आयोग ने लिया ऐतिहासिक फैसला: बिजली दरों में बढ़ोत्तरी पर नहीं घटोत्तरी पर होगी अब चर्चा
लखनऊ, 29 सितम्बर 2018: उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम की उत्पादन लागत में 54 पैसे प्रति यूनिट की कमी के चलते लगभग 1700 करोड़ रू. के फायदे का लाभ जनता को दिलाने हेतु उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा दाखिल याचिका पर सूओ मोटो कार्यवाही के तहत दिनांक 11 सितम्बर को सुनवाई के बाद उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा फैसला सुरक्षित कर लिया गया था। अंततः आयोग द्वारा काफी विस्तृत फैसला सुनाते हुए उपभोक्ता परिषद की याचिका को आयोग द्वारा शुरू की गयी सुओ मोटो टैरिफ याचिका वर्ष 2018-19 व ट्रु-अप वर्ष 2015-16 व एनुअल परफारमेंस रिव्यू याचिका 2016-17 व 2017-18 का पार्ट बना दिया गया है।
अब उपभोक्ता परिषद की याचिका आने वाली बिजली दर याचिका के साथ सुनी जायेगी। आयोग के अध्यक्ष श्री आरपी सिंह व सदस्यगण श्री एसके अग्रवाल व श्री केके शर्मा द्वारा सुनाये गये अपने 6 पन्ने के फैसले में उपभोक्ता परिषद द्वारा उठाये गये समस्त बिन्दुओं पर पावर कार्पोरेशन को जवाब देने का निर्देश भी जारी किया गया हे। आयोग द्वारा सुनाये गये अपने फैसले में यह कहा गया है कि बिजली उत्पादन की लागत में कमी के मामले को बिजली दर याचिका के साथ निर्णीत किया जायेगा, जिससे कोई डुप्लीसिटी न हो। उपभोक्ता परिषद की लड़ाई अंततः रंग लायी। आने वाले समय में अब जब बिजली दरों में बढ़ोत्तरी की बात आयेगी तो स्वतः उपभोक्ता परिषद की इस याचिका में सुनाया गया फैसला पावर कार्पोरेशन के मंसूबे पर पानी फेरेगा और यह कहना गलत नहीं होगा कि आगामी बिजली दरों में बढ़ोत्तरी नहीं घटोत्तरी का रास्ता साफ हो गया है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि आयोग द्वारा सुनाये गये अपने फैसले में उपभोक्ता परिषद द्वारा उठाये गये समस्त दलीलों को सुनाये गये फैसले का पार्ट बनाया गया है। गौरतलब है कि उपभोक्ता परिषद द्वारा यह मामला उठाया गया था कि इस याचिका में जो अंतरिम आदेश आयोग द्वारा दिया गया था उसके आधार पर पावर कारपोरेशन को सभी उत्पादन गृहों से अलग अलग खरीदी गयी वास्तविक विद्युत खरीद का विवरण देना था जो उनके द्वारा नही दिया गया।
कारपोरेशन द्वारा सौंपे गये डाटा में किसी भी उत्पादन कम्पनी की अलग अलग न तो फिक्सड कास्ट दर्शायी गयी है और न ही वैरेबिल कास्ट दर्शायी गयी है केवल बिजली खरीद की दर दर्शाकर मनगढन्त जवाब दिया गया है। उदाहरण के तौर पर उपभोक्ता परिषद ने आयोग को अपने जवाब में सौंपा था जो जारी आयोग आदेश में उल्लिखित किया गया है कि पावर कारपोरेशन द्वारा वर्ष 2018-19 में मई 2018 में अनपरा ए से बिजली खरीद की दर रूपया 2.61 प्रति यूनिट बताया गया है जबकि एसएलडीसी की साइट पर वास्तविक डाटा घोषित किया गया है उसमें अनपरा ए से मई 2018 में रूपया 2.49 प्रति यूनिट में बिजली खरीद बतायी गयी है। इसी प्रकार पावर कारपोरेशन ने अनपरा बी से मई 2018 में रूपया 2.13 प्रति यूनिट में बिजली खरीद बतायी गयी है वहीं एसएलडीसी द्वारा सत्यापित घोषित खरीद दर रूपया 1.89 प्रति यूनिट है।
इसी प्रकार ओबरा बी से पावर कारपोरेशन ने बिजली खरीद की दर मई 2018 में रूपया 2.53 प्रति यूनिट बतायी गयी है जबकि एसएलडीसी द्वारा सत्यापित घोषित खरीद दर मई 2018 में ओबरा बी की रूपया 2.46 प्रति यूनिट है। इसी प्रकार अन्य उत्पादन गृहांे की दरों की भी खरीद दर को बढा कर बताया गया है। उपभोक्ता परिषद ने वर्ष 2016-17 की बिजली खरीद पर पावर कारपोरेशन द्वारा दिये गये उत्पादन गृहीवार दरों पर चर्चा करते हुए उदाहरण के तौर पर कहा कि कारपोरेशन ने बजाज से रूपया 7.30 प्रति यूनिट में बिजली खरीद की बात कही गयी है लेकिन उसका कोई भी ब्रेकअप नही बताया गया है कि फिक्सड कास्ट क्या थी और वैरेबिल कास्ट क्या थी।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने आयोग के सामने यह भी रखा कि जब प्रदेश के ऊर्जा मंत्री जी द्वारा विधान सभा में यह बयान दिया जा चुका है कि वर्ष 2016-17 की अपेक्षा वर्ष 2017-18 में उत्पादन की कास्ट में 31 पैसा प्रति यूनिट की कमी आयी है। फिर पावर कारपोरेशन इसका विस्तृत डिटेल क्यों नही देता है।







