सेल्फ बिल जेनरेशन की आनलाइन सुविधा में उपभोक्ता परिषद ने पकड़ी बड़ी कमी

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  • पावर कार्पोरेशन की अब नयी व्यवस्था विवादों के घेरे में आन लाइन व आफ लाइन उपभोक्ताओं के लिये दोहरा मापदण्ड क्यों?

लखनऊ, 07 अगस्त 2018: पूरे उत्तर प्रदेश में पावर कार्पोरेशन द्वारा नियम विरूद्ध तरीके से माह की 15 तारिख तक विद्युत उपभोक्ताओं द्वारा स्वयं अपनी रीडिंग लेकर बिल जमा करने पर रोक लगाने के बाद अब पावर कार्पोरेशन के अध्यक्ष द्वारा यह कहा जाना कि कोई भी उपभोक्ता सेल्फ बिल जेनरेशन के माध्यम से आन लाइन जमा करना चाहता है तो स्वयं अपनी रीडिंग लेकर जमा कर सकता है।

इस मामले पर उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि भाई सबसे बड़ा सवाल यह है कि संविधान में समानता का अधिकार सभी को है, नियम सबके लिये बराबर है तो फिर आन लाइन या आफ लाइन के लिये अलग-अलग नियम कैसे? उन्होंने कहा कि आज जो खुलासा उपभोक्ता परिषद करने जा रहा है, उससे पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन सोचने पर मजबूर हो जायेगा कि किस प्रकार से सेल्फ बिल जेनरेशन के आन लाइन आपरेशन में बड़ी चालाकी से यह व्यवस्था करा दी गयी है कि उसमें कोई भी उपभोक्ता डिसमिल नहीं दर्ज कर सकता।

उदाहरण के तौर पर यदि किसी भी उपभोक्ताका मीटर 3 किलोवाट का है और उसकी एमडीआई (अधिकतम भार) 1.5 आता है तो वह चाहकर भी 1.5 डिमाण्ड नहीं दे सकता। वह सीधा 1, 2 व 3 किलोवाट ही डिमाण्ड भर सकता है, जबकि उप्र में लागू टैरिफ में भार का फिक्स चार्ज व अधिकतम डिमाण्ड पार्टवाइज है। यानि कि यदि कोई उपभोक्ता स्वीकृत 1 किलोवाट का है और वह 1.18 किलोवाट अधिकतम भार प्रयोग करता है तो उससे केवल 180 वाट का ही अतिरिक्त चार्ज किया जायेगा। इसी प्रकार फिक्स चार्ज में भी अपने स्वीकृत भार से कम भार पर 75 प्रतिशत पर वसूली का प्राविधान है। लेकिन डिसमिल आप्शन न होने की वजह से कोई भी विद्युत उपभोक्ता यदि सेल्फ बिल जेनरेशन में अपने स्वीकृत भार से कम भार उपयोग करता है तो वह चाहकर भी इस सुविधा का लाभ नहीं ले पायेगा और उसका वित्तीय नुकसान होगा।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जब इस मामले पर पावर कार्पोरेशन के बिलिंग साफ्टवेयर के अभियन्ताओं से बात की और शिकायत दर्ज करायी तो उन्होंने स्वीकार किया कि यह गलती हुई है, बहुत जल्द ही इसमें सुधार कर डिसमिल का प्राविधान कर दिया जायेगा। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि पावर कार्पोरेशन पहले नियमों की परिधि में अपना बिलिंग साफ्टवेयर बना ले, फिर समानता के आधार पर कार्यवाही करे। यहां जिस प्रकार से आन लाइन व आफ लाइन में भेद पैदा किया जा रहा है, उससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है।

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