एसआरएम स्कूल के एनुअल फंक्शन में पूर्व मंत्री बोलीं- बच्चे मिट्टी के घड़े जैसे, पहले घर में ढालें फिर स्कूल में तराशें
लखनऊ: बच्चे मिट्टी के घड़े जैसे होते हैं, उन्हें सबसे पहले अभिभावक को ढालना होता है, फिर गुरु तराशते हैं। अगर बच्चा संस्कारवान नहीं तो यह अभिभावक की कमी है जो यह खुद की बेइज्जती है! पूर्व मंत्री और भाजपा नेत्री स्वाती सिंह ने एसआरएम कान्वेंट स्कूल के एनुअल कार्यक्रम में यह सशक्त संदेश दिया।
उन्होंने कहा, “बच्चे की मानसिकता समझें, उसके रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका दें। इससे वह तेजी से प्रगति करेगा।” स्कूल प्रबंधक एडवोकेट राज कुमार राय और शिक्षकों की तारीफ करते हुए स्वाती ने इसे शिक्षा के साथ संस्कार देने की अनूठी मिसाल बताया।
क्षेत्रीय विधायक अमरेश कुमार ने गुरुओं को सर्वोच्च स्थान देते हुए कहा, “गुरु न हों तो जीवन व्यर्थ। एसआरएम जैसे संस्थान शिक्षा के साथ संस्कार सिखाकर समाज को मजबूत बना रहे हैं।”
कार्यक्रम में बच्चों ने धमाकेदार नृत्य-संगीत प्रस्तुतियां दीं, जिसने माहौल को उत्साह से भर दिया। प्रधानाचार्या रेनू सिंह और स्टाफ ने अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया, जबकि बड़ी संख्या में अभिभावक मौजूद रहे। एक यादगार शाम जो शिक्षा और संस्कारों की ताकत को सेलिब्रेट करती रही!







