लाखों शिक्षकों की नौकरी पर खतरा, अब सड़कों पर उतर आए
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के प्राथमिक शिक्षकों में भारी रोष है! सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 2011 से पहले नियुक्त हजारों शिक्षकों के लिए भी टीईटी पास करना अनिवार्य हो गया। इससे नौकरी, प्रमोशन और सम्मान पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। शिक्षक इसे “काला कानून” बता रहे हैं और अब एकजुट होकर विरोध कर रहे हैं।
इसी कड़ी में TET की अनिवार्यता के विरोध को लेकर TFI के निर्देश के अनुपालन मे उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक लखनऊ की विकास खंड सरोजिनी नगर की बैठक विकास खंड के अध्यक्ष मंत्री द्वारा निर्धारित स्थान पर की गई। जिसमें उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, लखनऊ के जिलाध्यक्ष के संरक्षण में समीक्षा बैठक की गई।
बैठक को प्रांतीय उपाध्यक्ष सुधांशु मोहन, प्रान्तीय मन्त्री मंत्री वंदना सक्सेना विकासखंड काकोरी के अध्यक्ष अजय सिंह, वरिष्ठ शिक्षक विजय कुमार, अमित कुमार, प्रेम लता संघर्ष समिति के अध्यक्ष अनिल कुमार सिंह सहित कई अन्य शिक्षकों ने संबोधित किया।

बता दें कि इस “काले कानून” के खिलाफ शिक्षक अब एकजुट हो गए हैं। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के बैनर तले सभी प्रमुख शिक्षक संगठन मिलकर आंदोलन चला रहे हैं। लखनऊ के सरोजिनी नगर विकास खंड में हुई बैठक में प्रथम चरण के तीन बड़े कार्यक्रम तय किए गए हैं:
- 22 फरवरी 2026 : दोपहर 2 से 4 बजे तक X (ट्विटर) पर #अभियान हैशटैग के साथ जोरदार ऑनलाइन अभियान। सभी शिक्षक साथी ट्वीट करें, अपनी आवाज़ बुलंद करें!
- 23 से 25 फरवरी 2026: स्कूल में पढ़ाते समय हाथ पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताएं। ये “काला कानून” का सिंबल होगा!
- 26 फरवरी 2026 : दोपहर 1 से शाम 4 बजे तक लखनऊ जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बाहर विशाल धरना। वहां से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा।
शिक्षक कह रहे हैं कि ये लड़ाई सिर्फ नौकरी की नहीं, बल्कि सम्मान, सेवा शर्तों और बेसिक शिक्षा को बचाने की है। पूरा लखनऊ जिला एक साथ खड़ा है!
क्या आप भी शिक्षक हैं या इस मुद्दे से जुड़े हैं? आंदोलन में शामिल हों, आवाज़ उठाएं क्योंकि एकता में ही ताकत है!







