पद्मश्री से अंलकृत महानुभावों का राजभवन में हुआ सम्मान

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सम्मान समारोह से लोगों को प्रेरणा प्राप्त होती है: राज्यपाल
प्रेरणा स्रोत हैं पद्मश्री सम्मान से अलंकृत महानुभावा: मुख्यमंत्री

लखनऊः 29 मार्च। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक ने आज राजभवन में आयोजित एक समारोह में पद्मश्री सम्मान 2018 से अंलकृत प्रदेश के महानुभावों बाबा योगेन्द्र, श्री मोहन स्वरूप भाटिया, श्री भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी ‘वागीश शास्त्री’, अनवर जलालपुरी (मरणोपरान्त) प्रतिनिधि के रूप में उनके भाई श्री अबुल कलाम जलालपुरी एवं राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार 2018 से सम्मानित बालिका कु. नाजिया को पुष्प गुच्छ, अंग वस्त्र व पुस्तकें प्रदान कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य, डाॅ. दिनेश शर्मा, ग्राम्य विकास राज्यमंत्री डाॅ. महेन्द्र सिंह, महापौर डाॅ. संयुक्ता भाटिया, पूर्व मंत्री एवं उपाध्यक्ष उत्तर प्रदेश बाल विकास परिषद डाॅ. सरजीत सिंह डंग सहित बड़ी संख्या में विशिष्टजन भी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि राज्यपाल द्वारा पद्म सम्मान से सम्मानित महानुभावों का राजभवन में यह तीसरा सम्मान समारोह है। पूर्व में 2016 एवं 2017 के पद्म सम्मान से अलंकृत महानुभावों का सम्मान किया जा चुका है।

राज्यपाल ने सम्मान समारोह में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सम्मान समारोह से लोगों को प्रेरणा प्राप्त होती है जिससे प्रदेश में विकास के बीज अंकुरित होते हैं। पद्म पुरस्कार वितरण कार्यक्रम दिल्ली में होता है मगर अपने प्रदेश में सत्कार का विशेष महत्व है। काम बहुत लोग करते हैं मगर उनको पहचानना और चयनित करना मुश्किल काम होता है। इस वर्ष प्रदेश के तीन महानुभावों को पद्म सम्मान हेतु चयनित किया गया था, किन्तु बाबा योगेन्द्र का नाम त्रुटिवश मध्य प्रदेश से दर्शाया गया था जबकि वे भी उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। पहले तीन महानुभावों का सम्मान होना था लेकिन जानकारी होने के बाद राष्ट्रपति भवन से वार्ता उपरान्त बाबा योगेन्द्र को भी आज सम्मानित करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि चारों महानुभावों ने प्रदेश का नाम रौशन किया है।

श्री नाईक ने अपने भाषण में पद्मश्री से सम्मानित बाबा योगेन्द्र, श्री मोहन स्वरूप भाटिया, श्री भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी, अनवर जलालपुरी (मरणोपरान्त) तथा राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार प्राप्त करने वाली छात्रा कु. नाजिया का विशेष अभिनन्दन करते हुए उनके व्यक्तित्व पर संक्षिप्त प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाबा योगेन्द्र  ने नवोदित कलाकारों को एक मंच देकर समाज के सामने लाने का कार्य किया है। श्री मोहन स्वरूप भाटिया ने ब्रज भाषा के विकास एवं उन्नयन के लिए सार्थक प्रयास किये हैं। श्री भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी ‘वागीश शास्त्री’ ने संस्कृत भाषा की बारिकीयों को समझते हुए उसके व्याकरण को अधिकृत रूप से प्रस्तुत किया है। स्व. अनवर जलालपुरी ने उर्दू भाषा के माध्यम से अनेक धर्मग्रंथों के बारे में समान दृष्टि रखकर सामाजिक सौहार्द बढ़ाने का कार्य किया है। उन्होंने कु. नाजिया के साहस की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि वे परिवार और देश का नाम रौशन करेंगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल का अभिनन्दन करते हुए कहा कि राज्यपाल की रचनात्मक सोच प्रेरणादायी होती है। विधायक, सांसद, मंत्री एवं राज्यपाल रहते हुए उनकी सूची में संसद में राष्ट्रगान एवं राष्ट्रगीत का गाया जाना, मुंबई को उसका असली नाम दिलाना, कारगिल के शहीदों के परिजनों को पेट्रोल पम्प व गैस एजेन्सी देना, कुष्ठ रोगियों को प्रोत्साहन भत्ता प्रदान कराने, उत्तर प्रदेश दिवस का आयोजन, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के 1916 में लखनऊ कांग्रेस में दिये गये उद्घोष के 101 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजन कराने, कुलाधिपति के रूप में राज्य विश्वविद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने तथा दीक्षान्त समारोह का नियमित आयोजन कराना आदि जैसे महत्वपूर्ण कार्य सम्मिलित हैं। मुख्यमंत्री ने पद्म पुरस्कार से अंलकृत महानुभावों को बधाई देते हुए कहा कि वे प्रेरणा स्रोत हैं और युवा पीढ़ी उनसे प्रेरणा प्राप्त करेगी।

ब्रज से आया हूँ:

पद्मश्री श्री मोहन स्वरूप भाटिया ने कहा कि ‘ब्रज से आया हूँ और पद्म सम्मान ब्रज की भाषा और संस्कृति का सम्मान है। ब्रज भाषा विश्व की सबसे मीठी भाषा है।’

जलालपुरी की प्रतिभा का आभास बचपन से जाहिर था

पद्मश्री स्व. अनवर जलालपुरी के प्रतिनिधि एवं उनके भाई श्री अबुल कलाम जलालपुरी ने प्रधानमंत्री का धन्यवाद करते हुए अनवर जलालपुरी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अनवर जलालपुरी की प्रतिभा का आभास बचपन से जाहिर था।

नानाजी में अद्भुत प्रतिभा थी:

पद्मश्री बाबा योगेन्द्र ने नानाजी देशमुख को याद करते हुए कहा कि नानाजी में अद्भुत प्रतिभा थी। उन्होंने कहा कि जीवन भर देश में कलाकारों को खोजता रहा हूँ। सम्मान के बारे में कभी सोचा भी नहीं।

पद्म अलंकरण वास्तव में बाबा विश्वनाथ को मिला है:

पद्मश्री श्री भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी ‘वागीश शास्त्री’ ने कहा कि ‘काशी से आया हूँ। पद्म अलंकरण वास्तव में बाबा विश्वनाथ को मिला है।’ उन्होंने अपनी साहित्यिक यात्रा पर संक्षिप्त प्रकाश डाला तथा अपनी पुस्तकों के बारे में भी जानकारी दी।
इससे पूर्व राज्यपाल की प्रमुख सचिव सुश्री जूथिका पाटणकर ने मंचस्थ अतिथियों का स्वागत पुष्प गुच्छ देकर किया तथा कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन अपर विधिक परामर्शदाता श्री कामेश शुक्ल ने तथा धन्यवाद ज्ञापन विशेष सचिव श्री संजय श्रीवास्तव ने किया।

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