नई दिल्ली । दिल्ली हाईकोर्ट ने उपहार अग्निकांड के एक मामले में चार्जशीट होने के 10 साल बाद भी गवाहों के बयान नहीं होने पर नाराजगी जताई है। ये मामला कोर्ट के दस्तावेजों से छेड़छाड़ से जुड़ा हुआ है। 2007 में इस केस में चार्जशीट होने के बाद भी अब तक गवाहों के बयान न होने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जमकर फटकार लगाई है। सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट ने पुलिस से मामले से जुड़ी स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी। हाईकोर्ट में उपहार अग्निकांड पीड़ित संघ के संयोजक नीलम कृष्णामूर्ति ने केस में स्पीडी ट्रायल की मांग करते हुए याचिका दायर की है। याचिका में बताया कि इस मामले में 2006 में एफआईआर हुई थी। 12 जनवरी 2007 में ट्रायल कोर्ट में इसकी चार्जशीट भी दाखिल कर दी गयी। इस मामले से संबंधित कई याचिकाएं हाईकोर्ट और निचली कोर्ट में होने के कारण लगातार केस की सुनवाई में देरी हो रही है। अभी केवल पहले गवाह के बयान चल रहे हैं। इस मामले में कोर्ट स्टाफ़ पर ही केस से ज़ुड़े दस्तावेज़ गायब करने और उनमें हेरफेर करने का आरोप है। उपहार सिनेमा घर के मालिक गोपाल अंसल और सुशील अंसल के अलावा बर्खास्त कोर्ट कर्मचारी दिनेश शर्मा समेत कुछ और लोग भी आरोपी हैं। उपहार कांड के मुख्य केस मे हालांकि ट्रायल कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही अपना फ़ैसला सुना चुका है। वहीं दस्तावेजों की छेड़छाड़ से जुड़ा ये मामला अभी भी 10 साल बीतने के बाद किसी नतीज़े पर नहीं पहुंच पाया है।
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