दलित व पिछड़े वर्ग के अभियन्ताओं ने भी कल प्रबन्धन की वीडियों कान्फ्रेन्सिंग का किया गया बहिष्कार और मुख्यमंत्री से उठायी मांग निजीकरण के फैसले पर हो पुनर्विचार।
दलित व पिछड़े वर्ग के अभियन्ता एकजुट निजीकरण का हर स्तर पर करते रहेंगे कड़ा विरोध, आज तीसरे दिन भी पूरे प्रदेश में दलित व पिछड़े वर्ग के कार्मिकों ने काली पट्टी बांधकर जताया अपना विरोध।
लखनऊ, 22 मार्च। उप्र पावर आफिसर्स एसोसिएशन के तत्वाधान में यूपी सरकार की कैबिनेट द्वारा लखनऊ सहित गोरखपुर, वाराणसी, मेरठ व मुरादाबाद का निजीकरण करने हेतु लिये गये फैसले के विरोध में आज तीसरे दिन भी दलित व पिछड़े वर्ग के अभियन्ताओं ने काली पट्टी बांधकर संवैधानिक तरीके से अपने विभागीय नियमित कार्य को निपटाया।
3 बजे फील्ड हास्टल कार्यालय में प्रान्तीय कार्यसमिति की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। चूंकि निजीकरण के विरोध के मुद्दे पर एक संगठन द्वारा कल 23 मार्च को बिजली विभाग की वीडियो कान्फ्रेन्सिंग के बहिष्कार की घोषणा की गयी है, जिसके मद्देनजर एसोसिएशन ने भी इसका समर्थन करते हुए वीडियो कान्फ्रेन्सिंग के बहिष्कार करते हुए अपने सदस्यों के लिये एलर्ट जारी कर दिया है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने एक बार फिर प्रदेश के मा. मुख्यमंत्री महोदय से पूरे मामले में हस्तक्षेप करते हुए निजीकरण के फैसले को वापस करने की मांग उठायी है।
उप्र पावर आफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष केबी राम, कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, अति. महासचिव अनिल कुमार, सचिव आरपी केन, संगठन सचिव, अजय कुमार ट्रांस्को अध्यक्ष महेन्द्र सिंह, सिविल इकाई अध्यक्ष बीना दयाल, संगठन सचिव आदर्श कौशल, राम शब्द, सुनील कुमार, राधेश्याम, धर्मेन्द्र कुमार, पीपी सिंह, आनन्द कनौजिया, एके कनौजिया, प्रेम चन्द्र ने कहा कि जिस प्रकार से पूरे ऊर्जा सेक्टर में असंवैधानिक तरीके से निर्णय लिये जा रहे हैं, उससे आने वाले समय में ऊर्जा सेक्टर में काफी विषम परिस्थिति उत्पन्न होना तय है। जिस प्रकार से 5 जनपदों जिसमें थ्रो रेट काफी सराहनीय है, उस क्षेत्र का निजीकरण का फैसला निश्चित तौर पर निजी घरानों को फायदा पहुंचाने वाला फैसला है।
संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार निजीकरण का निर्णय लेकर दलितों व पिछड़ों को नौकरियों से वंचित कराने के लिये एक बड़ा षडयंत्र है। इसका हर स्तर पर विरोध किया जायेगा।







