भक्ति रस का सांस्कृतिक सेतु

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
प्रयागराज कुम्भ की दिव्यता भव्यता चारों दिशाओं में गूंज रही है। यहां भारतीय राष्ट्र की व्यापकता अपने विराट रूप में परिलक्षित है। यह हमारी भौगोलिक सीमाओं तक ही सीमित नहीं है। पूरा उत्तर प्रदेश मेजबान बना हुआ है। अनेक स्थानों पर धार्मिक ,सामाजिक, सांस्कृतिक आयोजन हो रहे है। यह कुम्भ का ही प्रताप और प्रभाव है। इसी क्रम में प्रदेश के तीन स्थानों पर गीत रामायण का आयोजन हुआ। रामकथा केवल भव सागर को ही पार नहीं कराती, बल्कि यह सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की सेतु भी है। मॉरीशस, त्रिनिदाड़ ,इंडोनेशिया,कम्बोडिया,सहित अनेक देश इस प्रवाह में शामिल है।
प्रयागराज कुम्भ के प्रारंभिक चरण में उत्तर प्रदेश के तीन स्थानों पर गीत रामायण का आयोजन हुआ। वैसे करीब दो वर्ष पहले उत्तर प्रदेश के राज्यपाल ने जब यहां महाराष्ट्र दिवस आयोजित किया था, तब उसमें गीत रामायण के रसास्वादन का अवसर मिला था। इस बार लखनऊ राजभवन में हिंदी गीत रामायण ने भक्ति रस का माहौल बनाया। वाराणसी में दस व ग्यारह जनवरी को  आयोजित मराठी गीत रामायण कार्यक्रम का उद्घाटन राज्यपाल राम नाईक ने  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और  महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री  देवेन्द्र फडणवीस की उपस्थिति में किया था। इस वर्ष महाराष्ट्र के प्रसिद्ध साहित्यकार स्वर्गीय जी डी माडगुलकर एवं गायक स्वर्गीय सुधीर फड़के, जो  गीत रामायण  के रचियता हैं का जन्म शताब्दी वर्ष है।
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार के बीच हुये सांस्कृतिक आदान प्रदान के अनुबंध के अंतर्गत मराठी गीत रामायण का कार्यक्रम जनवरी तेरह व चौदह जनवरी को डॉ भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन भी राम नाईक ने किया था। महाराष्ट्र के संस्कृति मंत्री विनोद तावडे कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। मराठी गीत रामायण कार्यक्रम का दूसरा आयोजन सोलह सत्रह  जनवरी को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में हुआ था।
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री गिरीश बापट विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए था। गीत रामायण के कार्यक्रमों का आयोजन उत्तर प्रदेश सरकार, महाराष्ट्र सरकार सहित जनपद वाराणसी में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय एवं मराठा समाज वाराणसी, जनपद आगरा में डॉ  भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय एवं महाराष्ट्र समाज आगरा, जनपद मेरठ में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय एवं मराठा समाज मेरठ तथा जनपद लखनऊ में भातखण्डे संगीत संस्थान अभिमत विश्वविद्यालय लखनऊ एवं उत्तर प्रदेश मराठी समाज के सहयोग से किया गया।
गीत रामायण में राम जन्म से लेकर लवकुश का रामायण गान तक सुरों में सजा। इस अनूठी रचना को शब्दों व सुरों से सजाने वाले ख्यात कवि गदि माडगूलकर व लब्ध गायक सुधीर फड़के के पुत्र क्रमश: आनंद माडगूलकर व श्रीधर फड़के ने इसे स्वर दिया। इसमें रामजन्म, दशरथ वरदान, राम विवाह, वन गमन, रावण वध, राज्याभिषेक, लवकुश रामायण गान समेत चौदह गीतों की प्रस्तुति की गई।
कवि गदि माडगूलकर व लब्ध गायक सुधीर फड़के जन्म शती समारोह केपहली बार उन्नीस सौ पचपन में रेडियो पर पहली बार सुनाई दिया था। ख्यात कवि गदि माडगूलकर इसे आकार देते और लब्ध गायक सुधीर फड़के इसे सुरों से सजा देते थे।  राम नाईक ने उन दिनों को याद करते हुए कहा कि उस दौर में सिर्फ आकाशवाणी हुआ करता था। रेडियो पर रविवार को जब इसका प्रसारण होता तो रास्ते थम जाते और लोग घरों में राम दरबार सजाते। इसके अलावा फड़के ने दीव दमन की मुक्ति में भी योगदान दिया था।
 राजभवन के गांधी सभागार में हिंदी गीत रामायण का भव्य आयोजन हुआ। राज्यपाल राम नाईक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विधान सभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित और  महाराष्ट्र सरकार के वित्त एवं वन मंत्री  सुधीर मुनगंटीवार सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का आयोजन उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार के बीच हुये सांस्कृतिक आदान-प्रदान के अनुबंध के अंतर्गत भातखण्डे संगीत संस्थान अभिमत विश्वविद्यालय लखनऊ, उत्तर प्रदेश मराठी समाज एवं महाराष्ट्र समाज लखनऊ के सहयोग से किया गया। इस वर्ष महाराष्ट्र के प्रसिद्ध साहित्यकार स्वर्गीय जी डी माडगुलकर एवं गायक स्वर्गीय सुधीर फड़के, जो गीत रामायण के रचियता हैं का जन्म शताब्दी वर्ष है।
राज्यपाल सहित सभी विशिष्टजनों ने स्वर्गीय जीडी माडगुलकर एवं स्वर्गीय सुधीर फड़के की चित्र पर माल्र्यापण कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में राज्यपाल सहित सभी विशिष्टजनों का सम्मान अंग वस्त्र, स्मृति चिन्ह व पुष्प गुच्छ देकर किया गया।
राज्यपाल ने कहा कि राज्यपाल के नाते प्रोटोकाल  के अंतर्गत मैं सबसे अंत में बोलता हूँ। पर आज मैं प्रोटोकाॅल तोड़ रहा हूँ क्योंकि इस कार्यक्रम का मैं संयोजक भी हूँ। यह प्रसन्नता की बात है कि राजभवन में वर्ष का पहला कार्यक्रम गीत रामायण से शुरू हो रहा है। राज्यपाल ने कहा कि लोकमान्य तिलक के अजर अमर उद्घोष स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा के एक सौ एक  वर्ष पूर्ण होने के कार्यक्रम का आयोजन लोकभवन में हुआ था जिसमें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भी उपस्थित थे।
इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान का अनुबंध हुआ था। नाईक ने उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के रिश्तों को परिभाषित करते हुये कहा कि दोनों प्रदेशों का रिश्ता प्रभु राम चन्द्र के जमाने से है। प्रभु राम का जन्म अयोध्या में हुआ था पर वनवास के समय वे नासिक में रहे। शिवाजी का राज्याभिषेक काशी के विद्धान गागा भट्ट ने किया था। अठारह सौ सत्तावन  के स्वतंत्रता समर में तात्या टोपे, झांसी की रानी आदि का भी महाराष्ट्र से संबंध था। पं0 विष्णु नारायण भातखण्डे महाराष्ट्र से संगीत लेकर उत्तर प्रदेश आये। इसी प्रकार काशी के घाटों का भी महाराष्ट्र से रिश्ता है। उत्तर प्रदेश में महाराष्ट्र के लोग और महाराष्ट्र के लोग उत्तर प्रदेश में पीढ़ियों से सहजता के साथ रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज का कार्यक्रम दोनों प्रदेशों के रिश्तों को और मजबूत करेगा।
राज्यपाल ने कवि श्रेष्ठ  माडगुलकर से अपने पुराने संबंध साझा करते हुये बताया कि महाराष्ट्र में उन्हें लोग आधुनिक वाल्मिीकि के नाम से जानते हैं। मेरा भाग्य है कि स्वर्गीय माडगुलकर मेरे पिता के विद्यार्थी थे और जब मैं पुणे पढ़ाई के लिये गया तो स्वर्गीय माडगुलकर के घर रहकर पढ़ाई की।  माडगुलकर बाद में  विधायक हो गये थे, मैं उन्हें बधाई देने गया तो उन्होंने आशीर्वाद देते हुये कहा कि तुम नामदार मंत्री बने, और उनके आशीर्वाद से उन्नीस सौ नवासी में मैं अटल जी की सरकार में मंत्री भी बना। राज्यपाल ने स्वर्गीय सुधीर फड़के के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुये दोनों महापुरूषों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने विचार रखते हुये कहा कि यह मान्यता नहीं वास्तविकता है कि राम का जिसने साथ दिया वह ओजस्वी बना जैसे हनुमान जी घर-घर पूजे जाते हैं और वाल्मिीकि रामायण लिखकर महाऋषि के नाम से अमर हो गये। राम का विरोध करने वाले मारीच का जीवन बोझ बन गया। विदेशों में भी लोग राम के प्रति आस्था रखते हैं। राम के नाम की ताकत है कि स्वर्गीय ग दि  माडगुलकर एवं स्वर्गीय सुधीर फड़के की जन्म शताब्दी पर गीत रामायण के चार कार्यक्रम वाराणसी, आगरा, मेरठ और राजभवन लखनऊ में आयोजित किये गये।
उन्होंने कहा कि राजभवन में गीत रामायण वास्तव में महात्मा गांधी के प्रति भी श्राद्धाजंलि है। जिन्होंने आधुनिक युग में रामराज्य स्थापित करने का सपना संजोया था। विधान सभा अध्यक्ष श्री हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र का संबंध बहुत गाढ़ा है। जैसे उत्तर प्रदेश ‘राम कथा’ के वाचन की भूमि है उसी प्रकार ‘गीत रामायण’ महाराष्ट्र में बहुत लोकप्रिय रहा है। उन्होंने कहा कि जैसे राज्यपाल राम नाईक महाराष्ट्र के हैं और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और हर बार कुछ नया करने का प्रयास करते हैं उसी प्रकार उत्तर प्रदेश के अमिताभ बच्चन महाराष्ट्र गये और महानायक हो गये।
महाराष्ट्र सरकार के वित्त एवं वन मंत्री श्री सुधीर मुनगंटीवार ने स्वर्गीय माडगुलकर और स्वर्गीय सुधीर फड़के को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये कहा कि ‘गीत रामायण’ चिरंजीवी गीत है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच अमर प्रेम है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के रिश्ते ऐसे आयोजनों से और आगे जायेंगे।
‘गीत रामायण’ कार्यक्रम में कलाकारों द्वारा ‘राम प्रभु सुनते हैं गायन’, ‘लीजिये दशरथ पायस दान’, ‘शुक्ल पक्ष नवमी तिथि चैत्र मास की’, ‘नाता नभ के साथ जुड़ गया’, ‘राम जा रहे वह तो सत्पथ’, ‘हे नौका तुम लौट न आना’, ‘माता न तू बैरिनी’, ‘नहीं और दोषी कोई’, ‘तोड़ते सुमन जो’, ‘धन्य मैं शबरी, रघुनन्दन’, ‘सेतु बाँधों रे’, ‘अंगद जा रावण को शीघ्र दो बता’, ‘मुझे प्रभु एकहि वर दीजे’, एवं ‘बच्चों राघव-नगरी जाना’ आदि प्रसंग सुनाकर उपस्थित श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
राज्यपाल ने सभी कलाकारों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में  आनन्द माडगुलकर सहित  आनंद गोडसे एवं राजेन्द्र हसबनीस ने तालवाद्य प्रणव कुलकर्णी ने सिंथेसाइजरप्रसन्न ,बाम ने  हारमोनियम की प्रस्तुति दी। इस प्रकार के आयोजन हमारी राष्ट्रीय एकता को भी उजागर करते है।

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