भारत में सामाजिक समरसता का बोध सदैव रहा है। यही कारण है कि यहां से सम्पूर्ण मानवता के सुखी होने की कामना की गई। गौतम बुद्ध ने भी अपनी शिक्षाओं में समरसता के साथ ही सम्यक सुख व आचरण का सन्देश दिया। वह प्रत्येक जीव के प्रति अहिंसा का भाव रखते थे।
राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल ने एक कार्यक्रम में कहा कि महात्मा बुद्ध जी का दर्शन सिर्फ आध्यात्म पर आधारित था। इसमें इहलोक की समस्याओं के निवारण के भी उल्लेख किया गया। अर्थात कष्ट के कारण व निवारण के सम्यक विचार किया गया। सुख से उनका अभिप्राय केवल भौतिक संसाधनों की उपलब्धता से नहीं था।
इस संबन्ध में उन्होंने अपरिग्रह का सन्देश दिया। इसमें भी सामाजिक दायित्व का बोध समाहित था। राज्यपाल ने सांसद संघमित्रा मौर्य और दीपक द्वारा लिखित पुस्तक बुद्धिज्म की बातें का विमोचन किया।
- डॉ दिलीप अग्निहोत्री






