केन्द्र सरकार पदोन्नति बिल पास कराने की दिशा में कर रही है कार्यवाही: राजनाथ सिंह

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लोकसभा में लम्बित 117वां पदोन्नति बिल पास कराने को लेकर आरक्षण समर्थकों ने की गृहमंत्री से मुलाकात और अविलम्ब बिल पास कराने की उठायी मांग
लखनऊ, 28 अप्रैल। लोकसभा में पिछले 4 सालों से अधिक समय से लम्बित 117वां पदोन्नति में आरक्षण संवैधानिक संशोधन बिल को अविलम्ब पास कराने को लेकर आज आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति, उप्र के प्रमुख संयोजक अवधेश कुमार वर्मा के नेतृत्व में 6 सदस्यीय प्रतिनिधि मण्डल केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से लखनऊ स्थित उनके आवास पर सुबह लगभग 10.30 बजे मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा और अविलम्ब पदोन्नति में आरक्षण बिल लोकसभा से पास कराने की मांग की। गौरतलब है कि कल ही आरक्षण विरोधी एक संगठन द्वारा लम्बित पदोन्नति बिल को निरस्त कराने के लिये गृहमंत्री से मुलाकात की गयी, जिसके बाद पूरे देश के आरक्षण समर्थक उद्वेलित हो गये थे और आज उनके शीर्ष प्रतिनिधि संगठन के नेताओं द्वारा गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की गयी। मा गृहमंत्री ने ज्ञापन लेने के बाद संघर्ष समिति संयोजकों को यह आश्वस्त किया कि केन्द्र की भाजपा सरकार लम्बित पदोन्नति बिल को पास कराने की दिशा में कार्यवाही कर रही है।
मा. राजनाथ सिंह से मिलने वाले आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा, आरपी केन, अजय कुमार, अन्जनी कुमार, बनी सिंह, सुनील कनौजिया ने कहा कि आज मा. गृहमंत्री जी को सौंपे गये ज्ञापन में देश के 35 करोड़ दलित समाज की ओर से यह मांग की गयी कि लोकसभा की 30 सदस्यीय संसदीय कमेटी द्वारा पदोन्नति में आरक्षण बिल को अविलम्ब पारित करने की प्रबल संस्तुति की गयी। उसी क्रम में केन्द्र की मोदी सरकार के मंत्रिमण्डल समूह द्वारा भी पदोन्नति बिल को पारित कराने के लिये विगत दिनों सहमति व्यक्त की गयी, उसके बावजूद भी भाजपा सरकार द्वारा पदोन्नति बिल पास न करने से करोड़ों दलित समाज में काफी गुस्सा और निराशा है। संघर्ष समिति ने पिछली सरकार में लाखों दलित कार्मिकों के रिवर्शन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वर्तमान में पदोन्नति बिल लम्बित होने की वजह से दलित कार्मिक हाशिये पर है और उनका लगातार उत्पीड़न हो रहा है।
संघर्ष समिति ने अपने ज्ञापन में यह मुद्दा भी उठाया कि केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा एक तरफ देश के सर्वोच्च पद पर  राष्ट्रपति दलित समाज से निर्वाचित कराया गया और उसकी वाहवाही ली जा रही है। वहीं दूसरी ओर पदोन्नति बिल पर केन्द्र की चुप्पी से पूरे देश के दलित समाज में इस बात पर बहस हो रही है कि यदि मोदी सरकार दलितों की सच्ची हितैषी है तो पदोन्नति में आरक्षण बिल जैसे संवेदनशील मुद्दे को क्यों नहीं अब लोकसभा से पारित कराकर कठोर कानून बनाया गया। संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा कि पदोन्नति बिल लम्बित होने की वजह से उप्र की तरह विगत दिनों कर्नाटक में भी 20 हजार कार्मिकों को किया गया रिवर्ट, जो दलित कार्मिकों के साथ बड़ा अन्याय।

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