उत्पादन लागत में 54 पैसा प्रति यूनिट कमी किये जाने के मामले में आयोग 23 को करेगा सुनवाई

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  • आयोग ने पावर कार्पोरेशन अध्यक्ष उत्पादन निगम प्रबन्ध निदेशक सहित सभी बिजली कम्पनियों के प्रबन्ध निदेशकों को 23 अगस्त को सुनवाई हेतु भेजा नोटिस

लखनऊ, 08 अगस्त 2018: प्रदेश के उत्पादन गृहों से पैदा होने वाली बिजली की लागत में 54 पैसा प्रति यूनिट कमी होने के मामले पर अंततः उप्र विद्युत नियामक आयोग ने गम्भीरता से लेते हुए उपभोक्ता परिषद के जनहित प्रत्यावेदन को स्वीकार करते हुए 23 अगस्त को आयोग में सुओ मोटो सुनवाई की तिथि तय की है, जिसके लिये पावर कार्पोरेशन के अध्यक्ष सहित उत्पादन निगम के प्रबन्ध निदेशक सहित सभी बिजली कम्पनियों के प्रबन्ध निदेशकों सहित उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को सुनवाई हेतु नोटिस जारी कर दिया है।

गौरतलब है कि उपभोक्ता परिषद द्वारा 3 अगस्त को नियामक आयोग में अपने जनहित प्रत्यावेदन में यह मुद्दा उठाया था कि इस कमी का लाभ प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की मौजूदा बिजली दरों में कमी करके उपभोक्ताओं पर पास आॅन किया जाये। प्रदेश के उत्पादन गृहों से पैदा होने वाली बिजली की उत्पादन लागत में लगभग 54 पैसे प्रति यूनिट की कमी आयी है, उत्पादन निगम के संलग्नक आंकडों पर ध्यान दें जिसमें वर्ष 2016-17 में प्लाण्ट लोड फैक्टर (पीएलएफ) 68.42 प्रतिशत था, वह अब 2017-18 में 73.32 तथा वर्ष 2018-19 में जून 2018 तक 84.10 प्रतिशत हो गया है।

जहां जनरेशन लागत वर्ष 2016-17 में रू0 3.99 प्रति यूनिट थी वह वर्ष 2017-18 में रू0 3.22 प्रति यूनिट व 2018-19 में रू0 2.72 प्रति यूनिट हो गयी है। इस प्रकार बिल लागत क्रमशः रू0 4.04 प्रति यूनिट, 3.32 प्रति यूनिट और वर्ष 2018-19 में 3.26 प्रति यूनिट हो गयी है। इस प्रकार उत्पादन लागत में लगभग 54 पैसे प्रति यूनिट की कमी आ गयी है। वर्ष 2018-19 के लिये विद्युत नियामक आयोग द्वारा राज्य उत्पादन निगम से जो कुल बिजली खरीदना अनुमानित है, वह लगभग 31 हजार 689 मिलियन यूनिट है। ऐसे में लगभग 1700 करोड़ रू0 बिजली खरीद की लागत में कमी आयेगी। ऐसे में विद्युत अधिनियम 2003 के प्राविधानानुसार इसका लाभ प्रदेश की जनता को बिजली दर में कमी करके दिया जाना चाहिए।

उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आगे कहा कि जहां वर्ष 2016-17 में एक यूनिट बिजली बनाने में लगभग 1.93 एमएल प्रति यूनिट तेल खर्च होता था, अब वहीं वर्ष 2018-19 में जून 2018 तक के आंकड़ों पर ध्यान दें तो मात्र 0.568 एमएल तेल खर्च हो रहा है। इसी प्रकार से एक यूनिट बिजली बनाने में जो पहले 0.73 किग्रा प्रति यूनिट कोयला खर्च होता था, अब वह घटकर वर्ष 2018-19 में जून 2018 तक 0.662 किग्रा प्रति यूनिट हो गया है। इसी प्रकार आक्ज़लरी पावर कन्जम्पशन जो वर्ष 2016-17 में 9.26 प्रतिशत था अब वह वर्ष 2018-19 में जून 2018 तक 8.08 प्रतिशत हो गया है, जो अपनी आप में व्यापक सुधार को परिलक्षित करता है।

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