कालिंजर रोडवेज बस स्टॉप पर छिड़ा विवाद, दिखी ओछी राजनीति
अजय कुमार श्रीवास्तव
कालिंजर/बांदा। राजनीति जब मानवीय संवेदनाओं पर हावी हो जाती है, तो वह न केवल मर्यादाएं लांघती है बल्कि एक पीड़ित पिता के संघर्ष और त्याग का भी अपमान करती है। ऐतिहासिक कालिंजर में रोडवेज बस स्टॉप के निर्माण को लेकर कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है, जहाँ बबेरू विधायक विश्वंभर सिंह यादव द्वारा अपने दिवंगत पुत्रों की स्मृति में दान की गई जमीन पर श्रेय की राजनीति शुरू हो गई है।
बबेरू विधायक विश्वंभर सिंह यादव ने अपने दिवंगत पुत्रों की यादों को संजोने और जनहित के लिए कालिंजर में अंतरराज्यीय रोडवेज बस स्टॉप हेतु अपनी 5 बीघा निजी भूमि दान दी थी। जिसकी कीमत लगभग 8 करोड़ रुपये है। उनकी मंशा केवल इतनी थी कि इस बस स्टॉप का नामकरण उनके स्वर्गवासी पुत्रों के नाम पर हो, ताकि आने वाली पीढ़ियां जनसेवा के इस माध्यम से उन्हें याद रख सकें।
हैरानी और दुख का विषय तब सामने आया जब इस बस स्टॉप के भूमि पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
नरैनी की भाजपा विधायक श्रीमती ओममणि वर्मा को तो बुलाया गया लेकिन स्थानीय प्रशासन ने इस गरिमामयी कार्यक्रम में दानकर्ता पिता (बबेरू विधायक विश्वंभर सिंह यादव) को आमंत्रित करना तक उचित नहीं समझा, जिन्होंने अपनी कीमती जमीन समाज और सरकार के लिए न्योछावर कर दी।
सपा विधायक के समर्थक और स्थानीय जनता में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि:
- जिस व्यक्ति ने जमीन दी, उसे ही भूमि पूजन से दूर रखकर प्रशासन ने किस ‘लोकतन्त्र’ का परिचय दिया?
- क्या विकास के कार्यों में विपक्षी विधायक का व्यक्तिगत त्याग सत्ता पक्ष की राजनीति से छोटा है?
- एक पीड़ित पिता की भावनाओं को कुचलकर श्रेय लूटने की यह कैसी होड़ है?
- कालिंजर ही नहीं पूरे जिले में यह चर्चा का विषय है कि क्या किसी के किए गए परोपकार पर भी दलगत राजनीति की मुहर लगाना जरूरी है?
- लोगों का कहना है कि प्रशासन को कम से कम शिष्टाचार के नाते दानकर्ता को सम्मान देना चाहिए था।
- “यह केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, एक पिता की अपने बेटे के प्रति आखिरी निशानी है। इसे राजनीति की भेंट चढ़ाना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।”
इस विषय पर जब बबेरू विधायक विश्वंभर सिंह यादव जी से बात की गई तो उनकी आंखों में आंसू आ गए, रूंधते स्वर में उन्होंने कहा कि उनकी विधवा बहुओं की भी इच्छा थी कि ऐतिहासिक नगर और बाबा नीलकंठ की नगरी कालिंजर में जो उनकी जमीन है वो किसी ऐसे कार्य के लिए हो जाए जिसमें उनके दिवंगत पति का नाम सदा जीवित रहे।
पर्यटन नगरी में रोडवेज बस स्टॉप के लिए ग्राम सभा के पास वाजिब जमीन नहीं थी हमारी जमीन के लिए वहां के कुछ जिम्मेदार लोगों के कहने पर भूमि दान की प्रक्रिया आगे बढ़ी लेकिन स्थानीय बीजेपी नेता और प्रशासन ने अपना श्रेय लेने के लिए शिष्टाचार ही भूला दिया। यह बहुत ही दुख का विषय है।







