- जिन मीटर कम्पनियों की गुणवत्ता होगी खराब उनके खिलाफ होगी सख्त कार्यवाही: ऊर्जा मंत्री
- भारत सरकार द्वारा घोषित नीति सभी घरों में 3 साल में लगेगे केवल ‘‘स्मार्ट प्री-पेड’’ के बाद भी बिजली कम्पनियों द्वारा लगातार मनमाने तरीके से मीटर खरीदने व बदलने की प्रक्रिया में आया नया मोड़ उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने प्रदेश के ऊर्जा मंत्री से मुलाकात कर उठाया मुद्दा
लखनऊ, 28 दिसम्बर 2018: जहाॅ एक तरफ भारत सरकार ऊर्जा मंत्रालय द्वारा 01 अप्रैल 2019 से सभी घरों में ‘‘स्मार्ट प्री-पेड’’ अगले 03 सालों में लगाने की घोषणा कर दी है, वहीं उत्तर प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा लगातार कभी इलेक्ट्रानिक मीटर बदलने कभी उसे उतारकर स्मार्ट मीटर लगाने और गाॅव में 01 करोड़ प्रीपेड मीटर लगाने की कार्य योजना पर जल्दबाजी में कार्य कर रही है और मीटरों की गुणवत्ता बेहद निम्न स्तर की है, जिस पर कोई देखना वाला नहीं है।
इस पूरे मामले को लेकर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा से शक्ति भवन मुलाकात कर विस्तार से चर्चा की और उन्हें एक ज्ञापन सौपा। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने ऊर्जा मंत्री के सामने यह मुद्दा उठाया कि जब भारत सरकार ने अगले 03 सालों में सभी घरों में ‘‘स्मार्ट प्री-पेड’’ मीटर ही लगाने की घोषणा कर दी है, फिर उत्तर प्रदेश में करोड़ो अरबों मीटर खरीद कर लगाने की जल्दबाजी क्यों की जा रही है। उनहोंने कहा कि पिछले 02 वर्षो के अन्दर लगभग 3500 करोड़ रूपये के मीटर क्रय की प्रक्रिया को अन्जाम दिया गया है, जिसमें अरबों के मीटर आ गये है और कुछ पाइप लाइन में है।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा मंत्री जी आपके निर्देश पर वर्ष 2017 में पावर कारपोरेशन प्रबन्धन द्वारा सभी बिजली कम्पनियों के लिये यह निर्देश किये गये थे कि सभी मीटर आपूर्तिकर्ता कम्पनियों के प्रत्येक लाट से रेमडम सैम्पल लेकर सीपीआरआई लैब में परीक्षण कराया जाय, जिससे मीटरों की उच्च गुणवत्ता का पता चल सके। लेकिन इस पूरे मामले पर बिजली कम्पनियाॅ चुप्पी साथ गयी है, जो गुणवत्ता के साथ बड़ा खिलवाड़ है। प्रदेश की सभी बिजली कम्पनियों को मीटर खरीदने व लगाने पर अनावश्यक करोड़ों खर्च नहीं करना चाहिये भारत सरकार की नीति के तहत वही मीटर खरीदे जाय, जो भारत सरकार द्वारा ‘‘स्मार्ट प्री-पेड’’ लगाने का निर्णय लिया गया है। बिजली कम्पनियाॅ अभी जो जल्दबाजी में मीटर खरीद कर लगा रही है, अन्ततः जब उन्हें उतरना ही है तो यह फिजूल खर्ची क्यों की जा रही है, जबकि मीटर की गारण्टी 5 साल होती है, जो मीटर निर्माता कम्पनियाॅ सौभाग्या व अन्य योजनाओं में मीटर उपभोक्ता के परिसर पर लगा रही है उनकी गुणवत्ता बहुत ही निम्न स्तर की है।
प्रदेश की ऊर्जा मंत्री ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को यह आश्वासन दिया कि सभी बिजली कम्पनियों व पावर कारपोरेशन से मीटर लगाने व खरीदने की पूरी कार्य योजना अविलम्ब तलब की जायेगी और किसी भी स्तर पर जल्दबाजी में मीटर खरीद पर कोई भी उदासीनता बर्दाश्त नहीं होगी, जो मीटर लगाना भारत सरकार की नीतियों के तहत जरूरी होगा उसी योजना पर कार्य होगा। ऊर्जा मंत्री ने कारपोरेशन प्रबन्धन को यह निर्देश दिया कि पूर्व में मीटर निर्माता कम्पनियों की गुणवत्ता हेतु सीपीआरआई लैब में परीक्षण कराकर जो रिपोर्ट माॅगी गयी थी, उसे अविलम्ब प्रस्तुत किया जाय। मीटर की निम्न गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जायेगा, जिन भी मीटर निर्माता कम्पनियों की गुणवत्ता खराब होगी उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही की जायेगी। किसी भी स्तर उदासीनता बर्दाश्त नहीं होगी।







