निजीकरण से मालामाल होंगी कंपनियां, जनता होगी त्रस्त: उपभोक्ता परिषद

0
551

उपभोक्ता परिषद् 24 को बिजली दर की सुनवाई में खोलेगी पोल

उपभोक्ता परिषद ने कहा कि सरकार व कुछ नौकरशाहो को यह लगता है की बिजली विभाग में सुधार का एक मात्र विकल्प निजीकरण है। परिषद् ने कहा कि प्रदेश में अब तक बिजली क्षेत्र में जिन परियोजनाओ का जिम्मा निजीघरानो व उनके कार्मिको के भरोसे रहा, उसका विवरण और सफलता सरकार को यह सोचने पर विवश कर देगा कि निजीकरण जनहित में नहीं है।

उपभोक्ता परिषद ने कहा कि सबसे पहले 1993 ने नोएडा पावर कंपनी का गठन तबसे लगातार निजी कंपनी लाभ कमा रही कोई समीक्षा नहीं की फिर 2009 में टोरेंट पावर कंपनी का अनुबंध आज पुराना बिजली का बकाया लगभग 2200 करोड़ हड़प के बैठी फिर एमओयू रुट से प्रदेश में उत्पादन इकाइयो को लगाने का निर्णय खामियाजा महगी बिजली खरीद और आज तक बिजली दरों में बढ़ोतरी की मार केवल निजीघरानो व जॉइंट वेंचर को फिक्स्ड चार्ज के रूप में हर वर्ष लगभग 11 हजार करोड़ का भुगतान बिजली लो या न लो देना पडे़गा जिसका खामियाजा जनता भुगत रही आज जिसके चलते कई वर्षो से बिजली दर बढ़ोतरी की मार जनता को झेलना पड़ रहा। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि सौभाग्या योजना में हजारो करोड़ खर्च किया गया, निजी घरानो ने जो काम किया वह बहुत ही घटिया क्वालटी का था आज भी अनेको गांव में कही मीटर तो कही केबिल नहीं कही बिजली नहीं उसका खामियाजा जनता भुगत रही।

वही दूसरी ओर उपभोक्ता परिषद के लोक महत्वा याचिका पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा पूर्वांचल के निजीकरण पर जो 7 दिन में बिजली दर की सुनवाई के पहले पावर कार्पोरेशन से जबाब माँगा था अभी तक कार्पोरेशन जबाब आयोग को नहीं दाखिल किया गया है। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि आगामी 24 को बिजली दर की सुनवाई में सबकी पोल खोलेगा।

उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा बिलिंग व उपभोक्ता सेवा में सुधार बिजली चोरी सहित अनेको पैरामीटर की ऑनलाइन समीक्षा के नाम पर बिलिंग सोफ्ट्वेयर व आईटी से सम्बंधित करोड़ो के ऐप खरीदे गये और खर्च किया गया उसके बाद आज भी लगभग 75 लाख से ऊपर उपभोक्ताओ को उनकी सिक्योरटी पर व्याज इसलिए कई सालो से नहीं मिल रहा क्यों की सिस्टम में सिक्योरटी राशि फीड नहीं 100 करोड़ से ऊपर उपभोक्ता का व्याज आज भी विभाग के पास लंबित बिलिंग में मैसेज कुछ भुगतान कुछ करोड़ो के दर्जनों ऍप लेकिन कही पारदर्शिता नहीं सुधार के लिए करोड़ो के निजी कंसल्टेंट घाटा लगातार बढ़ रहा जो अब 90 हजार करोड़ के ऊपर स्मार्ट मीटर परियोजना हाल सबके सामने बत्ती गुल भार जंपिंग बिलिंग वयवस्था में आये दिन वयवधान सुधार के दावे हवा हवाई निजी मीटर कम्पनिया आये दिन नयी टेक्नोलॉजी लेकर आती है अगर पांच साल में आंकड़ा निकाला जाय तो हजारो करोड़ रुपया मीटर खरीद में बर्बाद उसका खामियाजा बिजली दर में उपभोक्ता के माथे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here