कोरोना काल में राहत देने की मांग उठाई।
आयोग अध्यक्ष ने कहा की 28 सितम्बर 2020 को मध्यांचल, पूर्वांचल की सुनवाई के बाद आम जनता की राय के आधार पर आयोग उचित निर्णय लेगा।







