क्यूसीबीएस टेंडर प्रणाली पर उपभोक्ता परिषद ने उठाया बड़ा सवाल

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  • बिजली कंपनियों व पावर कार्पोरेशन में क्वालिटी कम कॉस्ट बेस सलेक्शन ( क्यूसीबीएस ) के आधार पर बिलिंग सहित आईटी व अन्य कार्यो के करोड़ो के निकाले जा रहे टेंडरो की सरकार कराएगी, जाँच जो भी होगे दोषी उनके खिलाफ उठाया जायेगा कठोर कदम . ऊर्जा मन्त्री
  • ऊर्जामंत्री ने प्रस्ताव पर जारी किये निर्देश

लखनऊ,22 अक्टूबर 2019: बिजली कंपनियों व पावर कार्पोरेशन में क्वालिटी कम कॉस्ट बेस सलेक्शन ( क्यूसीबीएस ) के आधार पर बिलिंग सहित आईटी व अन्य कार्यो के करोड़ो के निकाले जा रहे टेंडरो को लेकर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य ने बड़ा सवाल उठाते हुए आज प्रदेश के ऊर्जा मन्त्री से उनके आवास पर मुलाकात कर एक प्रस्ताव सौंपा और यह मुद्दा उठाया की क्वालिटी कम कॉस्ट बेस सलेक्शन प्रणाली जिसमे मार्क आधारित व्यवस्ता के तहत टेंडर फाइनल होते है। कुछ निजी कंपनिया येन केन प्रकारेण ज्यादा नम्बर हथिया कर उच्च दरों पर टेंडर लेकर बड़ा फायदा कमा रही है जिसकी उचस्तरीय जाँच करना बहुत ही जरूरी है।

जैसा कि बताया गया कि क्वालिटी कम कॉस्ट बेस सलेक्शन (क्यूसीबीएस ) की वयवस्था का प्रचलन भारत में कंसल्टेंट को रखने वाले टेंडरो में किया जाता था लेकिन पॉवरकॉर्पोरशन व विजली कम्पनियो में बिलिंग सहित आईटी व अन्य कार्यो के लिए भी इस प्रणाली को लागु कर दिया गया। जिसके चलते उच्च दरों पर टेंडर फाइनल हो रहे है और जो इस प्रणाली में मनमाने तरीके से 2 पार्ट में टेंडर को विभाजित कर मार्क के आधार पर टेंडर फाइनल किए जाते है। उदाहरण स्वरुप प्रस्तुतिकरण के लिए 25 नम्बर टेक्निकल 15 नम्बर एक्सपीरयंस 60 नम्बर अब लगभग 40 नम्बर अभियंताओ के हाथ में होता है वो जिस भी कंपनी को फेवर करना चाहे आसानी से कर सकते है उससे ज्यादा नम्बर दे देते है वह चाहे एल.1 टेंडर हो या एल.5 उसी की दर पर उसको टेंडर मिल जाता है।

ऊर्जा मन्त्री श्रीकान्त शर्मा ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को यह आश्वासन दिया कि सरकार इस पूरे मामले की जाँच कराएगी और इस मामले में किसी भी स्तर पर भ्रस्टाचार बर्दास्त नहीं किया जायेगा जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कठोर कदम उठाया जायेगा। इसके बाद तुरंत ऊर्जामंत्री ने उपभोक्ता परिषद् के प्रस्ताव पर अध्यक्ष पावर कार्पोरेशन को निर्देश जारी कर दिए ।

इस मामले में उपभोक्ता परिषद ने कहा कि सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पार्दर्शिता कायम रहे इसलिए इंटरव्यू खत्म किया। बिजली कम्पनियो के टेंडर में एक तरह का मार्क आधारित इंटरव्यू शुरू हो गया, जो बहुत ही गंभीर मामला है। कंसल्टेंट कुछ कम्पनियो से साठ गाठ कर क्यूसीबीसी व्यवस्था को लागू कराते है और उच्ची दरों पर निजी कंपनियो को टेंडर दिला रहे है जिसकी उच्चस्तरी जाँच कराया जाना बहुत ही आवश्यक है।जंहा तक सवाल टेंडर में पारदर्शिता और उच्चगुणवक्ता का है तो टेंडर की प्री क्वॉलिफेकशन ऐसी मजबूत बनायीं जाय स्वता रिजल्ट पारदर्शी होगा।

क्वालिटी कम कॉस्ट बेस सलेक्शन क्यूसीबीएस के मामले पर एक बार कोल् इंडिया लिमटेड में मामला काफी उछला उसवक्त सीवीसी की सलाह पर कोल् इंडिया लिमटेड ने कंसल्टेंट टेंडर के अलावा इस वयवस्था पर रोक लगा दी थी ऐसे में पावर कार्पोरेशन में भी जनहित में इस व्यवस्था पर रोक लगवाकर सभी टेंडर जो इस प्रणाली से हुए है उनकी उच्चस्तरी जाँच कराया जाना जनहित में होगा सरकार उपभोक्ता हित में निर्णय लेने का कष्ट करे ।

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