- आरक्षण समर्थकों ने कहा कि इस ताजा आदेश के बाद उप्र में रिवर्ट 2 लाख दलित कार्मिकों के पूर्व पद पर बहाली का रास्ता साफ उप्र सरकार अविलम्ब उठाये कदम
- आरक्षण समर्थकों ने पुनः अपनी मांग दोहरायी केन्द्र की मोदी सरकार पास करे पदोन्नति में आरक्षण बिल और उसे 9वीं सूची में डालकर बनाये बाध्यकारी
- आरक्षण समर्थकों का ऐलान 28 सितम्बर को पदोन्नति में आरक्षण बिल पास कराने को लेकर आरक्षण समर्थक दिखायेंगे ताकत
लखनऊ, 26 सितम्बर 2018: सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए ‘पदोन्नति में आरक्षण के लाभ’ के मुद्दे पर आज आरक्षण समर्थकों में ख़ुशी की लहर है। उन्होंने कहा कि यह हमारी ऐतिहासिक जीत है।
उन्होंने कहा कि पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर मा सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ द्वारा सुनाये गये आज अपने ऐतिहासिक फैसले में जहां पदोन्नति में आरक्षण दिये जाने के मुद्दे को राज्य सरकारों पर छोड़ते हुए एम नागराज केस में पूर्व में लगाये गये राइडर क्वान्टीफेबिल डाटा व बैकवर्डनेस को इन्दिरा साहनी केस में दिये गये फैसले के आधार पर निष्प्रभावी कर दिया गया। उससे अब पूरे प्रदेश के 8 लाख आरक्षण समर्थक कार्मिकों में फौरी तौर पर खुशी का माहौल है।
वहीं दूसरी ओर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र ने आज अपनी आपात बैठक में पुनः यह मांग दोहरायी कि सही मायने में पदोन्नति में आरक्षण व परिणामी ज्येष्ठता का लाभ पूरे देश के दलित कार्मिकों को तभी मिल पायेगा, जब लोकसभा में लम्बित पदोन्नति में आरक्षण संवैधानिक संशोधन 117वां बिल पास कराकर उसे संविधान की 9वीं सुची में डालकर राज्यों को अनिवार्य रूप से लागू करने के लिये बाध्यकारी बनाया जाये।
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने पुनः अपने सभी समर्थकों को दिनांक 28 सितम्बर को होने वाले पैदल मार्च/परिक्रमा में ज्यादा से ज्यादा संख्या में भाग लेने की अपील करते हुए यह आहवान किया कि जब तक केन्द्र की मोदी सरकार पर व्यापक दबाव नहीं बनता तब तक सरकार पदोन्नति में आरक्षण बिल पास करने वाली है और नहीं आज मा. सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश को लागू करने वाली ही है?
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र के संयोजक अवधेश कुमार वर्मा ने संयोजक मण्डल को शपथ दिलाते हुए कहा कि आज ही के दिन बाबा साहब ने जातिवाद/सामाजिक भेदभाव व मानवीय मूल्यों की रक्षा करने के लिये संकल्प लिया था। इसलिये हम सभी आरक्षण समर्थकों का नैतिक कर्तव्य है कि बाबा साहब द्वारा दी गयी आरक्षण रूपी संवैधानिक व्यवस्था को बचाने के लिये हर कुर्बानी देने के लिये तैयार रहें।
आरक्षण बचाओं संघर्ष समिति के संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, डा रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, श्याम लाल, एसपी सिंह, अन्जनी कुमार, विनोद आर्या, राकेश पुष्कर, लेखराम, राधेश्याम, दिनेश कुमार, अजय चौधरी , प्रेम चन्द्र, अशोक सोनकर, सुशील कुमार, योगेन्द्र, जितेन्द्र कुमार, श्रीनिवास, सुनील कनौजिया ने कहा कि आज मा सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश के बाद अब यह सिद्ध हो गया है कि मा सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में राजेश कुमार बनाम पावर कार्पोरेशन के मामले में एम नागराज केस में राइडर के आधार पर उप्र में आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा- 3(7) को अल्ट्रावायलट घोषित किया गया था। आज मा सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश में एम नागराज केस के राइडर को समाप्त कर दिया गया है, जो पूर्व में रिवर्शन के आधार पर एक ताजा संवैधानिक आदेश है। जिससे अब उप्र में रिवर्ट 2 लाख दलित कार्मिकों के 15-11-1997 से पूर्व पदों पर बहाली का रास्ता साफ हो गया है। अब उप्र की सरकार को अविलम्ब कदम उठाते हुए दलित कार्मिकों के साथ न्याय करना चाहिए।






