- संघर्ष समिति की जागरूकता काम आयी 85 बनाम 15 की लड़ाई हुई तेज
- दलित पिछड़ा भाई-भाई आरक्षण की मिलकर करो लड़ाई का नारा होगा बुलन्द
लखनऊ, 05 सितम्बर 2018: आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र की प्रान्तीय कार्य समिति ने कहा कि आज एससी/एसटी एक्ट व आरक्षण के खिलाफ सवर्ण समाज के कुछ संगठनों द्वारा भारत बंद पूरी तरह सफल नहीं रहा, जब अधिकांश शहरों के प्रदर्शन की तस्वीरें सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आयीं। जिसमें कुछ गिने चुने लोग कहीं ट्रेन रोक रहे थे, कहीं रास्ता जाम करने का प्रयास कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि संवैधानिक व्यवस्था का विरोध जिस प्रकार से किया गया और पिछड़े वर्ग के लोगों ने इस बंद से पूरी तरह से किनारा कर लिया। उससे आने वाले समय में दलित-पिछड़ा भाई-भाई का नारा और बुलन्द होगा और भविष्य में 85 बनाम 15 की लड़ाई जोर पकड़ेगी। समिति ने कहा कि एससी/एसटी एक्ट में कोई भी बदलाव देश का आरक्षण समर्थक नहीं करेगा बर्दाश्त हर कुर्बानी देने को तैयार।
वहीं दूसरी ओर पदोन्नति में आरक्षण बिल पास कराने व पिछड़े वर्ग के कार्मिकों को पदोन्नति में आरक्षण की बहाली को लेकर संघर्ष समिति ने अपने चलाये जा रहे कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए जन जागरण अभियान को और तेज करने का ऐलान किया।
आरक्षण बचाओं संघर्ष समिति के संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, डा. रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, श्याम लाल, अन्जनी कुमार, प्रेम चन्द्र, अशोक सोनकर, दिनेश कुमार, अजय चौधरी, अशोक कुमार चौधरी, सुशील कुमार, प्रदीप कुमार, राजेश पासवान, सुनील कनौजिया ने कहा देश में यह दुर्भाग्य की बात है कि संवैधानिक व्यवस्थाओ के खिलाफ जिस प्रकार से धरना प्रदर्शन और विरोध हो रहा है, उससे आने वाले समय में लोकतंत्र के लिये घातक सिद्ध होगा। ऐसे में केन्द्र की मोदी सरकार को संवैधानिक व्यवस्था का विरोध करने वाले किसी भी संगठन के खिलाफ कठोर कदम उठाना चाहिए। कभी संविधान की प्रतियां जलायी जाती हैं, कभी बाबा साहब की मूर्तियां तोड़ी जाती है, कभी आरक्षण पर कुठाराघात किया जाता है और दूसरी ओर सरकारें तमाशा देखती रहती हैं, जिससे संवैधानिक व्यवस्था का विरोध करने वालों का मनोबल बढ़ता है और समाज में टकराव की स्थिति उत्पन्न होती है।






