- उपभोक्ता परिसद ने जताया कड़ा ऐतराज: भार को बढाने हेतु बिजली कम्पनियों द्वारा भेजा जा रहा मोबाइल पर भार बढाने का एसएमएस असंवैधानिक
- टैरिफ आदेश व विद्युत वितरण संहिता के प्राविधानानुसार किसी भी घरेलू विद्युत उपभोक्ता के मीटर में एमडीआई 3 माह लगातार अधिक होने पर ही उसे भार बढाने का दिया जायेगाा नोटिस
- उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने पूरे मामले को आयोग अध्यक्ष के सामने रखा
- केवल विद्युत उपभोक्ताओं से जिस माह उनके भार में हुयी है बढोत्तरी उसी बढे भार पर उस माह में उनसे लिया जा सकता है टैरिफ प्राविधानानुसार अतिरिक्त चार्ज
लखनऊ, 18 मई। प्रदेश की बिजली कम्पनियो में घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं के भार के मामले में हमेशा से ही उदासीनता बरती जाती रही है। उसी का नतीजा है कि बडे पैमाने पर विद्युत उपभोक्ताओं द्वारा यह शिकायत की जा रही है कि क्षेत्रीय अभियन्ताओं द्वारा उनके मीटर में किसी माह भी एमडीआई (मैक्सिमम डिमाण्ड) अधिक होने पर उनके भार को बढाने के लिये उन पर दबाव बनाया जाता है। वर्तमान में कुछ विद्युत उपभोक्ताओं को बिजली कम्पनियों द्वारा 1 माह में अधिक एमडीआई पर ही उनके मोबाईल पर एसएमएस के माध्यम से नोटिस दी जा रही है, जो असंवैधानिक है। जब इसकी सच्चाई का पता लगाने के लिये उपभोक्ता परिषद ने छानबीन की तो मामला सही निकला। प्रदेश की बिजली कम्पनियाॅं शायद यह भूल गयी हैं कि विद्युत वितरण संहिता 2005 व वर्ष 2017-18 के टैरिफ में यह व्यवस्था है कि किसी भी विद्युत उपभोक्ता का भार जब तक 3 माह तक लगातार उसके द्वारा लिये गये संयोजित भार से अधिक न हो उसके भार को बढाने के लिये उस पर दबाव नही डाला जायेगा 3 माह बाद उसे नोटिस भेजी जायेगाी उसके उपरान्त ही आगे कार्यवाही होगी। लेकिन विद्युत उपभोक्ता को उस माह जब उसकी एमडीआई में बढा भार रिकार्ड होगा तो उस बढे भार के अनुपात में उसे टैरिफ आदेश के अनुसार उस माह में ही अतिरिक्त चार्ज देना होगा।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि किसी भी विद्युत उपभेाक्ता पर बिजली कम्पनियाॅं 1 माह के अधिक एमडीआई रिकार्ड होने पर उसके भार को बढाने के लिये बाध्य नही कर सकतीं क्योंकि यह गैर कानूनी और टैरिफ प्राविधानों का उलंघन होगा। आज इस पूरे मामले पर उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल से मिलकर उन्हें अवगत करा दिया हैं फिर भी बिजली कम्पनियाॅं यदि घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं के 1 माह की अधिक एमडीआई पर उसके भार को बढाने के लिये बाध्य करेंगी तो उनके खिलाफ विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 142 के तहत टैरिफ आदेश के उलंघन का मामला दाखिल किया जायेगा।
उपभोक्ता परिषद ने कहा कि है क्योंकि उनका भार यदि 1 माह के अंतराल में मनमाने तरीके से बढाया जायेगा तो वह लाइफ लाइन श्रेणी से हटकर सामान्य श्रेणी में आ जायेंगे। जिससे हमेशा के लिये वह अपनी सस्ती बिजली दर से मंहगी बिजली दर में पहुच जायेंगे।







