बिल जमा करने को लेकर उपभोक्ता परेशान, कनेक्टिविटी स्लो का रोना

0
412
  • बिजली विभाग सरकार की छवि धूमिल करने पर आमादा
  • उपभोक्ता परिषद ने लगाया आरोप, कहा कि अब विभाग को अपनी गलती मान लेना चाहिए और पुरानी वयवस्था बहाल केर देना चाहिए
लखनऊ, 19 अगस्त 2018: उप्र पावर कार्पोरेशन द्वारा मनमाने तरीके से अपने बिलिंग साफ्टवेयर में यह व्यवस्था करा दी गयी थी कि कोई भी विद्युत उपभोक्ता अपने मीटर की स्वयं रीडिंग लेकर ई सुविधा बिलिंग काउन्टर पर बिल बनवाकर महीने की 15 तरीख या उससे पहले नहीं जमा कर सकता।
उपभोक्ता परिषद का कहना है कि अब जब 15 तरीख तक उसके घर मीटर रीडर नहीं आया तो वह खुद एक जिम्मेदार उपभोक्ता होने के नाते सोचा चलो खुद रीडिंग लेकर बिल जमा कर दे तो उसके पसीने छूट रहे  वर्तमान में पूरे लेसा में बिजली बिल जमा करने को लेकर उपभोक्ता परेशान है कोई देखने वाला नहीं कही लम्बी लम्बी लाइन लग रही कही कनेक्टिविटी स्लो का रोना सायद पावर कारपोरेशन को इस बात का ज्ञान नहीं होगा की उपभोक्ता महीने शुरू होते ही खुद इस लिए रीडिंग लेकर बिल जमा करता था की वह लम्बी लाइन से बच जाय लेकिन उपभोक्तओ को गलत समजा गया जो एक कमर्सियल विभाग के लिए उचित नहीं था पावर कारपोरेशन की इस नयी वयवस्था से उसकी उदासीनता व उपभोक्ता विरोधी नीति का खुलासा हो गया, अब विभाग को अपनी गलती मान लेना चाहिए और पुरानी वयवस्था बहाल कर देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पुरानी व्यवस्था बिजली विभाग में वर्ष 2000 से चली आ रही है। आयोग द्वारा उपभोक्ताओं को एडवांस बिल जमा करने का अधिकार दिया गया है, फिर इस प्रकार की कार्यवाही से उप्र सरकार की छवि धूमिल क्यों किया गया ?
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि केवल राजधानी लखनऊ में एचसीएल बिलिंग सिस्टम पर 7 लाख विद्युत उपभोक्ताओं में से लगभग  3 लाख विद्युत उपभोक्ता अपनी मीटर रीडिंग लेकर स्वयं बिल जमा करवाते थे उन्हे महज परेशान करने के लिए यह ड्रामा किया गया।
अब जब 15 तरीख के बाद उपभोक्तओ को खुद रीडिंग लेकर बिल जमा कराने कि सुविधा दी गयी तो लम्बी लाइन से परेशान हो रहा  सरकार को इस व्यवस्था को लागु कराने वाले उच्चाधिकारियो के खिलाफ कठोर कदम उठाना चाहिए। बिजली विभाग के अधिकारियों का अगर यह तर्क है कि उपभोक्ता रीडिंग स्टोर कर लेते हैं अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि मैं यह पूछना चाहता हूॅ कि उनके पास क्या आंकड़ा है कि 3 लाख उपभोक्ताओं में कितने उपभोक्ताओं ने अपनी रीडिंग छुपायी। अपनी अक्षमता का खामियाजा विद्युत उपभोक्ताओं पर डालना पूरी तरीके से गलत है।
Please follow and like us:
Pin Share

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here