उपभोक्ता परिषद ने पीक आवर में जनरेटर द्वारा एक्सचेंज पर रुपया 5:30 लागत की बिजली को अधिकतम रुपया 10 में बेचने को बताया गलत कहा 4 पैसे से ज्यादा मार्जिन लेना उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने वाला नियम इस पर भी केंद्र सरकार करें विचार और रुपया 6 प्रति यूनिट की लगाई जाए अधिकतम सीलिंग
लखनऊ 13 नवंबर : केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के उत्तर प्रदेश में आठवीं आयोजित होने वाली डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 14 नवंबर के कार्यक्रम में दो दिवसीय लखनऊ आगमन पर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री को 5 सूत्रीय मांगे उठाई है और उनके केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय को भेजा है जिसमे कहा पूरे उत्तर प्रदेश व देश के उपभोक्ताओं की महत्वपूर्ण मांग है इस पर ऊर्जा मंत्रालय को समय रहते कार्रवाई करते हुए निर्णय लेना चाहिए। उपभोक्ता परिषद कुछ संवैधानिक विषयों को उनके सामने उठाते हुए उसे पर निर्णय लेने की मांग कर रहा है ।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा की तरफ से भारत सरकार के ऊर्जा मंत्री को भेजे गए पांच प्रमुख मांगे जिसमें कहा गर्मी में देश के ज्यादातर जनरेटर पीक आवर में अपनी बिजली को एक्सचेंज पर रुपया 10 प्रति यूनिट तक बेचते हैं जबकि सभी को पता है जनरेटर की विद्युत पैदा करने की जो लागत है वह रुपया 5.30 प्रति यूनिट के करीब है ऐसे में केंद्र द्वारा यह सख्त कानून बनाया जाए की 4 पैसे प्रति यूनिट मार्जिन से ज्यादा कोई भी जनरेटर ना कमाई करे और उसके ऊपर बिजली को न बेच पाए तथा एक सीलिंग लगाई जाए यानी कि हर हाल में रुपया 6 प्रति यूनिट पर अधिकतम सीलिंग होनी चाहिए।
केंद्रीय सेक्टर के अनेको उत्पादन इकाइयों की जो पीपीए के तहत महंगी बिजली उत्तर प्रदेश को आवंटित है और काफी समय बीत चुका है उसे निरस्त किया जाए और महंगी बिजली का आवंटन उत्तर प्रदेश के कोटे से हटाया जाए क्योंकि यहां पर पहले से ही बहुत महंगी बिजली है। पूरे देश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाये जा रहे हैं और उसी क्रम में उत्तर प्रदेश में भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाया जा रहा है परिषद् का कहना है कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत कोई भी उपभोक्ता को स्मार्ट प्रीपेड मीटर व पोस्टपेड मीटर के विकल्प का अधिकार प्राप्त है लेकिन भारत सरकार के रूल में अनिवार्य रूप से सभी उपभोक्ता को स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की बाध्यता की गई है जो विद्युत अधिनियम 2003 का खुला उल्लंघन है इसलिए इसे वैकल्पिक रखा जाए जैसा हमारा विद्युत अधिनियम 2003 उपभोक्ताओं को अधिकार देता है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष की तरफ से आगे जो मांगे रखी गयी उसमे पूरे देश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाले देश के निजी घराने ज्यादातर स्मार्ट प्रीपेड मीटर के अंदर लगने वाल कंपोनेंट में चीनी कंपोनेंट का बडी मात्रा में उपयोग कर रहे हैं और उसे पर कोई भी जांच नहीं हो रही है एक उच्च स्तरीय टीम बनाकर उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर के अंदर चीनी कंपोनेंट की जांच कराई जाए और आरडीएसएस योजना में यह व्यवस्था की जाए कि किसी भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर निर्माता कंपनी के मीटर में कोई भी कमियां सामने आती है तत्काल उसे ब्लैक लिस्ट किया जाए। का कानून भी शामिल किया जाए।
केंद्र सरकार द्वारा स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना के मद में आरडीएसएस परियोजना में उत्तर प्रदेश के लिए रुपया 18885 करोड का अनुमोदन दिया गया लेकिन देश के जो निजी घरानों के टेंडर पास हुए वह 27342 करोड के हैं यानी कि लगभग 9000 करोड का अंतर जो सिद्ध करता है उत्तर प्रदेश में टेंडर उच्च दरों पर पास किया गया उपभोक्ता परिषद इस पूरी योजना की सीबीआई से जांच करने की मांग उठना है मैं केंद्र सरकार से यह मांग रखता हूं कि आरडीएसएस योजना की उत्तर प्रदेश में सीबीआई से जांच कराई जाए ।







