- प्रदेश की 5 में से 4 बिजली कम्पनियां हांफते हुए ‘‘सी‘‘ ग्रेड में 100 में से 20 नम्बर पर सिमटी और 1 बिजली कम्पनी केस्को ने बी ग्रेड में बनाया स्थान
- गुजरात व उत्तराखण्ड की बिजली कम्पनियां प्रथम स्थान पाकर ‘‘ए प्लस‘‘ श्रेणी में 80 से 100 नम्बर के बीच पहुंची। पश्चिमांचल कम्पनी सी प्लस से नीचे सी ग्रेड में लुढ़की
लखनऊ, 19 जुलाई 2018: ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा देश की 41 सरकारी बिजली कम्पनियों की 6वीं वार्षिक रेटिंग जारी की गयी तो नतीजे बड़े चौकाने वाले निकले। ऊर्जा मंत्रालय ने 41 बिजली कम्पनियों की रेटिंग की जिसमें, प्रदेश की 4 बिजली कम्पनियां पूरी तरह फेल साबित हुयी और एक कम्पनी केस्को ही सिर्फ पास हुयी। इस बीच राज्य उपभोक्ता परिषद ने कहा कि उच्च प्रबन्धन की जवाबदेही तय हो अन्यथा जनता खामियाजा भुगतती रहेगी।
बता दें कि इसमें 100 नम्बर मानकर अलग-अलग ग्रेड दिया गया है। देश की जिस बिजली कम्पनी को 80 से 100 नम्बर मिलेंगे वह ‘‘ए प्लस‘‘ होगी, जिसे 65 से 80 नम्बर मिलेंगे वह ‘‘ए‘‘ ग्रेड में होगी, जिस कम्पनी को 50 से 65 नम्बर मिलेंगे वह ‘‘बी प्लस‘‘ श्रेणी में होगी, जिस कम्पनी को 35 से 50 नम्बर मिलेंगे वह ‘‘बी‘‘ श्रेणी में होगी, वहीं 20 से 35 नम्बर पाने वाली कम्पनियां ‘‘सी प्लस‘‘ में होंगी और सबसे फिसड्डी 0 से 20 नम्बर पाने वाली कम्पनी ‘‘सी‘‘ ग्रेड में होगी। उ0प्र0 की बिजली कम्पनियों का हाल चिन्ता जनक है।
बिजली कम्पनियां ग्रेड नम्बर
कानपुर इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कम्पनी (केस्को) बी 35 से 50
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम सी 0 से 20
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम सी 0 से 20
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम सी 0 से 20
दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम सी 0 से 20
उच्च प्रबन्धन पूरी तरह नाकाम साबित हुआ: अवधेश कुमार वर्मा
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सभी बिजली कम्पनियां पूरी तरह फिसड्डी साबित हुई हैं, 4 बिजली कम्पनियां पश्चिमांचल, मध्यांचल पूर्वांचल, दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को ‘‘सी‘‘ ग्रेड मिला है, जो अन्तिम पायदान पर हैं। वहीं केस्को कम्पनी को ‘‘बी‘‘ मिला है। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम सी प्लस से नीचे सी ग्रेड में आ गया। वहीं केस्को ऊपर उठकर सी प्लस से बी ग्रेड में पहुंच गया। देश में पहले पायदान पर गुजरात व उत्तराखण्ड राज्य की बिजली कम्पनियां हैं जो ‘‘ए प्लस‘‘ श्रेणी में स्थान प्राप्त किया है। भारत सरकार द्वारा ग्रेडिंग का जो प्रमुख मानक है, उसमें एटीसी हानियों के लिये 28 नम्बर रखा गया है, जहां वित्तीय पैरामीटर के लिये 33 नम्बर रखा गया है और इसी प्रकार बिजली खरीद सरकार सपोर्ट अन्य मानकों के लिये भी अलग-अलग नम्बर रखे गये हैं। कुल प्राप्तांक 100 नम्बर का है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि उप्र की बिजली कम्पनियां भारत सरकार द्वारा तय की गयी ग्रेडिंग में पूरी तरह फेल साबित हुई हैं, जिससे यह सिद्ध होता है कि बिजली कम्पनियों व पावर कार्पोरेशन का उच्च प्रबन्धन प्रदेश की कम्पनियों को आगे बढ़ाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि सबसे चौकाने वाला मामला यह है कि देश की 8 कम्पनियों को सबसे ज्यादा खराब ग्रेडिंग मिली है, जिसमें 4 कम्पनियां उप्र की हैं। उप्र का पावर प्रबन्धन जो सुधार के बड़े-बड़े दावे करता है, अब जब उप् की बिजली कम्पनियां पास भी नहीं हो पायी हैं।
उन्होंने कहा कि प्रबन्धन के खिलाफ जवाबदेही तय हो और कठोर कदम उठाये जायें क्योंकि कम्पनियों के फिसड्डी होने का खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ता है। इस वर्ष में बिजली कम्पनियां फेल भले हो गयाी है लेकिन बैठक करने का कीर्तिमान जरूर स्थापित किया है।







