ऊर्जा मंत्रालय की घोषणा: 01 अप्रैल से अनिवार्य रूप से लगाना होगा ‘स्मार्ट प्री-पेड’ मीटर

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  • उपभोक्ता परिषद ने उठाये सवाल कहा: ऐसे में उत्तर प्रदेश में लगभग 3500 करोड़ रू0 की लागत से जो विगत् 2 वर्षों में मीटर खरीदने व लगाने की प्रक्रिया चालू है, उसका क्या होगा?
  • भारत सरकार ऊर्जा मंत्रालय की घोषणा के अनुसार 01 अप्रैल, 2019 से हर घर को 24 घण्टे बिजली और बिना कारण बिजली काटने पर बिजली कम्पनियों को देना होगा जुर्माना
  • उपभोक्ता परिषद ने उत्तर प्रदेश में जल्दबाजी में अरबों के मीटर लगाने व खरीदने के औचित्य की पूरी प्रक्रिया की सीएजी आडिट से उच्च स्तरीय जाँच कराने की उठायी माँग

लखनऊ, 26 दिसम्बर 2018: पिछले 24 दिसम्बर उपभोक्ता दिवस के अवसर पर ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा यह घोषणा की गयी है कि 01 अप्रैल, 2019 से पूरे देश में हर घर को 24 घण्टे बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित होगी और साथ ही यह भी व्यवस्था लागू होगी कि बिना कारण बिजली काटने पर विद्युत वितरण कम्पनियों को जुर्माना देना होगा, जिसके लिए कानून में जल्द ही बदलाव हो जायेगा।

और 01 अप्रैल, 2019 से पूरे देश में 3 वर्षों के अन्दर अनिवार्य रूप से सभी विद्युत उपभोक्ताओं के घर में जो मीटर स्थापित हैं वह ‘‘स्मार्ट प्री-पेड’’ ही होंगे। 3 साल की समय सीमा में थोड़ा बहुत रियायत केवल नियामक आयोग दे सकता है वह भी तब, जब बिजली कम्पनियाँ देरी का कारण बतायेंगी।

उपभोक्ता परिषद ने कहा कि अब सवाल यह उठता है कि उत्तर प्रदेश में पिछले 2 वर्षों के अन्दर जो लगभग 50 लाख इलेक्ट्रानिक मीटर खरीदे गये और साथ में लगाने हेतु टेण्डर किया गया, उनका क्या होगा? जो उत्तर प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्र में लगाने के लिए 1 करोड़ प्री-पेड मीटर खरीदने का आदेश जारी हो गया है, उनका क्या होगा? 40 लाख स्मार्ट मीटर लगाये जा रहे हैं, उसमें थोड़ा-बहुत तब्दीली करके उसे ‘‘स्मार्ट प्री-पेड’’ बनाया जा सकता है, वह भी बहुत ही मुश्किल है कि सुचारू रूप से आगे कार्य करे। वहीं बिजली कम्पनियाँ लगभग 40 लाख इलेक्ट्रानिक मीटर खरीदने की योजना में है। कुल मिलाकर यह कहना गलत नहीं होगा कि इस पूरे मीटर लगाने व खरीदने की प्रक्रिया की लागत लगभग रू0 3500 करोड़ के आस-पास होगी, जो अपने आपमें सोचनीय विषय है। प्रदेश की बिजली कम्पनियाँ इस दिशा में क्यों नहीं सोच रही हैं कि जो करोड़ों-अरबों खर्च हो रहा है वह कहीं न कहीं प्रदेश की जनता की जेब से ही जायेगा। जब भारत सरकार सभी परिसर पर 3 साल के अन्दर ‘‘स्मार्ट प्री-पेड’’ अनिवार्य रूप से स्थापित करने की बात कर रहा है फिर ऐसे में वर्तमान में उससे भिन्न मीटर क्यों खरीदे और लगाये जा रहे हैं?

उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पिछले 2 वर्षों में सभी बिजली कम्पनियों में जो अरबों के मीटर खरीदे गये और अभी भी खरीद प्रक्रिया चालू है, इन सबका भारत सरकार द्वारा बनाये जा रहे नये कानून कि 3 साल में सभी घर में ‘‘स्मार्ट प्री-पेड’’ मीटर होंगे, क्या होगा? भारत सरकार से उपभोक्ता परिषद यह भी माँग करती है कि खासतौर पर उत्तर प्रदेश में जो भी मीटर खरीदे गये, उनका क्या औचित्य था, अभी तक कहाँ लगाये गये और एक-एक परिसर पर 1 साल के अन्दर अनेकों बार मीटर बदले जा रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया का सी0ए0जी0 से उच्च स्तरीय जाँच करायी जाये। स्वतः इस बात का खुलासा हो जायेगा कि इतनी बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश में मीटर खरीदने की क्या जल्दबाजी थी?

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि उपभोक्ता परिषद लगातार यह माँग करता चला आ रहा है कि मीटर की गुणवत्ता उच्च स्तर की होनी चाहिए, उसकी भी जाँच होनी चाहिए, लेकिन इस दिशा में कोई भी देखने वाला नहीं है। अब तक का ऊर्जा क्षेत्र का यह इतिहास है कि इतनी बड़ी संख्या में बिजली मीटर की खरीद कभी नहीं की गयी।

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