- ‘दलित कार्मिक चलो जनप्रतिनिधियों के द्वार और मांगो अपना अधिकार‘
- उप्र के बाद कर्नाटक में दलित कार्मिकों के रिवर्शन पर संघर्ष समिति ने कहा क्या मोदी सरकार देश के सभी राज्यों के दलित कार्मिकों को कराना चाहती है रिवर्ट जिससे हो उनका अपमान।
- पूरे देश के दलित कार्मिकों को एक मंच पर लाने के लिये रणनीति को दिया गया अन्तिम रूप
लखनऊ, 29 अप्रैल। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति, उप्र प्रान्तीय कार्यसमिति की आज एक आवश्यक बैठक सम्पन्न हुई, जिसमें सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि पदोन्नति में आरक्षण 117वां बिल पास कराने के लिये आरक्षण समर्थक कार्मिक सभी दलों के वरिष्ठ नेताओं व जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर विगत 4 वर्षों से अधिक समय से लोकसभा में लम्बित पदोन्नति बिल के कारण पूरे देश में हो रहे दलित कार्मिकों के उत्पीड़न से अवगत करायेंगे और साथ ही पदोन्नति बिल पास कराने को लेकर सहयोग मांगेंगे। संघर्ष समिति ने इस अभियान का नाम ‘‘दलित कार्मिक चलो जनप्रतिनिधियों के द्वार और मांगो अपना अधिकार‘‘ दिया है।
जिस प्रकार से प्रदेश के ज्यादातर सभी सरकारी विभागों में उच्च पदों पर दलित कार्मिकों का प्रतिनिधित्व लगभग नगण्य हो गया है। उस पर उप्र सरकार चिन्तित नहीं है, जो आजादी के बाद दलित उत्पीड़न की दासता को ताजा कर रहा है। केन्द्र व उप्र की सरकार विभागों की स्थिति पर सर्वे करा ले तो स्वतः खुलासा हो जायेगा कि समूह-क के पद पर दलित कार्मिक पूरी तरह गायब हो गये हैं। संघर्ष समिति ने पूरे देश के दलित कार्मिकों को एक मंच पर लाने के लिये एक रणनीति को अन्तिम रूप दिया गया है, जिसके तहत संघर्ष समिति जल्द ही कर्नाटक भी भेजेगी एक टीम।
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के संयोजकों में अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, डा. रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, श्याम लाल, अन्जनी कुमार, रीना रजक, बनी सिंह, महेन्द्र सिंह, दिग्विजय सिंह, राधेश्याम, प्रेम चन्द्र, पीपी सिंह, जितेन्द्र कुमार, श्री निवास राव, राजेश पासवान, रेनू, राधा किशन राव, सुनील कनौजिया ने कहा कि जिस प्रकार से पिछले लगभग 4 वर्षों से पूरे देश के दलित कार्मिकों का सबसे अहम मुद्दा पदोन्नति में आरक्षण पर केन्द्र की मोदी सरकार चुपचाप तमाशा देख रही है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि दलित कार्मिकों की समस्या पर सरकार केवल बयान बाजी कर रही है। पहले उप्र में लगभग 2 लाख दलित कार्मिकों को रिवर्ट किया गया और कर्नाटक में लगभग 20 हजार कार्मिकों को रिवर्ट किया गया। इससे ऐसा लग रहा है कि केन्द्र की मोदी सरकार सभी राज्यों में दलित कार्मिकों को रिवर्ट कराकर उनका अपमान कराने पर आमादा है। ऐसे में अब समय आ गया है कि पूरे देश में दलित कार्मिकों को एक साथ एक मंच पर आकर अपनी एकजुटता का परिचय देना होगा।







