- नियामक आयोग द्वारा 9 वर्ष पूर्व बनाये गये कानून के बाद भी 5 किलोवाट तक के घरेलू उपभोक्ताओं के परिसर के आंशिक भाग वाणिज्यिक गतिविधि में विधा चेन्ज मानकर बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज किये जाने के मामले पर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री का कड़ा निर्देश
- प्रदेश के ऊर्जा मंत्री का निदेशक वाणिज्य पावर कार्पोरेशन को सख्त निर्देश आयोग आदेश का बिजलेन्स विंग या कार्पोेरेशन के किसी भी अभियन्ता ने किया उल्लंघन तो उनके खिलाफ होगी कठोर कार्यवाही
लखनऊ, 03 अक्टूबर 2018: विद्युत अधिनियम 2003 की धारा-135(1)ई के तहत विधा चेन्ज में 5 किलोवाट तक के घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं के ऊपर प्रदेश की कम्पनियों में कुछ अभियन्ताओं व बिजलेन्स विंग द्वारा मीटर सिस्टम दुरूस्त होने के बाद भी बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज कर बिजली चोरी का असेसमेन्ट किया जाता है, जबकि कानूनन उन पर धारा-126 के तहत केस बनता है।
जिसको लेकर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने आज प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा से शक्ति भवन में मुलाकात कर चर्चा की और उनके समक्ष पूरा मामला पेश किया।
गौरतलब है कि विद्युत अधिनियम 2003 में जब संशोधन हुआ उसके बाद विधा चेन्ज को बिजली चोरी मान लिया गया, जिसको लेकर उपभोक्ता परिषद ने लम्बी लड़ाई लड़ी और अन्ततः नियामक आयोग द्वारा पूरा मामला भारत सरकार को भेजा गया। तत्पश्चात् वर्ष 2009 में विद्युत वितरण संहिता 2005 में संशोधन करते हुए नियामक आयोग द्वारा यह कानून बनाया गया कि यदि कोई भी घरेलू उपभोक्ता जो 5 किलोवाट तक की परिधि में आता है और उसका मीटर व मीटरिंग सिस्टम पूरी तरह दुरूस्त है और वह अपने परिसर के आंशिक भाग में कोई दुकान या वाणिज्यिक उपभोग कर रहा है तो उस पर बिजली चोरी का मामला न दर्ज करके उस पर विद्युत अधिनियम 2003 की धारा-126 के तहत असेसमेन्ट की कार्यवाही की जायेगी। लेकिन वहीं दूसरी ओर बिजली विभाग के कुछ अभियन्ता व बिजलेन्स विंग के लोग छोटे-छोटे गरीब उपभोक्ताओं का उत्पीड़न करने के लिये उन पर बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज कराया जाता है जो पूरी तरह गलत है।
ऊर्जा मंत्री ने मामले को लिया गम्भीरता से:
ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा द्वारा आयोग द्वारा पूर्व में बनाये गये कानून को देखने के बाद उसी क्षण पावर कार्पोरेशन के निदेशक वाणिज्य को यह निर्देश दिये गये कि इस पूरे मामले को गम्भीरता से लेते हुए यह सुनिश्चित किया जाये कि 5 किलोवाट तक के किसी भी घरेलू विद्युत उपभोक्ता को ऐसे मामलों में अनावश्यक परेशान न किया जाये और आयोग द्वारा बनाये गये कानून के तहत कार्यवाही सुनिश्चित करायी जाये। चाहे वह कार्पोरेशन के अभियन्ताओं के स्तर पर कोई मामला हो या कार्पोरेशन की बिजलेन्स विंग का मामला हो, कहीं भी आयोग आदेश का उल्लंघन हुआ तो ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कठोर कदम उठाया जायेगा और किसी भी सूरत में उन्हें बख्शा नहीं जायेगा।






