- उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने प्रदेश के ऊर्जा मंत्री से की मुलाकात और एमओयू रूट के उत्पादन गृहों की मॅहगी दरों की समीक्षा की उठायी माॅग
- उपभोक्ता परिषद ने कहा प्रदेश में जहाॅ कुल बिजली खरीद पर खर्च हो रहा लगभग रू0 59466 करोड़ उसमें निजी घरानों व ज्वाइंट बेन्चर से केवल 30555 करोड़ की खरीदी जा रही बिजली
लखनऊ, 29 नवंबर 2018: प्रदेश में निजी घरानों से मॅहगी बिजली खरीद के मामले को लेकर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने आज शक्ति भवन में प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा से मिलकर यह मुद्दा उठाया कि प्रदेश में एमओयू रूट के अन्तर्गत लगे सभी निजी घरानों के उत्पादन गृहों की मॅहगी दरों की समीक्षा कराई जाय, और उन पर एक न्यूनतम दर की सीलिंग लगायी जाय, उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से वर्तमान में ओपेन बाजार/पावर एक्सचेन्ज पर सस्ती बिजली उपलब्ध है, ऐसे में निजी घरानों से मॅहगी बिजली खरीदने से लगातार बिजली दरें बढ़ रहीं है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि नियामक आयोग द्वारा मल्टीवर्ष टैरिफ में वर्ष 2018-19 के लिये खरीदी जाने वाली कुल बिजली जो अनुमोदित की गयी है,की बात करें तो वह लगभग 148145 मिलियन यूनिट है और उसकी कुल लागत रू0 59466 करोड़ है, जिसकी कुल औसत लागत रू0 4.01 प्रति यूनिट है, जिसमें निजी घरानों व ज्वाइंट बेन्चर से खरीदी जाने कुल बिजली 71279 मिलियन यूनिट है और उसकी कुल लागत 30555 करोड़ है और उसकी औसत खरीद लागत रू0 4.29 प्रति यूनिट है। वहीं प्रदेश के उत्पादन गृहों से जो बिजली खरीद अनुमानित है वह लगभग 31689 मिलियन यूनिट है, और उसकी लागत 12597 करोड़ है और औसत लागत रू0 3.98 प्रति यूनिट है, जो यह सिद्ध करता है कि निजी घरानों की मॅहगी बिजली खरीद पर अंकुश लगा दिया जाय तो निश्चित तौर पर बड़ा फायदा होगा और बिजली दरों में कमी भी होगी।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने ऊर्जा मंत्री के सामने यह भी मुद्दा उठाया कि प्रदेश में कुछ हाई प्रोफाइल निजी घराने अपने एमओयू रूट के वर्तमान में स्थापित उत्पादन गृह की क्षमता बढ़वाने के भी फिराक में है, जो पूरी तरह उपभोक्ता हित में नहीं है। इसलिये जनहित में निजी घरानों की मॅहगी बिजली खरीद पर अंकुश लगाना अति आवश्यक है।
प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को यह आश्वासन दिया कि प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के दिशा में सरकार हर प्रयास कर रही है, किसी भी स्तर पर मॅहगी बिजली खरीद को बढ़ावा नहीं दिया जायेगा, पिछली सरकारों में एमओयू रूट के जो मॅहगे प्रोजेक्ट लगे है और उनकी वजह से उपभोक्ताओं पर भार पड़ रहा है उस पर विभाग गम्भीर है और हर सस्ती बिजली खरीद का उपाय सतत ढूढ़ रहा है जिससे सभी को अच्छी बिजली और सस्ती बिजली उपलब्ध हो सके।







