- केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह द्वारा कल दिल्ली में यह ऐलान करने के बाद कि अगले 3 वर्ष में सभी उपभोक्ताओं के मीटर होंगे ‘‘स्मार्ट प्रीपेड‘‘ उप्र में मचा बवाल एक करोड़ प्रीपेड व 40 लाख स्मार्ट मीटर का क्या होगा भविष्य?
- बिना प्रभावी प्लान के मीटर लगाने व खरीदने की प्रक्रिया से भविष्य में उप्र में अरबों खरबों रूपया डूबने के आसार, उपभोक्ता भुगतेंगे खामियाजा।
लखनऊ, 08 जून। उप्र में जहां बिजली कम्पनियां 1 करोड़ प्री पेड मीटर का आर्डर ईईएसएल के माध्यम से फाइनल कर चुकी हैं। 40 लाख स्मार्ट मीटर की प्रक्रिया पूरी होकर उसे उपभोक्ताओं के यहां लगाने के लिये इन्डेक्सिंग की जा रही है। कुल मिलाकर लगभग 3000 करोड़ के मीटर प्रोजेक्ट का क्या होगा? जब वहीं कल भारत सरकार ऊर्जा मंत्रालय द्वारा पूरे देश के मीटर निर्माता कम्पनियों की बैठक बुलायी गयी थी। जिसमें केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह द्वारा यह ऐलान किया गया है कि अगले 3 वर्षों में देश में सभी उपभोक्ताओं के यहां मीटर ‘‘स्मार्ट प्रीपेड‘‘ होंगे और उनके द्वारा यह भी कहा गया है कि ऊर्जा मंत्रालय इस पर भी प्रस्ताव तैयार करे कि एक विशेष तिथि के बाद ‘‘स्मार्ट प्रीपेड‘‘ मीटर अनिवार्य किया जाये।
ऐसे में करोड़ों/अरबों में खरीदे जाने वाले उप्र में स्मार्ट व प्रीपेड मीटर का क्या होगा? उपभोक्ता परिषद का यह कहना है कि बड़ा चौकाने वाला सवाल है कि केन्द्र और उप्र सरकार मीटर लगाने व खरीदने की प्रक्रिया पर पहले कोई प्रभावी योजना क्यों नहीं बनाती कि उपभोक्ता के परिसर पर किस तकनीकी के मीटर लगाये जायेंगे? जहां तक सवाल है उप्र में 40 लाख स्मार्ट मीटर का, उसको स्मार्ट प्रीपेड में कन्वर्ट तो किया जा सकता है। लेकिन जैसा कि भारत सरकार ऊर्जा मंत्रालय ने यह भी कहा है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर आरएफ/जीपीआरएस के साथ मेल खाने वाले हों, ऐसे में 40 लाख स्मार्ट मीटर का भविष्य भी खतरे में है। जहां तक सवाल है ग्रामीण क्षेत्र में लगाने के लिये खरीदे जा रहे 1 करोड़ प्रीपेड मीटर का तो वह किसी भी हालत में ‘‘स्मार्ट प्रीपेड‘‘ नहीं बनाये जा सकते और न ही कन्वर्ट किये जा सकते। ऐसे में यदि भारत सरकार व उप्र सरकार ने पूरी प्रक्रिया पर प्रभावी व उचित योजना न बनायी तो अरबों खरबों रूपये के मीटर भविष्य में बर्बाद हो जायेंगे। जिसका खामियाजा प्रदेश का उपभोक्ता भुगतेगा। ऐसे में सरकार पहले तय करने कौन सा मीटर उपभोक्ताओं के परिसर में लगेगा फिर की जाये खरीद।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि एक तरफ 40 से 50 लाख साधारण इलेक्ट्रानिक मीटर उप्र में अलग लगाने का ठेका कई कम्पनियों को दिया गया है जो लगा रही हैं। भविष्य में जिस प्रकार से बिना प्रभावी योजना के मीटर खरीद व लगाने की प्रक्रिया में हाय तौबा मचा है, यह एक बड़ा स्कैन्डल साबित होना तय है। बिजली कम्पनियां यह भूल गयी हैं, जो मीटर प्रदेश में लग रहे हैं उसकी क्वालिटी क्या है और इन सबके बीच मीटर निर्माता कम्पनियां मालामाल हो रही हैं। उपभोक्ता परिषद लगातार इस संवेदनशील मुद्दे को नियामक आयोग से लेकर पावर कार्पोरेशन के सामने उठा रहा है, लेकिन प्रबन्धन आंख मूंदकर तमाशा देख रहा है। ऊर्जा क्षेत्र के इतिहास में पहली बार बिना प्रभावी योजना के अरबों खरबों के टेण्डर जिस प्रकार जल्दबाजी में किये गये हैं, उसका खामियाजा भविष्य में प्रदेश की जनता को भुगतना ही पड़ेगा।







