लखनऊ, 01 जुलाई। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति, उप्र संयोजक मण्डल की आज एक खास बैठक सम्पन्न हुई जिसमें लोकसभा में लम्बित पदोन्नति आरक्षण सम्बन्धी 117वां बिल पास कराने को लेकर कार्य योजना बनायी गयी।
समिति ने कहा कि आगामी 18 जुलाई से चलने वाले संसद के मानसून सत्र में पदोन्नति बिल पास कराने के लिये राजैनैतिक पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं लगभग 137 राज्यसभा व लोकसभा के दलित सांसदों से सहयोग मांगने के लिये संघर्ष समिति के नेताओं ने अलग-अलग 3 सदस्यीय लगभग 12 टीमों का गठन किया है जो इन सांसदों से पत्राचार, मोबाइल, वाट्सप व व्यक्तिगत रूप से सम्पर्क में रहकर मानसून सत्र में पदोन्नति बिल पास कराने के लिये पूरी ताकत लगाने हेतु सतत सहयोग मांगेगे।
वहीं दूसरी ओर आरक्षण समर्थक कार्मिको ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर हमला बोलते हुये कहा कि भारत सरकार द्वारा पदोन्नति में आरक्षण दिये जाने के आदेश 15 जून को जारी किये जाने के बाद भी उत्तर प्रदेश की सरकार चुपचाप तमाशा देख रही है और सामान्य वर्ग के कार्मिकों से सभी खाली पद भरने के लिये लगातार सभी विभागों में डीपीसी करायी जा रही है, जो उत्तर प्रदेश सरकार की आरक्षण विरोधी नीति का खुलासा करती है।
इस मौके पर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र के संयोजकों सर्वश्री अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, डा रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, अजय कुमार, श्याम लाल, प्रेम चन्द्र, अशोक सोनकर, बनी सिंह, राकेश पुष्कर, योगेन्द्र रावत ने एक सयुंक्त बयान में कहा कि उप्र में आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा-3(7) को उत्तर प्रदेश की सरकार को 15-11-97 से बहाल कर दलित कार्मिकों को उनका हक देना चाहिये, लेकिन जिस प्रकार से सरकार में बैठे कुछ आरक्षण विरोधी उच्चाधिकारी यह नहीं चाहते कि दलित कार्मिकों को उनका हक मिले इसलिये वह केन्द्र सरकार के आदेश को घुमा रहे है।
उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से 15 दिन बीत जाने के बाद भी कोई अधिकृत बयान सामने नहीं आया, जिससे यह सिद्ध होता है कि उत्तर प्रदेश की सरकार आरक्षण विरोधियों के साथ साठ-गाॅठ कर प्रदेश के 8 लाख आरक्षण समर्थकों कार्मिकों का अपमान करा रही है।






