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    महामारी का प्रकोप

    ShagunBy ShagunApril 18, 2021 Hot issue No Comments4 Mins Read
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    जी के चक्रवर्ती

    इंसानों ने जब-जब यह समझ लिया कि विज्ञान ने सब कुछ आविष्कार कर लिया है या सभी तरह की बीमारियों को अपने वश में कर लिया या उसका इलाज ढूंढ लिया है। तब तब एक अन्य तरह की बीमारी ने जन्म लेकर मानवता को स्तब्ध कर दिया।

    प्रत्येक 100 वर्षों के बाद यानिकि 20 वें दशक में सम्पूर्ण विश्व ने कोरोना के रूप में यह महामारी ने हम इंसानों को अपने चपेट में लेकर इस बात को सिद्ध कर दिया है। हम सभी अनजान बीमारियों के आगे कितने बेबस हैं।

    हम इंसानो ने जब-जब ऐसा सोचने लगे कि हमने अपनी मेहनत और बुद्धि के बल पर हम इस इस पृथ्वी को इतना ऊंचे या कहे कि सबसे ऊंचे उठा दिया कि अब हमें कोई भी बीमारी की कीटाणु क्षति नही पहुंचा सकती इसके बावजूद एक नये तरह के वायरस ने पूरी दुनिया के दिल में डर उत्पन्न कर दिया।

    प्रकृति अपने प्रकोप से इंसानों को प्रतिपल ये समझाती रहती है कि उसने ही इस दुनिया को बनाया है और वही इस दुनिया का विनाशक भी है और वह जब चाहे पल भर इस दुनिया को तबाह कर सकती है। जिसके उदाहरण स्वरूप आज प्रकृति अपना विक्राल रूप धारण कर कोरोना जैसी लाइलाज बीमारी के कीटाणुओं ने मानव समाज पर हमला कर दिया यह तो कहिए कि दुनियां भर के वैज्ञानिकों के दिन और रात अथक प्रयासों से इस बीमारी के कीटाणु रोधी वैक्सीन की खोजकर दुनिया को काल के मुहँ में सामने से रोक लिया है।

    इसे एक संयोग ही कहा जायेगा कि सन 2020-21 में दुनिया के लोगो के समाज ने किसी ना किसी भयानक महामारी का सामना किया है। आज हम आपको यह बताते हैं कि 20 के दशकों तक इंसानी दुनिया ने कौन कौन सी महामारी को एक प्रकोप के रूप में झेला और उससे सम्पूर्ण मानव जाति को कितना क्षति उठाना पड़ा है।

    हम यह सोच कर देखें कि प्राचीन समय मे उस देश का क्या हाल हुआ होगा, जब किसी अनजान बीमारी ने लाखों लोगों को काल के मुहँ का ग्रास बना लिया होगा। हम यहां बात कर रहे हैं उस महामारी की जिसको सम्पूर्ण दुनिया में दि ग्रेट प्लेग ऑफ मार्सिले के नाम से जाना पहचाना। प्लेग ने वर्ष 1720 में फ्रांसीसी क्षेत्र के अलावा लैंगडोक के कुछ हिस्सों में बसे लोगों को लेवेंट से आने वाले प्लेग नामक बीमारी का शिकार बना दिया जिससे लोग एक-एक कर काल के मुहँ में समाने लगे थे।

    इस मर्सिले प्लेग नाम से जाने जानी वाली इस महामारी की चपेट में यूरोप के कई क्षेत्रों के आजाने से उस समय की स्थिति कितनी भयावह हो उठी जिसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता हैं कि 45,000 आबादी वाले मर्सिले में जब यह महामारी अपने चरम सीमा पर पहुंची तो वहां प्रति दिन 1000 से भी अधिक लोगों की मौतें होने लगी।

    ऐसा कहा जाता है कि एक महामारी वर्ष1817 में जयसोर से (फिलहाल जयसोर बांग्लादेश का एक जिला है।) रोग की शुरुआत हो कर कलकत्ता तथा ढाका के मध्य क्षेत्र से लेकर भारत के अन्य हिस्सों के साथ ही साथ वर्मा एवं श्रीलंका तक पहुंचा गया था। वर्ष 1820 तक यह महामारी थाईलैंड के सिआम तथा इंडोनेशिया में भी अपने पैर पसार लिये थे। उसके बाद इस कालरा नाम से जाने जाने वाली महामारी ने दुनिया को सबसे अधिक प्रभावित किया। उस समय कालरा ने अन्य किसी महामारी के तुलना में सबसे अधिक प्राण घातक इस महामारी ने इंसानों को संभलने तक का भी मौका नहीं दिया। एक वयस्क के शरीर में सामान्यतः 44 लीटर पानी होता है। यही पानी हमारे शरीर के आंतरिक हिस्सों तक एवं कोशिकाओं तक पहुंचता है, लेकिन एक बार जब कालरा का कीटाणु हमारे शरीर में प्रवेश कर जाता है तो शरीर से मात्र 24 घंटों के अंदर ही 20 लीटर से भी अधिक पानी बाहर निकल जाता है जिससे सुबह स्वस्थ दिखने वाला व्यक्ति अगले ही दिन मौत के मुंह में समा जाता है।

    Shagun

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