बजट में ऊर्जा क्षेत्र को मिली फिर भारी निराशा: उपभोक्ता परिषद

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  • अन्तरिम बजट में पूरे देश में लगभग 143 करोड़ एलईडी बल्ब बांटकर भारी बचत की चर्चा हुई लेकिन पूरे देश में घटिया क्वालिटी के चलते जो 30 से 40 प्रतिशत एलईडी बल्ब खराब हो गये उसका क्या?
  • सौभाग्य योजना में हर घर को बिजली देने मात्र से सतत् नहीं मिटेगा अंधियारा जब तक गरीब परिवारों को सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध कराने के लिये बजट में नहीं किया जायेगा प्राविधान।
लखनऊ, 01 फरवरी 2019: केन्द्रीय अन्तरिम वित्तमंत्री पीयुष गोयल द्वारा आज वर्ष 2019-20 के लिये देश का अन्तरिम बजट लोकसभा में पेश किया गया, जिसमें ऊर्जा क्षेत्र को भारी निराशा हाथ लगी है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष का कहना है कि जहां श्री पीयुष गोयल द्वारा यह बात कही गयी कि पूरे देश में 143 करोड़ एलईडी बल्ब बांटे गये, जिससे गरीब व मध्यम वर्ग के परिवारों को सालाना कुल 50 हजार करोड़ की बिजली बिल में बचत हुई। शायद वह यह भूल गये कि जो एलईडी बल्ब पूरे देश में बांटे गये उनकी क्वालिटी इतनी घटिया थी कि 3 साल गारण्टी की बात दूर 30 से 40 प्रतिशत एलईडी बल्ब बेकार होकर कूड़े में चले गये।
बल्ब बनाने वाले कम्पनियों को तो फायदा हुआ लेकिन आम जनता को नहीं। अब सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि सौभाग्य योजना के तहत लगभग 2 करोड़ 47 लाख घरों को पूरे देश में बिजली दी गयी। लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार को इस बजट में यह भी सोचना चाहिए था कि कनेक्शन देने मात्र से उनके घरों में उजाला नहीं होगा। गरीब परिवारों के घरों में लगातार उजाला तभी सम्भव है जब उनकी बिजली दरें कम हों।
इस बजट में पूरे देश का सौभाग्य योजना के तहत जगमग परिवार इस आस में था कि उनकी बिजली दरों के लिये केन्द्र की मोदी सरकार कोई नयी योजना लाकर उन्हें सस्ती दरों पर बिजली का इन्तजाम करेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उदय स्कीम लागू होने के बाद भी पूरे देश में डिस्कामों के घाटे बढ़ गये। इस योजना के बदलाव पर क्यों नहीं ध्यान दिया गया? सौभाग्य योजना के तहत पूरे देश में कुछ गिनी चुनी कम्पनियों ने घटिया सामग्री लगाकर उपभोक्ताओं को बेवकूफ बनाया उस ओर भी कोई ध्यान नहीं दिया गया।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि एक तरफ बजट में 5 लाख तक की सालाना आय वाले करदाताओं को आयकर में पूरी छूट की घोषणा की जाती है, वहीं दूसरी ओर उसी लोकसभा में गरीब सवर्ण के आरक्षण पर 8 लाख तक की आय वाले को गरीब माना गया। फिर आयकर की सीमा को क्यों नहीं बढ़ाया गया? सबसे बड़ा सवाल किसानों को राहत देने के सवाल का है तो शायद यह सभी सरकारों को पता होगा कि सही मायने में किसानों को राहत तभी होगी जब उनकी बिजली दरों में कमी के इन्तजाम हों, खाद्य सामग्री सस्ती हो, खेती में उपयोग होने वाले उपकरणों में भारी छूट हो, उनके द्वारा पैदा किये गये उत्पाद का उचित मूल्य समय पर सरकारें दें, उनके बच्चों की पढ़ाई के लिये राहत भरी योजना बनायी जाये तब जाकर सही मायने में किसानों की स्थायी रूप से मदद हो पायेगी और देश का अन्नदाता आर्थिक रूप से मजबूत होगा।

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