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- उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने पूरे मसौदे पर की ऊर्जा मंत्री से बात और सौंपा एक ज्ञापन, कहा: वर्ष 2018-19 में टैरिफ प्रस्ताव में प्रस्तावित निजी घरानों की महंगी बिजली खरीद की सरकार कराये उच्च स्तरीय जांच
- ऊर्जा मंत्री ने कहा: महंगी बिजली खरीद की होगी समीक्षा, पावर कार्पोरेशन के चेयरमैन को परीक्षण कर अविलम्ब कार्यवाही का दिया लिखित निर्देश
लखनऊ, 31 जनवरी 2019: विगत दिनों घोषित बिजली दरों में कमी न होने का मुख्य कारण निजी घरानों से मंहगी बिजली खरीद थी, जिस पर अंकुश लगाने के लिये उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आज प्रदेश के ऊर्जा मंत्री से उनके शक्ति भवन स्थित कार्यालय में मिले और एक ज्ञापन सौंपकर विस्तार से चर्चा की।बता दें कि उपभोक्ता परिषद ने विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी टैरिफ के महत्वपूर्ण अंशों के साथ वर्ष 2018-19 के लिये बिजली कम्पनियों द्वारा निजी घरानों से जो बिजली खरीद प्रस्तावित की गयी थी, उसके आंकड़े पेश करते हुए उसकी एक प्रति ऊर्जा मंत्री को सौंपी और यह मुद्दा उठाया कि निजी घरानों की दरें इतना ज्यादा क्यों हैं, क्या बिजली खरीद की सही प्लानिंग नहीं है? थर्मल बैकिंग का मामला है? या फिर बिजली खरीद के करार में कोई खामी है? इन सभी पहलुओं की उच्चस्तरीय जाँच कराकर श्वेत पत्र जारी किया जाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान वर्ष में निश्चित तौर पर बिजली दरों में कमी होती, लेकिन इन्हीं निजी घरानों की मंहगी बिजली खरीद के चलते बिजली दरों में कमी नहीं हो पायी। यदि इस पर अंकुश न लगा तो आने वाले समय में भी प्रदेश की जनता को इसका खामियाजा भुगतना ही पड़ेगा। निम्न निजी घरानों की प्रस्तावित बिजली खरीद स्वतः बहुत कुछ उदाहरण बयां कर रहा है जो अपने आपमें चौकाने वाला है।
वर्ष 2018-19 में प्रस्तावित मंहगी बिजली खरीद के उत्पादन गृह
प्रस्तावित प्रति यूनिट कुल लागत
बजाज (बरखेड़ा) 8.56 प्रति यूनिट 241.84 करोड़
बजाज (खम्भा खेड़ा) 8.01 प्रति यूनिट 210.51 करोड़
बजाज (मकसूदपुर) 7.35 प्रति यूनिट 221.73 करोड़
के0एस0के0 महानन्दी 5.80 प्रति यूनिट 1849.49 करोड़
ललितपुर (बजाज ग्रुप) 7.14 प्रति यूनिट 5195.34 करोड़
एम0बी0 पावर 7.43 प्रति यूनिट 929.83 करोड़
आर0के0एम0 पावर 6.99 प्रति यूनिट 626.34 करोड़
ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा ने कहा कि जिन निजी घरानों से महंगी बिजली की खरीद हो रही है उसकी पूरी समीक्षा कराई जायेगी। उन्होंने उपभोक्ता परिषद द्वारा सौंपे गये ज्ञापन व दस्तावेज पर चेयरमैन पावर कार्पोरेशन को पूरे मामले का परीक्षण कर कार्यवाही का लिखित निर्देश दिया और यह ऐलान किया कि विद्युत उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली देने के लिये सरकार हर उपाय करेगी।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि इन निजी घरानों से प्रस्तावित बिजली खरीद महज एक उदाहरण है। इसी प्रकार सभी निजी घरानों की मंहगी बिजली खरीद की उच्चस्तरीय जाँच होनी चाहिए। इन सभी निजी घरानों की बिजली खरीद के ट्रु-अप वर्ष 2016-17 के आंकड़े भी चौकाने वाले हैं। इस प्रस्तावित बिजली दर में नियामक आयोग द्वारा कटौती भी की गई है लेकिन इसका सही आंकड़ा ट्रु-अप वर्ष 2018-19 में सामने आयेगा, लेकिन इस बात की जाँच होना आवश्यक है कि बिजली कम्पनियों द्वारा किस आधार पर इन निजी घरानों व अन्य निजी घरानों से मंहगी बिजली दर खरीद टैरिफ प्रस्ताव में प्रस्तावित की गयी है और पहले भी की जाती रही है। जब तक इसमें पारदर्शिता कायम नहीं होगी, प्रदेश की जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।