लखनऊ : उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन की महत्वाकांक्षी 2G आधारित स्मार्ट प्रीपेड मीटर परियोजना पूरी तरह विफल हो गई है। उपभोक्ता परिषद ने दावा किया कि 2018 में EESL के साथ शुरू की गई इस योजना में अब तक करीब 959 करोड़ रुपये ओपेक्स मॉडल में खर्च हो चुके हैं, लेकिन तकनीक पुरानी होने के कारण मार्च 2027 तक सभी लगभग 11.33 लाख सक्रिय मीटर RDSS योजना के तहत नए 4G स्मार्ट प्रीपेड मीटरों से बदल दिए जाएंगे।
नई लागत: प्रति मीटर ₹6,016 × 11.33 लाख = लगभग 681 करोड़ रुपये और डूबेंगे।
कुल नुकसान: 1,640 करोड़ रुपये से अधिक (959 + 681)।
उपभोक्ता परिषद ने शुरू से दी थी चेतावनी
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा, “2018 से हम चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे थे कि 2G तकनीक मर चुकी है, ये मीटर जल्दी कबाड़ हो जाएंगे। किसी ने नहीं सुनी। अगस्त 2020 में जन्माष्टमी के दिन एक साथ 1.58 लाख मीटर बंद हो गए थे। तब भी सिर्फ जांच हुई, किसी अधिकारी पर गाज नहीं गिरी। आज वही हो रहा है जिसकी हमने भविष्यवाणी की थी।”
अब सवाल जनता पूछ रही है:
- हजारों करोड़ का यह घपला किसने किया?
- EESL को हर महीने ₹101 प्रति मीटर क्यों दिए जा रहे थे जबकि मीटर फेल हो गए?
- दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
उपभोक्ता परिषद ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस पूरी परियोजना की उच्च स्तरीय जांच हो और जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। जनता का पैसा डूबा, जवाब कौन देगा?







