“पापा की परी” की बदतमीजी या एंटाइटलमेंट का नया स्तर? सोशल मीडिया पर आग, लोग बोले – “iPhone दे दिया, संस्कार भूल गए!”
मुंबई : सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो तहलका मचा रहा है, जिसमें एक महिला यात्री कैब ड्राइवर के साथ बेहद अभद्र व्यवहार करती नजर आ रही है। ड्राइवर अपनी मेहनत की कमाई का किराया मांग रहा है, लेकिन महिला उसे धमकाते हुए और गाली-गलौज करते हुए भागती दिख रही है।
वीडियो में साफ सुनाई देता है:
कैब ड्राइवर बार-बार चिल्ला रहा है – “मैडम, पैसा कौन देगा? कैब का किराया दे दो!”
जवाब में महिला बेफिक्र अंदाज में बोलती है – “अबे चल निकल, काहे का पैसा?” और हाथ हिलाकर उसे भगाने की कोशिश करती है।
यह घटना मुंबई में हुई बताई जा रही है, जहां ड्राइवर महिला के पीछे-पीछे चलते हुए किराया मांग रहा है, और एक राहगीर बीच-बचाव करने की कोशिश करता दिखता है। लेकिन महिला बिना किराया दिए (करीब ₹250 का बताया जा रहा है) वहां से निकल जाती है।

सोशल मीडिया पर आग लग गई – लोग गुस्से में
दिलीप मौर्य ने लिखा: “यह मज़ाक नहीं, साफ़ बदतमीज़ी है। कैब ड्राइवर अपनी मेहनत का पैसा मांग रहा है और जवाब में अभद्रता। वायरल होने से गलत चीज़ सही नहीं हो जाती, और सम्मान हर किसी का हक़ है।”
एक यूजर ने तंज कसते हुए कहा: “गजब हैं पापा की परी! सेवा ली, फायदा उठाया, और पेमेंट का नामोनिशान नहीं। ऐसा एंटाइटलमेंट देखकर लगता है कि कुछ लोग खुद को नियमों से ऊपर समझते हैं।”
सबसे दिल को छूने वाला कमेंट शक्ति सिंह ढाका का: “बहुत ही विचार करने वाली बात है… हमने बच्चों को iPhone तो दे दिए, पर संस्कार और तहजीब नहीं दे पाए।”
इस घटना वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें – https://x.com/i/status/2005919432242257985
लोग क्या कह रहे हैं?
“यह ‘वुमन कार्ड’ मत खेलो” : कई यूजर्स ने ड्राइवर का साथ दिया और कहा कि मेहनतकश लोगों का अपमान बर्दाश्त नहीं होना चाहिए।
“संस्कार कहां गए?” : वीडियो देखकर लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि महंगे कपड़े, महंगे फोन होने के बावजूद कुछ लोगों में बुनियादी इज्जत की कमी क्यों?
कुछ ने इसे “एंटाइटल्ड जेनरेशन” का उदाहरण बताया, जहां लोग सोचते हैं कि सब कुछ फ्री मिलना चाहिए।
बता दें कि यह वीडियो 30 दिसंबर को वायरल हुआ और अब लाखों लोग इसे देख-शेयर कर रहे हैं। कई का कहना है कि ऐसी घटनाओं से कैब/ऑटो ड्राइवर्स का मनोबल टूटता है, जो रोज कमाई के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं।
क्या आपको लगता है कि किराया न देना अब “कूल” हो गया है? या फिर यह सिर्फ एक बदतमीजी का मामला है? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं।






